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Sunday, December 12, 2010

कानून के लम्बे हाथ !

 December 12, 2010     bhaiya ji, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, कानून के लम्बे हाथ     1 comment   

मौलवी साब और सरदार अमरीक सिंह , तबेले में रखे खाट बैठे हुए बतिया रहे थे. तभी भईया जी  अपनी फटफटिया पे बाहर से आये. सरदार जी ने पूछा- "कहाँ  थे यार? कब से बैठे हुये हैं हम."
भईया जी अपनी फटफटिया खड़ी करते हुये बोले -"भाई ! जरा बाजार गया था. भैसिया ने लात मार के हुक्कावा  तोड़ दिया था. नया लेने गया था. तुम बताओ का चल रहा है.बड़े खुश दिख रहे हो. कोई नया समाचार आवा है का पेपरवा में "
सरदार जी बोले-"नहीं, कोई नयी खबर नहीं है. पर नोएडा के भूमि घोटाले में कोर्ट का फैसला आया है. नीरा यादव , समेत मुख्य गुनेह्गारो को चार साल कि कैद और 50000 रुपये का जुर्माना हुआ है."

इधर भईया जी, सरदार जी कि बात सुनते  हुये ऊँचे मचान से तंबाकू कि डिबिया उतार रहे थे. हाथ नहीं पहुँचाने के बाद भी कोशिश किये जा रहे थे.
मौलवी साब न्यूज़ सुन के बोले-"बरखुरदार! भला ये क्या बात हुई? करोडो का घोटाला हुआ, और 50000 का जुर्माना, 6 साल लगे फैसला आने में और 4 साल कि सजा. समझ में नहीं आता है, कि क्या होगा इस देश का.? "

"अरे ! मौलबी साब. ये क्यों नहीं देख रहे हो कि कितने बड़े बड़े लोगो को सजा सुनाई है कोर्ट ने . ये भी अपने आप में एक मिशाल  है , कि अपराधी कोई भी हो कानून से बच नहीं सकता है."- सरदार जी बात तो मौलबी साब से कर रहे थे, पर देख भईया जी को रहे थे , जो अभी ऊँचे मचान से तम्बाकू कि कि डिबिया उतरने कि कोशिश कर रहे थे. वे भईया जी से बोले -"छोड़ दीजिये भईया जी, वो आपके पहुँच  से दूर है."

भईया जी ने कोशिश करना छोड़ते हुये बोले -"काश ! मेरे भी हाथ कानून कि तरह लम्बे होते!"
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1 comment:

  1. luveDecember 12, 2010 at 9:33 PM

    sahi ekdum. kanoon ke hath labme aur prabhawshali hain abhi tak. aage ke liye dua kariye aisa hi rahe.

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