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Friday, May 13, 2011

लुका छिपी !!

 May 13, 2011     bhaiya ji, India, luka chhipi, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, pakistan, vyang     2 comments   

सरदार अमरीक सिंह भन्नाये हुये आये और धम्म से खटिया पैर बैठ गए | बेचारी खटिया चर्र्रर्र्रर्र्र कर के चुप हो गयी, और कर ही क्या सकती है, बेचारी निरीह, भारतीय जनमानस की तरह |

भईया जी अपने परम मित्र की ये हालत देख के भैस दुहना छोड़ के उनके पास आये, और अपनी आवाज़ में मिश्री घोल ठीक वैसे ही बोले जैसे, सरकारी दफ्तरों में बाबु लोग, किसी से अपनी जेब गरम होने की उम्मीद में बोलते हैं, - "क्या हुआ, अमरीक, अमेरिका की तरह क्यों भन्नाये हुये हो?"

अमरीक सिंह - "आज दफ्तर में लुका छिपी खेल का आयोजन हुआ था | मैं कही भी जाके छुपता था, लोग आके पकड़ लेते थे | क्या, कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ कोई आराम से छुपे और पकड़ा ना जाये  ?"

भईया जी - "पाकिस्तान चले जाओ ! "


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2 comments:

  1. Udan TashtariMay 13, 2011 at 6:07 PM

    हा हा! उम्दा कटाक्ष....


    जरा लम्बे व्यंग्य आलेख की कोशिश करो..शैली अच्छी है!

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. manu shrivastavMay 15, 2011 at 10:41 AM

    aapka dhanya baad.

    koshish karunga, bas aaplogo ka ashirwad chahiye!

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
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