सूरज चाचू. July 21, 2011 kavita, manu srijan, manushrivastav, poem 2 comments चलते चलते थक गए,शाम ढली तो रुका गए,थोडा सा कर लो विश्राम, कल से फिर करना काम Share This: Facebook Twitter Google+ Stumble Digg Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
धन्यवाद मनु भतीजे.
ReplyDeleteमुझे कहाँ विश्राम
आपके यहाँ शाम,
तो कहीं और फिरसे सुबह करके
मुझे तो करते ही रहना है काम
हाँ,रात में आप जरूर विश्राम करलें,
सुबह होने पर फिर मेरे दर्शन करलें.
बहुत बहुत आभार.
धन्यबाद राकेश जी ,
ReplyDeleteआपके निरंतर प्रोत्साहन के लिए.