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Thursday, December 23, 2010

उमर जैसे जैसे साठ के पार होता है आदमी इशक का और भी बीमार होता है,

 December 23, 2010     aaj bahut se ladkiya jal rahi hain, buddhe, hasya, hindi poem, ishk, kahata, karte, kon, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, nahi, shyari     2 comments   

उमर जैसे जैसे साठ के पार होता है
आदमी इशक का और भी बीमार  होता है,


निशब्द होने पे ही चीनी कम होता है,
साठ के बाद ही इशक में दम होता है.


कौन कहता है कि बुद्धे इशक नहीं करते
करते हैं तो खुले आम करते हैं.


इस उमर में इशक कि ना बीमारी हो,
धर्मेन्द्र हों चाहे एन डी तिवारी हों.


यमला पगला दीवाना के आइटम सोंग टिंकू जिया का एक  दृश्य 


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2 comments:

  1. MonuDecember 23, 2010 at 12:36 PM

    http://youtu.be/9hSIo9D6g20

    ReplyDelete
    Replies
      Reply
  2. abhishekDecember 23, 2010 at 4:16 PM

    Nice one

    ReplyDelete
    Replies
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