ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Tuesday, December 28, 2010

नए साल में..................

 December 28, 2010     happy new year 2011, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

नए साल में,

बढ़ते ट्रेफिक की जाम तरह ,

सबके लाइफ में खुशियों का जाम लगे .

बिजली पानी की कटौती की तरह

सबके दुखो में कटौती हो .

मंहगाई की तरह सबकी समृधि बड़े .

आपका जीवन मनोरंजन से भरा हो

ग्लोबल वार्मिंग की तरह सबके

रिश्तो में गरमाहट बड़े .

मल्लिका शहरावत के कपड़ो की तरह

सबके लाइफ में टेंशन कम हो .

बदती बेरोजगारी की तरह

सबका बैंक बैलेंस बड़े

आतंकवादियों के हमलो की तरह

सबपे नौकरी में इन्क्रीमेंट का हमला हो .

नदियों में फैलते प्रदुषण की तरह

सबके लाइफ में खुशहाली फैले .

सबको नए साल की हार्दिक शुभकामाना !!!!!!
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, December 26, 2010

हर दिल में एक दर्द होता है

 December 26, 2010     manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, shyari     No comments   

रफ़्तार


हर  दिल  में  एक  दर्द  होता  है .
हर  दर्द  में  एक  आह  होती
 हर  आह  में  एक  चाह होती  है
हर  चाह  कि  एक  कहानी  होती  है
हर  कहानी  में  एक  हीरो  होता  है 
हर  हीरो  युही  मुस्कुराना  पडता  है
हर  मुस्कुराने  वाले  को  एक  दिल  होता  है
हर  दिल  में  एक  दर्द  होता  है
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, December 25, 2010

सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया

 December 25, 2010     hindi poem, kirane, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, naya., prabhat, suraj     No comments   

रफ़्तार



                                    

सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया


नई उमंगे, नई तरंगे, मन में है जज्बात नया .
------------
ऍ सुरज तुम रॉज चमक के जग को रोशन करते हो


अन्धकार को दूर भगा के जग में खुशियां भरते हो


ऍ सुरज तेरे हि कारण होता है, दिन रात नया


सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
-----------
घनघोर अन्धेरे से लड्ने कि तुमसे हि शक्ति मिलती है


क्युं न पउजे तुम्को भगवन , तुमसे हइं कलिया. खिलती हैं


मन सतरन्गी हो जाये, फिर आता है हालात नया


सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
--------------------------------
नवजीवन देने कि शक्ति है ऍ सुरज तेरी किरनो में


स्वीकार करो तुम ऍ भगवन ये जल क अर्पण चरणों में


दया तुम जग पे करते हो, देते नित सैगात नया


सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, December 24, 2010

मेरी क्रिसमस तेरी क्रिसमस, क्रिसमस आया रे.

 December 24, 2010     clouze. senta, hindi poem, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, merry christmas, new, sainta, year     No comments   

मेरी क्रिसमस तेरी क्रिसमस, क्रिसमस आया रे.
लाल रंग का चोगा पहने सेंटा आया रे
तरह तरह के उपहारों का  झोला लाया रे
लाल रंग का चोगा पहने सेंटा आया रे
ठन्डे ठन्डे मौसम में गर्माहट आ गयी,
नए साल के आने कि आहट आ गयी,
नए साल पे नयी उपहारें सबको भाया रे
मेरी क्रिसमस तेरी क्रिसमस, क्रिसमस आया रे.

उपहारों से भरा ये झोला देखो कितना बड़ा है भाई,
हाथी घोड़े खेल खिलौने, लड्डू पेंडा और मिटाई,
देने सबको बारी बारी , कहाँ  से आया रे
मेरी क्रिसमस तेरी क्रिसमस, क्रिसमस आया रे.

मुझे जो मिल जाये छड़ी जादू कि, सबपे यूँ  घुमा दूंगा,
सबके मन कि गलत भावनाएँ, पल भर में मिटका दूंगा
बड़े प्यार से , रहो प्यार से , सेंटा समझाया रे
मेरी क्रिसमस तेरी क्रिसमस, क्रिसमस आया रे.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, December 23, 2010

ऐ भोला तू जींस पहिन लs, बदलs आपन वेश

 December 23, 2010     bangala. vote, bhojpuri, car, doctor, engineering, ganesh, jeans, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, parvati, shiv     3 comments   

वोट पडल जब शिव भक्तन के आइल इ जनादेश
ऐ भोला तू जींस पहिन लs, बदलs आपन  वेश, 

फोन लगवा लs या तs लेलs मोबाइल 
भोला जमाना टीवि सीडी के  आइल,
ई मेल  से  भेजिहा भोला आपन तू सन्देश
ऐ भोला तू जींस पहिन लs, बदलs आपन  वेश

बंगला बनवा लs भोला किन लs तू गाडी
किन दs पारवती जी के सूती के साडी
लेलs तूँ मोटरगाडी, जिनगी हो जाई रेस 
ऐ भोला तू जींस पहिन लs, बदलs आपन  वेश

