ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Thursday, August 1, 2013

जय माँ भवानी, थावे वाली

 August 01, 2013     manu, manu shrivastav, manushrivastav, thawe, thawe bhawani, thawe mandir, thawe wali maa, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल मुखी राम हाई स्कूल तब थावे का एक मात्र हाई स्कूल हुआ करता था. मेरे स्कूल से दुर्गा जी का मंदिर लगभग २ किलोमीटर की दुरी पर है. दो किलोमेटे की दुरी तय करना हमारे लिए तब किसी एवेरेस्ट की चढाई से कम नहीं था. तब हम खेतों की पगडंडियों के बिच शोर्ट कट ढुंढते हुए लग भाग हर शुक्रवार को मंदिर जाते थे. 

शुक्रवार और सोमवार को अन्य दिनों की तुलना में कुछ ज्यादा हिन् दर्शनार्थी आया करते थे. यहाँ तक की गोरखपुर, जो लगभग अस्सी किलोमीटर हैं, वहां तक से लोग छोटी लाइन की रेलगाड़ी जो सुबह दस बजे थावे पहुंचती थी, आया करते थे. 

तब एक रुपये में दो पेंडा, एक अगरबत्ती और एक चुनरी , हाथ में बांधने के लिए मिलाती थी. बहुत हीं श्रद्धा से पूजा के बाद, हमारी आपस में लड़ाई हो जाती थी. की चुनरी कौन बंधेगा अपने हाथ में. बाद में इसका हल ऐसे निकला की हम चार लोग बारी बारी से बांधा करेंगे. 

वापस लौटते समय, मेन रोड के किनारे इमली के कई सारे पेंड़ों से, डंडे पत्थर मार के इमली तोड़ी जाती थी. पत्थर मार के इमली के गुच्छे तोड़ने के हम इतने अभ्यस्त हो गये थे, की अगर कहीं पत्थर मार कर निशाना लगाने की प्रतियोगिता होती तो हममे से हरेक कोई, कोई न कोई मैडल जरुर जीतता. 

इमली से भरे हुए स्कूल का झोला, कपडे का झोला, लेकर जब स्कूल पहुंचते, तो क्लास लग चुकी होती थी. और दूसरी घंटी बजने तक हमे बाहर हीं इंतज़ार करना होता था. क्लास में पहुँचाने के बाद सभी इमली पार्टी का दौर शुरू होता. और आधे घंटे में हीं क्लास में मौजूद हर लड़के के जेब में दो दो चार चार इमली पहुँच चुकी होती थी. आखिरी घंटी तक दबी आवाज़ में इमली के चटकारे गूंजते रहते थे. और शाम तक सभी के दांत खट्टे हो चुके होते थे. 

तब पुराना मंदिर था, अभी पिछले साल थावे जाना हुआ, तो मंदिर पर काफी बदलाव हो चुके हैं, मंदिर पहले से अधिक भव्य और साफ़ सुथरी लग रही थी. दुर्गा माँ पहले की तरह हीं आज भी सभी के लिए बरस रहा है. 


आज भी दुर्गा माँ की शक्ति और आशीर्वाद, मन में इतने गहरे तक पैन्ठी हुई है, कुछ भी कार्य शुरू करने के पहले, जय माँ भवानी, का उच्चारण निकलता है. जय माँ भवानी , सबका कल्याण करो.


जय माँ भवानी !
 (दोनों फोटो इन्टरनेट से ली गयी है, फोटो अपलोड करने वाले को साधुवाद)



थावे वाली माँ की कहानी आप यहाँ पढ़े 

... http://aajtak.intoday.in/story/maa-bhawani-came-to-thawe-from-kamakhya-1-727406.html
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, July 27, 2013

how to type HINDI without using Internet?

 July 27, 2013     hindi typing, hindi typing offline, how to type HINDI without using Internet, kruti dev font, Mangal font, manu, manu shrivastav, manushrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

कंप्यूटर पर इंग्लिश में लिखना बहुत आसान है ,मगर हिन्दी टाइप करना थोडा मुश्किल है. ये मुश्किल तब और भी बढ़ जाती है जब हिंदी टाइपिंग नहीं आती हो. हिंदी टाइपिंग को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन कई सारे साइट्स मौजूद हैं, जो हिंदी टाइपिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हैं. आप इंग्लिश में टाइप करते जाते हैं, और आपके सामने हिंदी यूनिकोड में टाइप होता जाता जाता है. मगर इस सुविधा का फायदा कोई भी तब हीं उठा सकता है, जब उसके पास इन्टरनेट का कनेक्शन हो.

