जनता बेचारी त्रस्त है आलू प्याज के निवाले में.
नेता लोग घोटाला करते लाख के करोड़ के
जनता रोटी खा रही है बिन सब्जी डाल के तोड़ के.
खेल के नाम पे हो गए कितने ही खिलवाड़ यहाँ
जैसे तैसे कर रहे हैं कुछ गरीब, रोटी का जुगाड़ यहाँ.
पक्ष और विपक्ष यहाँ पे दोनों को ही लांछन है.
चिर खीच रहे हैं, जनता का, दोनों ही दुशासन हैं
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