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Sunday, December 12, 2010

प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है

 December 12, 2010     hindi poem, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     2 comments   

क्या करोगी जान के मेरे बारे में ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो  इतना प्यार का,  ना रूप होता है ना रंग होता है .

क्या करोगी देख के मुझको,  मेरी ऐ जाने जाँ
बस जान लो  इतना प्यार का, ना देह होता है ना आकर होता है.

क्या करोगी सुन के मुझको,  मेरी ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो  इतना प्यार का, ना बोली होती है, ना आवाज़ होती है.

कर सको महसूस, तो कर लो, मुझे ऐ जाने जाँ,
बस जान लो  इतना प्यार में, बस ख़ुशी होती , बस दर्द होता है. 
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2 comments:

  1. अनामिका की सदायें ......December 12, 2010 at 7:22 AM

    सुंदर विश्लेषण.

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. luveDecember 12, 2010 at 9:32 PM

    pyar ka na rup hota hai na rang hota hai.
    pyar sirf ahsas hota hai, chahe dukh ka ho ya dard ho.
    aur jo ise mahsus karta hai. sachche artho me wahi pyar karta hai ya pyar karne ke kabil hai. baki sab dikhawa hai .

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
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