अपना लड़िकवन के नाम लिखा दs
डाक्टर इंजीयरिंग के पढाई  करवा दs
कहेलें मनु ए भोला हमारे ई सन्देश
ऐ भोला तू जींस पहिन लs, बदलs आपन  वेश
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

उमर जैसे जैसे साठ के पार होता है आदमी इशक का और भी बीमार होता है,

 December 23, 2010     aaj bahut se ladkiya jal rahi hain, buddhe, hasya, hindi poem, ishk, kahata, karte, kon, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, nahi, shyari     2 comments   

उमर जैसे जैसे साठ के पार होता है
आदमी इशक का और भी बीमार  होता है,


निशब्द होने पे ही चीनी कम होता है,
साठ के बाद ही इशक में दम होता है.


कौन कहता है कि बुद्धे इशक नहीं करते
करते हैं तो खुले आम करते हैं.


इस उमर में इशक कि ना बीमारी हो,
धर्मेन्द्र हों चाहे एन डी तिवारी हों.


यमला पगला दीवाना के आइटम सोंग टिंकू जिया का एक  दृश्य 


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, December 22, 2010

पक्ष और विपक्ष यहाँ पे दोनों को ही लांछन है.

 December 22, 2010     BJP, congress, dushasan, India, kaliyug, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

पक्ष विपक्ष व्यस्त हैं २ जी के घोटाले में
जनता बेचारी त्रस्त है आलू प्याज के निवाले में.

नेता लोग घोटाला करते लाख के  करोड़ के
जनता रोटी खा रही है बिन सब्जी डाल के तोड़ के.

खेल के नाम पे हो गए कितने ही खिलवाड़ यहाँ
जैसे तैसे कर रहे हैं कुछ गरीब, रोटी का जुगाड़ यहाँ.

पक्ष और विपक्ष यहाँ पे दोनों को ही लांछन है.
चिर खीच रहे हैं, जनता का, दोनों ही दुशासन  हैं
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, December 18, 2010

 December 18, 2010     No comments   

<iframe src="http://www.facebook.com/plugins/likebox.php?href=http%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fmera+bharat+mahan&amp;width=292&amp;colorscheme=light&amp;connections=10&amp;stream=true&amp;header=true&amp;height=587" scrolling="no" frameborder="0" style="border:none; overflow:hidden; width:292px; height:587px;" allowTransparency="true"></iframe>
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, December 12, 2010

इतनी मेहनत के बाद भी सिर्फ नौवा नंबर - भईया जी

 December 12, 2010     bhaiya ji, corrupt, country, India, India ninth-most corrupt country, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, ninth-most     2 comments   

सरदार  अमरीक  सिंह , के पास एक नई खबर थी.  वो सुना रहे थे. भारत को नौवां सबसे ज्यादा करप्ट देश घोषित किया गया है.

मौलवी साब वही बैठे थे, पान कि पिक को बड़े सलीके से दीवाल के कोने में थूकते हुये बोले - "अमां मियां, दुनिया वालो को भी  भारत कि ताकत का अहसास है. इसलिए ही तो अंतररास्ट्रीय करप्सन दिवस, नौवें देवेम्बेर को रखा है. "

भईया जी दूध  दुह चुके थे. सबकी नजर बचा के दूध में पानी मिलाते हुये बोले- "नेताओ और अफसरों के इतनी कड़ी मेहनत और लगन के बाद भी सिर्फ नौवा नंबर मिला ?"
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है

 December 12, 2010     hindi poem, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     2 comments   

क्या करोगी जान के मेरे बारे में ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो  इतना प्यार का,  ना रूप होता है ना रंग होता है .

क्या करोगी देख के मुझको,  मेरी ऐ जाने जाँ
बस जान लो  इतना प्यार का, ना देह होता है ना आकर होता है.

क्या करोगी सुन के मुझको,  मेरी ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो  इतना प्यार का, ना बोली होती है, ना आवाज़ होती है.

कर सको महसूस, तो कर लो, मुझे ऐ जाने जाँ,
बस जान लो  इतना प्यार में, बस ख़ुशी होती , बस दर्द होता है. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

कानून के लम्बे हाथ !

 December 12, 2010     bhaiya ji, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, कानून के लम्बे हाथ     1 comment   

मौलवी साब और सरदार अमरीक सिंह , तबेले में रखे खाट बैठे हुए बतिया रहे थे. तभी भईया जी  अपनी फटफटिया पे बाहर से आये. सरदार जी ने पूछा- "कहाँ  थे यार? कब से बैठे हुये हैं हम."
भईया जी अपनी फटफटिया खड़ी करते हुये बोले -"भाई ! जरा बाजार गया था. भैसिया ने लात मार के हुक्कावा  तोड़ दिया था. नया लेने गया था. तुम बताओ का चल रहा है.बड़े खुश दिख रहे हो. कोई नया समाचार आवा है का पेपरवा में "
सरदार जी बोले-"नहीं, कोई नयी खबर नहीं है. पर नोएडा के भूमि घोटाले में कोर्ट का फैसला आया है. नीरा यादव , समेत मुख्य गुनेह्गारो को चार साल कि कैद और 50000 रुपये का जुर्माना हुआ है."