मगर गूगल ने एक ऐसी सुविधा दी है, जिससे आप ऑफलाइन भी हिंदी यूनिकोड की टाइपिंग का लुफ्त उठा सकते हैं. इसके लिए अपने सिस्टम में बस थोड़ी सी सेटिंग करनी होगी.

लेकिन यहाँ भी एक समस्या है की हिंदी यूनिकोड फॉन्ट को प्रयोग सिर्फ साईट में कर सकते हैं, उसका प्रयोग किसी टाइपिंग सॉफ्टवेर में नहीं कर सकते हैं. हिंदी टाइपिंग सॉफ्टवेर में ज्यादातर kruti dev फॉन्ट का प्रयोग होता है. कुछ अन्य फॉन्ट भी प्रयोग किये जाते हैं, मगर kruti dev ज्यादा प्रचलन में है.

यहाँ पर मैं कुछ यहाँ पर मैं कुछ सेटिंग बताने जा रहा हूँ, जिससे कोई भी हिंदी को यूनिकोड में टाइप कर के उसे kruti dev फॉन्ट में कन्वर्ट कर सकता हैं. उसके बाद यूनिकोड को साईट पर और kruti dev को प्रिंटिंग के लिए आराम से प्रयोग कर सकता हैं.

गूगल में ढूंडते हुए सबसे पहले मुझे पता चला था की ऑनलाइन हिदी में कैसे टाइप करते हैं. थोडा और ढूंढा तो पता लगा की हिंदी यूनिकोड फॉन्ट को kruti dev में कैसे कन्वर्ट करते हैं. थोडा और ढूंढा तो ये भी पता लग हीं गया की ऑफ लाइन यूनिकोड कैसे टाइप करते हैं.

पढ़ा था की आवश्यकता हीं मम्मी है. तो अंततः मुझे हिंदी टाइपिंग का वो तरीका मिल ही गया , जिसकी मुझे जरुरत थी. हिंदी में टाइपिंग करने के लिए हिंदी टाइपिंग भी सिखा जा सकता था या सिखा जा सकता है. मगर जब आसान तरीका मौजूद है तो मुश्किल रस्ते को क्यों चुना जाये?

खैर! काम की बात ये है, ऑनलाइन हिंदी यूनिकोड लिखने लिए, ऑनलाइन हिंदी यूनिकोड को मंगल फॉन्ट कहते हैं, गूगल में Indic transliteration सुविधा थी, बाद में उसका नाम बदल कर Cloud हो गया. जो गूगल के Input Tool के अन्दर आता है. ऑनलाइन हिंदी यूनिकोड आप यहाँ पर टाइप कर सकते हैं, - http://www.google.co.in/inputtools/cloud/try/ .. आपके पास 24 x 7 इन्टरनेट की सुविधा उपलब्ध है तो ये लिंक आपके लिए बहुत कारगर है. अगर नहीं , तो फिर आगे बढ़ते हैं.

इसे आप अपने कंप्यूटर में भी इनस्टॉल कर सकते हैं, इनस्टॉल करने के लिए आपको उसे यहाँ से डाउनलोड करना होगा - http://www.google.co.in/inputtools/windows/    यहाँ आपको हिंदी में टिक लगाना होगा, फिर टर्म एंड कंडीशन को एग्री करने के लिए टिक लगाना होगा उसके बाद डाउनलोड करिए और उसे इनस्टॉल करिए. 

इनस्टॉल करने के दौरान आपका इन्टरनेट कनेक्शन चालू होना चाहिए.  आपका इन्टरनेट कनेक्शन जितना ज्यादा फ़ास्ट होगा, आप उतनी हीं जल्दी उसे इनस्टॉल कर पाएंगे.

चलिए मान लिया की आपका इन्टरनेट कनेक्शन बहुत फ़ास्ट है और गूगल के Cloud App आपने इनस्टॉल कर लिया है. 

इनस्टॉल होने के बाद कंप्यूटर के डेस्कटॉप के राईट बॉटम कार्नर में एक नया आइकॉन दिखाई देने लगेगा. - EN . 
 फिगर :01

EN बॉटम पर क्लिक करने पर एक pop-up खुलेगा, उसमे आपको EN और उसके निचे HI दिखेगा .

