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Saturday, December 25, 2010

सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया

 December 25, 2010     hindi poem, kirane, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, naya., prabhat, suraj     No comments   

रफ़्तार



                                    

सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया


नई उमंगे, नई तरंगे, मन में है जज्बात नया .
------------
ऍ सुरज तुम रॉज चमक के जग को रोशन करते हो


अन्धकार को दूर भगा के जग में खुशियां भरते हो


ऍ सुरज तेरे हि कारण होता है, दिन रात नया


सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
-----------
घनघोर अन्धेरे से लड्ने कि तुमसे हि शक्ति मिलती है


क्युं न पउजे तुम्को भगवन , तुमसे हइं कलिया. खिलती हैं


मन सतरन्गी हो जाये, फिर आता है हालात नया


सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
--------------------------------
नवजीवन देने कि शक्ति है ऍ सुरज तेरी किरनो में


स्वीकार करो तुम ऍ भगवन ये जल क अर्पण चरणों में


दया तुम जग पे करते हो, देते नित सैगात नया


सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
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