रईसियत में काफी शौख थे , जिनको पुरे करते आये वो. ज़माने के साथ कई चीज़े बदलीं , चाल ढाल, पहनावा ओढावा, खान पान,
मालिक बदले, नौकर बदले. पर नहीं बदला तो रईसियत और उनका एक खानसामा.
पुराने खानसामा का काम कुछ जायदा नहीं था, बस मालिक की पसंद का खाना बनाना और फाकें मारना.
हवेली में आये दिन नए मुलजिम आते और जाते रहते थे.
एक नए मुलाजिम ने पुराने खानसामा से पूछा - "मैंने पिछले कुछ दिन में देखा की कई लोग नौकरी पे आये और छोड़ के चाले गए. आप में ऐसी क्या खास बात है की तीन पीढियों से इस घर में टिके हुए हो. "
पुराना खानसामा मुस्कराया , मानो नए मुलाजिम ने बच्चो जैसी बात कर दी हो. अपनी मुस्कराहट दबा के वो बोला - "बेटे! जो मालिक होता है , वो शक्ति का प्रतीक होता है, और उसकी जी हुजूरी करनी पड़ती है. मैंने अपने वर्तमान मालिक के दादा की जी हुजुरु की , इनके पिता की की, इनकी कर रहा हूँ , आगे भी करता रहूँगा. "
ha ha ha !!!
ReplyDeletechamche har jagah paye jate hian. aur taraki bhi yahi karte hian, bhale kuchh aaye jaye na.
waah kya baat kahi hai
ReplyDeletesahi baat hai.
ReplyDelete