फिगर :02

 EN मीन्स English.  HI मीन्स हिंदी . 

हिंदी में टाइप करना हो तो हिंदी सेलेक्ट कर लीजिये, इंग्लिश टाइप करना हो, तो इंग्लिश सेलेक्ट कर लीजिये. और टाइपिंग का पूरा लुत्फ़ उठाइए. 

'लेख' अभी खत्म नहीं हुआ है. 

हिंदी टाइप करने के लिए ऊपर के फिगर: 02 में जब आप हिंदी को सेलेक्ट करोगे, एक pop-up और खुलेगा. ( ( (कभी-कभी नहीँ भी खुलता है, अत: घबडाने कि जरा भी जरुरत नही है ) इस pop-up में कुछ करने की जरुरत नहीं है. मगर है वो बड़े हीं काम का. pop-up कुछ इस प्रकार का होगा 

 फिगर 03


फिगर 03 में एक कि-बोर्ड बना है, उसपर क्लिक करने से एक pop-up खुलेगा, जो एक गाइड का काम करेगा, की कौन सा अक्षर लिखने के लिए कौन सा बटन दबाएँ. वैसे आपने ऑनलाइन हिंदी में इतनी टाइपिंग कि होगी की आपको इस गाइड की जरुरत नहीं हीं पड़ेगी. 



अब आपको अपने टाइप किये हुए मैटर को हिंदी यूनिकोड यानी मंगल फॉन्ट से kruti dev फॉन्ट में कन्वर्ट करना है. आप ऑनलाइन भी कन्वर्ट कर सकते हैं और ऑफलाइन भी कन्वर्ट कर सकते हैं. दोनों सुविधा आपको एक हिं साईट पर यहाँ  ( http://rajbhasha.net/drupal514/UniKrutidev+Converter ) से मिल जाएगी. ऑफलाइन के लिए बस आपको अपने सिस्टम में कनवर्टर इनस्टॉल करना होगा, जो की इसी लिंक से डाउनलोड हो जाएगी.


फॉन्ट कनवर्टर में दो बॉक्स बना होता है. एक kruti dev फॉन्ट के लिए दूसरा यूनिकोड फॉन्ट के लिए. यानी आप यूनिकोड से kruti dev और kruti dev से उनिकोड दोनों में कन्वर्ट कर सकते हैं. 

 हम यहाँ हिंदी यूनिकोड मंगल फॉन्ट से kruti dev में कन्वर्ट करने की बात कर रहे हैं, तो इसी बात को लेकर आगे बढ़ते हैं. मंगल फॉन्ट को kruti dev में कन्वर्ट करने के बाद हमे जो आउटपुट ( आउटपुट हमेशा इंग्लिश लेटर्स में मिलेगा.) मिलता है, उसे MS-WOrd में कॉपी करके , उसका फॉन्ट kruti dev से चेंज कर देंगे.

और लीजिये आपका हिंदी यूनिकोड में टाइप किया हुआ मैटर kruti dev में कन्वर्ट हो गया है. 

एक मिनट रुकिए , आपके कंप्यूटर में kruti dev फॉन्ट इनस्टॉल तो है ना? 

नहीं है? 

अरे! कोई बात नहीं. kruti dev फॉन्ट यहाँ से ( http://indiatyping.com/index.php/download/95-hindi-font-krutidev ) डाउनलोड कर के इनस्टॉल कर लीजिये. दो मिनट हीं तो लगेगा. 

और लीजिये आपका हिंदी यूनिकोड में टाइप किया हुआ मैटर kruti dev में कन्वर्ट हो गया है. 

आखिर में अगर आपको लगता है की इतना सब करना बहुत हीं लेंदी प्रोसेस है तो भाई ऐसा करो की हिंदी टाइपिंग हीं सिख लो. और हिंदी टाइपिंग सिखने के लिए किसी टाइपिंग इंस्टीच्युट में जाने की जरुरत नहीं है, वो भी आओ यहाँ ( http://indiatyping.com/index.php/typing-tutor/hindi-typing-tutor-krutidev ) ऑनलाइन हीं सिख सकते हैं. मगर ध्यान रहे यहाँ पर टाइपिंग सिखने के लिए इन्टरनेट का कनेक्शन होना जरुरी है.

