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Tuesday, December 7, 2010

भंडार तो धरती पे भी थे- भईया जी

 December 07, 2010     bhaiya ji, mangal grah pe jeevan, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, short story     2 comments   

मौलवी साहब खुश थे बहुत. भईया जी के मुह में पान का बीड़ा ठुसते हुए बोले-"भाई! मुँह मीठा करो !. "

भईया जी पान थूकते हुए बोले-"खाक मीठा करो, चुना ज्यादा डाल दिया है, जीभ काट दिया उसने."
मौलवी साब ने उनकी बात पे ध्यान दिए बगैर बोले - "अरे ! तुमको पता है कि मंगल ग्रह पे भी जीवन संभव है, वहाँ कार्बन डाई आक्साइड के भंडार का पता चला है. "

भईया जी के मुँह से अभी भी चुने कि कडवाहट नहीं गयी थी. कडवी आवाज में ही बोले - "कार्बन डाई आक्साइड के भंडार तो धरती पे भी थे!! !"
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2 comments:

  1. don'spowerDecember 7, 2010 at 11:04 PM

    dharti ke bhandaro ko to hum manushya chat kar gaye. ab humari lalchi najare idhar udhar dekh rahi hain

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  2. luveDecember 12, 2010 at 9:34 PM

    hmm ab shyad mangal ki bari hai :x

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