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Wednesday, July 27, 2011

दिल चाक चाक सा हो जाता है .

 July 27, 2011     dil chak chak sa ho jata hai., hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     4 comments   


खामोश आँखे तेरी,
कहती हैं कितना कुछ,
जब तलक उसकी भाषा,
समझ ना आये.
वे,
खामोश सी लगती हैं,
और जब,
आती है समझ,
भाषा तेरे आँखों की,
बस, उसी पल,
दिल चाक चाक सा हो जाता है .

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4 comments:

  1. somaJuly 27, 2011 at 10:03 AM

    खामोश सी लगती हैं,
    और जब,
    आती है समझ,
    भाषा तेरे आँखों की,
    बस, उसी पल,
    दिल चाक चाक सा हो जाता bahut achcha likha manu dil chak sa ho jata hai......hmmmmmmmmmmmm

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. डॉ॰ मोनिका शर्माJuly 27, 2011 at 4:58 PM

    खूब ...सुंदर शब्द दिए मनोभावों को....

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  3. रेखाJuly 28, 2011 at 3:04 AM

    सुन्दर रचना

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  4. गुमनाम शायरAugust 5, 2011 at 8:39 AM

    बहुत खूब।

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
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