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, July 14, 2013

Jonny Jonny (writer version)

 July 14, 2013     hasya, hindi poem, Jonny Jonny, manu shrivastav, manushrivastav, turkash.blogspot.in, मनु श्रीवास्तव, व्यंग, हास्य     No comments   

Jonny! Jonny!
Yes Papa!
Writing Novel?
Yes Papa.
Novel Published?
No Papa.
Script Rejected?
No Papa.
Publisher Denied?
Ha! Ha! Ha! Ha! Ha!

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, July 11, 2013

आईने

 July 11, 2013     aaine, love poem, manu shrivastav, manushrivastav, poem, turkash, turkash.blogspot.in, आईने, कविता     No comments   

क्या जरुरत है तुझको किसी आईने की,
तेरा हुश्न मोहताज है ना किसी की,
संगमरमर की मूरत हो,
बहुत खुबसूरत हो,
तराशी गयी हो,
जो तबियत से फुरसत में,
मानों यकीं मेरा,
तुमसा नहीं कोई,
देखा है तुमको,
तो थम सी गयी है,
ये हवा इन फिजाओं की,
परवाह नहीं हैं उनको,
घुटती हुई सांसों के किसी की,
दीदार तेरा है, रमजान का चाँद,
टकटकी लगाये,
निहारे जा रहे हैं,
तेरा अक्स समाया है,
आँखों में मेरी,
ये आँखे ना कम हैं,
किसी आईने से,
इन्ही आइनों को आजमा के देखो




Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, July 7, 2013

एक रूपया

 July 07, 2013     dollar, ek rupaya, hasya, manu shrivastav, manushrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, मनु श्रीवास्तव, व्यंग, व्यंग्य, हास्य     No comments   

एक रूपया कितना मूल्यवान है, ये उन्ही को पता है जिन्हें एक रुपये की जरुरत पड़ती है. मसलन अगर किसी शुभ कार्य में न्योता करना हो, तो एक रुपये की दरकार पड़ती हीं पड़ती है. अब दूसरी तरफ , आप कोई ब्रांडेड सामान खरीदने जा रहे  हैं, को आपको हर सामान का मूल्य एक रुपया कम कर के लिखा मिलेगा। 
अब अपने शहर जमशेदपुर को हीं ले लीजिये,  टेम्पू किराया में बढ़ोतरी के बाद जब विरोध हुआ ,तो कुछ ऑटो वाले भाइयों ने किराया पुनः कम कर दिया, मगर कुछ ने एक रुपया रुपया बढ़ाये रखा है. अब एक रुपये की महिमा है हि निराली क्या कीजियेगा? बस अब यात्रियों को थोडा मसक्कत करना होगा, ऑटो ढुढने  मे, किस ऑटो में बैठे की एक रूपया कम देना पड़े और किस्मे बैठने में  एक रूपया ज्यादा देना पडेगा। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रस्ताचार, और जीवन के भागमभाग के बिच , ये एक और समस्या बढ़ गयी। 
रुपये पैसे के लिए बहुत सी लड़ाईयां लड़ी गयी हैं, पर अब तो हर गली -चौराहे पर एक रुपये की लड़ाई लड़ी जाती है. वो वाली लड़ाई नहीं जिसने तीर तलवार की जरुरत हो, इसमें सिर्फ बत्तगुजन होता है. 
किसी को किराया देना है, और उसके पास एक रुपये छुट्टे नहीं हैं, अब बिना पूरा किराया दिए वो जा नहीं सकता और बिना पूरा किराया लिए कोई उसे जाने नहीं देगा. फिर क्या, आपको अपनि जेब के हर कोने को टटोलना होगा, कहीं से तो निकले ये कमबख्त एक रुपया। और जब आप पूरा मन लगा कर ढूढीयेगा तो किसी न किसी जेब से एक रुपया तो निकल हीं आएगा।  और ये किसी खजाने से कम नहीं होगा. उसे थामने वाला हाथ कांप ही जायेगा, अगर सही से उस रुपये को नहीं पकड़ा तो , रुपये का हाथ से छुट कर गिर जाने से कौन रोक सकता है. रूपया तो लक्ष्मी होता है, चालक भाई साब उसे गिरने से बचाने की पुरजोर कोशिश कर सकते हैं, इस क्रम में वो खुद गिरते गिरते रह जायेङ्गे. पर सवाल है, की रुपये को कहाँ कहाँ गिरने से बचायेंगे,  रूपया तो हर जगह गिर रहा है. रुपये के लिए इंसान गिर रहा है. उतराखंड में को हीं  लेते हैं,वह इतनी भयानक आपदा आई है, इस त्रासदी से देशदुनिया हिल गयी है. पर कुछ के दिल जरा भी नहीं हिले, आपदा ग्रस्त लोगो से जीवनोपयोगी चीजों को दुगुने तिगुने दामों पर बेचते हुये, कुछ के जमीर तक नहीं हिले, शव से गहने और रुपये चुराते हुये. 
उनके लिए मानो एक हीं मंत्र था, बाप बड़ा ना भईया , भईया सबसे बड़ा रुपया। शायद उनको डॉलर के बारे में ना पता हो, जिसने सामने रूपया भी गिर रहा है, रोज़ एक रुपया कर के. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, April 29, 2013

सोंच रहा हूँ मैं !

 April 29, 2013     hindi kavita., hindi poem, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, सोंच रहा हूँ मैं     No comments   


पूछ रहा था वो,
क्या लिखूं आज,
सोंच रहा हूँ मैं,
तू हीं,
कुछ बता,
बोर हो चूका हूँ,
प्यार मोह्हबत की
बातें लिखा कर,
सोंच रहा हूँ,
कुछ नया लिखू,
कह दिया मैंने,
लिखना है तो,
भूख और हवस
पर लिख.
मना कर दिया उसने,
कहा - कभी तो डिसेंट रहा कर,
अब,
सोंच रहा हूँ मैं,
डिसेंट कैसे रहा जाता है?
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, April 18, 2013

सिगरेट का धुआँ

 April 18, 2013     hasya, hindi kavita., hindi poem, kavita, manu, manu shrivastav, manushrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, व्यंग्य, सिगरेट का धुआँ, हास्य     No comments   

सिगरेट ली,
ओठों से लगाई,
माचिस ली,
फ़र्रररर से जलाई,
कश खिंचा,
और टशन में धुंआ छोडा,
बेचैन रूह को,
राहत आई।
उंगली में सिग्गी फंसा के,
आसपास जायजा लेना शुरू किया .
सामने पौधों की दुकान से,
दो कन्यायें मुझे ताड़ रहीं थीं.
तीनों की नज़र टकराई,
तीनो झेंप गये.  
मैंने एक और कश ली और,
नज़र थोडा और घुमाया,
अगले हि पल मैंने सिगरेट फेंका,
उसको जूतों से मसला।
थोड़ी देर पहले जो धुआँ,
सिगरेट से उड़ रहा था,
अब वही मेरे चेहरे से उड़ रहा था. 
चचा को अभी हीं इधर आना था। 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, April 16, 2013

वो

 April 16, 2013     hindi kavita., kavita, manu, manu shrivastav, manushrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


वो,
ठुनकते हैं,
मचलते हैं,
जिद करते हैं,
लड़ते हैं, 
मुस्कुराते हैं,
फिर खिलखिलाते हैं,
नादान हैं,
बच्चे हैं,
सिख जायेंगे,
दुनियादारी क्या है?
इसका कोई,
गुरुकुल नहीं, 
इसका कोई,
आचार्य नहीं,
ये कोई,
हौवा नहीं,
अकल बढती है,
समझ बढती है,
फिर आ जाता है,
सलीका,
हर चीज़ का। 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, April 14, 2013

एज युजुवल विद्वान !!

 April 14, 2013     hasya, manu, manu shrivastav, manushrivastav, short story, story, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     5 comments   

एक किवदंती है. 
एक पंडित जी थे, बहुत विद्वान थे. एज युजुवल. 
उनकी शादी हो गयी , ससुराल वालो ने अपनी लड़की की बड़ाई में बोल दिया था की लड़की पढ़ी लिखी है. ये सुन कर पंडित जी बौखला गये थे. अब वो अपनी पत्नी के हर काम में गलती निकालते. 
पत्नी ने दाल रोटी बनायी , पंडित जी भड़क गये - चावल क्यों नहीं बनाया?
पत्नी ने चावल बनाया, पंडित जी भड़क आज  दही चुरा खाना था. 
पत्नी ने दही चुरा परोसा पंडित जी भड़क गये , आज तो दाल रोटी बनानी चाहिए .
सोने का वक़्त होता, पत्नी ने पलंग पर बिछावन करी, पंडित जी भड़क ग्ये. मुझे चारपाई पर सोना है. चारपाई पर बिछावन लगा पंडित जी को चटाई पर सोना था. चटाई पर बिछावन लगा तो , आँगन में सोना था, आँगन में बिछावन लगा तो उनको पलंग पर सोना था. मतलब रोग कमी निकाल कर पंडिताइन की पिटाई हो जाती थी .
एक रात पंडिताइन ने पंडित जी को खाने में दही चुरा दिया. पंडित ने कहा उन्हें तो दाल रोटी खानी है. पंडिताइन बोली, वो भी बना के रखा है. अभी लाती हूँ . पंडित जी बोले - नहीं रहने दे, मुझे चावल दाल खानी है। पंडिताइन बोली - वो भी बना के रखी है, अभी लाती हॊ। अब पंडित जी को कुछ बहाना नहीं मिल सका आज तो चुप चाप खाना खाना पड़ा उनको . 
खाना खा के सोने की बारी आयी .
सोने केलिए पलंग पर बिछावन लगा था. पंडित बोले मैं तो चटाई पर सोऊंगा , पत्नी बोली - वो भी लगा हुआ है, आप वहां भी सो सकते है। पंडित बोले नहीं मैं आंगन में सोउंगा . पंडिताइन बोली - आँगन में भी बिछावन लगा दिया है. आप वहां भी सो सकते हैं। 
पंडित बोले मैं तो छत पर सोऊंगा, बहुत गर्मी है. पंडिताइन बोली - वह भी बिछावन लगा है. 
दोनों पति पत्नी छत पर सोने गये .
गर्मी का मौसम था। आसमान पूरी तरह से साफ़ था. आसमान में आकाशगंगा निकली हुई थी। पंडित जी ने पूछा - वो क्या है?
पंडिताइन बोली - वो आकाश गंगा है. रात में भगवन अपने रथ पर सवार होकर, इसी रस्ते से गुजरते हैं। 
यह सुनते हि पंडित जी उठे और पंडिताइन की पिटाई प्रारंभ कर दी . इस रास्ते से गुजरने वाला रथ मेरे ऊपर गिर गया तो , मैं तो मर हीं जाऊँगा। तू मुझे जान से मारना चाहती है, तभी मेरे सोने के लिए यहाँ पर बिछावन लगाया.
उस दिन भी पंडिताइन की पिटाई होने से नहीं बच सकी। पंडित जी ने नुस्क निकाल हीं लिया था.
आखिर वो 
एक पंडित जी थे, बहुत विद्वान थे. एज युजुवल. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, February 24, 2013

खरीददारी

 February 24, 2013     hasya, khariddari, manu shrivastav, manushrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, खरीददारी, व्यंग, हास्य     No comments   


ग्राहक  -  भाई साहब ये मूर्ति कितने की है?
दुकानदार -  तीस रुपये की।

ग्राहक  -  दो मूर्ति पचास की दोगे ?
दुकानदार -  नहीं, इतना फायदा नहीं होता है। हाँ, अगर तीन मूर्ति खरीदोगे तो अस्सी का दे सकता हूँ।

ग्राहक  -  तीन मूर्ति अस्सी का दोगे ? यानी ज्यादा लेने पर दाम थोडा कम कर करोगे।
दुकानदार - हां, मुनाफा तो कम होता है लेकिन थोक में माल निकल जाता है वैसे।

ग्राहक -  और अगर मैं छह मूर्तियाँ लेता हूँ, तो क्या 140 का दोगे ?
दुकानदार -  छह मूर्ति 140 का? ह्म्म्म्म ठीक है।

ग्राहक  -  140 में छह मूर्ति दोगे, तो एक मूर्ति का दाम  23 रुपया हुआ। तो ऐसा करो की दो रुपया और लगा के पच्चीस के हिसाब से दो मूर्ति पचास में दे दो।

दुकानदार - नहीं भाई, इतना फायदा नहीं है, मूर्ति के धंधे में। 
ग्राहक  - लेकिन आप हिन् बताओ की मैं छह मूर्ति लेकर करूँगा क्या। थोडा तो सस्ता करो आप।

दुकानदार - इससे सस्ता और कहीं नहीं मिलेगा आपको, चाहो तो पता कर लो आप।
ग्राहक  -  अब खरीदने आपके पास आया हूँ तो कहीं और पता क्या करना है? पाँच मूर्ति लूँ तो कितने का दोगे ? 

दुकानदार - पांच मूर्ति एक साथ लोगे तो 120 का दे दूंगा। थोक के भाव पर।
ग्राहक  -  अरे भाई पांच मूर्ति को 120 में दोगे तो एक मूर्ति कीमत 24 रुपये हुई न। मुझे दो हि मूर्ति चाहिए। आप 24 रुपये के साथ एक रुपया और जोड़ लो और पच्चीस के हिसाब से दो मूर्ति दे दो।

दुकानदार -  नहीं दे सकता हु, फायदा नहीं है, थोक भाव में बेचने पर भी फायदा नहीं है, बस मेरा माल निकल जायेगा इसलिए मैं इसे 120 में 5 मूर्ति देने को तैयार हु।

ग्राहक  -  लेकिन मैं पांच लेकर करूँगा क्या? अच्छा सही सही रेट लगा दो, अगर तीन हीं  लेलु तो कितने का दोगे ?
दुकानदार - लास्ट रेट बता रहा हूँ। 3 मूर्ति को 75 से कम में नहीं दूंगा।

ग्राहक  - 75 में तीन मूर्ति दोगे ? यानी एक का दाम पच्चीस रुपये। ठीक है मंजूर है, दो मूर्ति दे दो। ये लो पचास रुपये।
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, January 18, 2013

कोंग्रेस का चिंतन शिविर

 January 18, 2013     hasya, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, कोंग्रेस का चिंतन शिविर, व्यंग, हास्य     No comments   

कोंग्रेस का चिंतन शिविर जयपुर में चल रहा है। सभी चिंतित हैं। किसी को दो हजार चौदह के चुनाव की चिंता है तो किसी को राहुल गाँधी के अगले प्रधान मंत्री के तौर पर देखने की।  कोई माध्यम वर्ग के उपजे गुस्स्से से चिंतित है।  कोई भ्रष्टाचार की ग्रोथ रेट से। महिलाओं की सुरक्षा से भी चिंतित हैं , तो कोई देश की सरहद पे विदेशियों के अत्याचार से (कह नहीं सकते ये चिंता किसी ने की थी या नहीं ). 
मैं तो कहूँगा की चिंता कर के आप अपनी चतुराई को मत घटाइए . आपने सुना नहीं क्या। चिंता से चतुराई घटे दुःख से घटे शरीर .... या भी ये नहीं सुना क्या चिंता से आयु घटती है।
अरे घटाना है तो महंगाई घटाइए। रेप की घटनाओ को घटाइए। प्तेरोल का दाम घटाइए। गैस का दाम घटाइए। आप अपनी चतुराई और आयु  घटाने पर खामखाह तुले हुए हैं।  
 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, January 5, 2013

स्वाद

 January 05, 2013     chai, hindi kavita., hindi poem, kavita, manu, manu shrivastav, poem, turkash, turkash.blogspot.in, स्वाद     No comments   


कांच के ग्लास से दिखती लाल या कत्थई तरल पदार्थ,
आँखों को बहुत हीं सुकून पहुंचती है।
ग्लास से निकलती भाप को,
नाको के पास ले जाकर,
उसकी खुशबु को सूंघना।
बहुत हीं समानता है, उसकी खुश्बू और
चायपत्ती के चबाने के स्वाद में।
फिर सुर्र्र्र्र्र से चुस्की, उसकी।
और तृप्ति भरी 'आssssह' का अहसास,
 कुछ हीं लोगो को महसूस होगा।
निम्बू के रस से उसके स्वाद में इजाफा होता है,
और बिना निम्बू के उसका स्वाद कितना आनंददायक होता है।
कभी 'रेड टी' बना के पिना और बताना।
ग्लास में रखा हर लाल तरल पैग नहीं होता।
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Newer Posts Older Posts Home

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ▼  2013 (12)
    • ▼  August (1)
      • जय माँ भवानी, थावे वाली
    • ►  July (4)
      • how to type HINDI without using Internet?
      • Jonny Jonny (writer version)
      • आईने
      • एक रूपया
    • ►  April (4)
      • सोंच रहा हूँ मैं !
      • सिगरेट का धुआँ
      • वो
      • एज युजुवल विद्वान !!
    • ►  February (1)
      • खरीददारी
    • ►  January (2)
      • कोंग्रेस का चिंतन शिविर
      • स्वाद
  • ►  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ►  May (8)
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com