इधर भईया जी, सरदार जी कि बात सुनते  हुये ऊँचे मचान से तंबाकू कि डिबिया उतार रहे थे. हाथ नहीं पहुँचाने के बाद भी कोशिश किये जा रहे थे.
मौलवी साब न्यूज़ सुन के बोले-"बरखुरदार! भला ये क्या बात हुई? करोडो का घोटाला हुआ, और 50000 का जुर्माना, 6 साल लगे फैसला आने में और 4 साल कि सजा. समझ में नहीं आता है, कि क्या होगा इस देश का.? "

"अरे ! मौलबी साब. ये क्यों नहीं देख रहे हो कि कितने बड़े बड़े लोगो को सजा सुनाई है कोर्ट ने . ये भी अपने आप में एक मिशाल  है , कि अपराधी कोई भी हो कानून से बच नहीं सकता है."- सरदार जी बात तो मौलबी साब से कर रहे थे, पर देख भईया जी को रहे थे , जो अभी ऊँचे मचान से तम्बाकू कि कि डिबिया उतरने कि कोशिश कर रहे थे. वे भईया जी से बोले -"छोड़ दीजिये भईया जी, वो आपके पहुँच  से दूर है."

भईया जी ने कोशिश करना छोड़ते हुये बोले -"काश ! मेरे भी हाथ कानून कि तरह लम्बे होते!"
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, December 9, 2010

अंतरास्ट्रीय एंटी करप्शन डे ! ९ दिसंबर !

 December 09, 2010     1 comment   

अंतरास्ट्रीय एंटी करप्शन डे ! ९ दिसंबर !
अगर कोई  मेरे से पूछे कि अंतरास्ट्रीय एंटी करप्शन डे पे आप क्या करना चाहेंगे? तो मेरा जबाब होगा कि मैं इस देश के सबसे करप्ट पार्टी को काला झंडा दिखाऊंगा.
और वो है, भारतीय जनता पार्टी !
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, December 7, 2010

भंडार तो धरती पे भी थे- भईया जी

 December 07, 2010     bhaiya ji, mangal grah pe jeevan, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, short story     2 comments   

मौलवी साहब खुश थे बहुत. भईया जी के मुह में पान का बीड़ा ठुसते हुए बोले-"भाई! मुँह मीठा करो !. "

भईया जी पान थूकते हुए बोले-"खाक मीठा करो, चुना ज्यादा डाल दिया है, जीभ काट दिया उसने."
मौलवी साब ने उनकी बात पे ध्यान दिए बगैर बोले - "अरे ! तुमको पता है कि मंगल ग्रह पे भी जीवन संभव है, वहाँ कार्बन डाई आक्साइड के भंडार का पता चला है. "

भईया जी के मुँह से अभी भी चुने कि कडवाहट नहीं गयी थी. कडवी आवाज में ही बोले - "कार्बन डाई आक्साइड के भंडार तो धरती पे भी थे!! !"
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, December 6, 2010

हमे विकिलीक्स से पहले से पता है - भईया जी

 December 06, 2010     bhaiya ji, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, wikiliks     No comments   

सरदार अमरीक सिंह पेपर पढ़ पढ़ के खबरे सुना रहे थे.
उनके नजर का चश्मा सरक के नीचे आ गया था. वे चश्मा ठीक करने के लिए रुके थे ही कि , भईया जी, जो अपनी भैस का दूध दुह रहे थे,  बोले - "अरे! भाई , खबरे सुनाना बंद मत करो. मेरी भैस दूध देना बंद कर देती हैं."

अमरीक सिंह फिर शुरू हो गए,. खबरे पड़ना और सुनाना उनका सबसे प्रिय शगल था.

अमरीक सिंह बोले - "विकिलीक्स ने नए खुलासे किये हैं  कि पाकिस्तान सबसे बड़ा खतरा है. "

पाकिस्तान का नाम सुन के भईया जी कि भैस बिगड़ गयी और लताड़ जमा दिया .भईया जी , दूध कि बाल्टी लिए लिए  ही ढेर हो गए वही पे.
उठाते हुए बोले "ये सब तो हम कई साल से चिल्ला रहे हैं, ये अब जाके जगे हैं क्या?"
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, December 4, 2010

मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!

 December 04, 2010     manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, munni badnam hui, munni badnam hui darling tere liye, sheela ki jawani     5 comments   

मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
पर,
मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं.
मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोरी है.पर कही पे मुन्नी , शीला से बीस पड़ रही हो तो कही शीला , मुन्नी से बीस पड़ रही है. पर उनके इस उन्नीस बीस के गिनती में कईयों के मजे हो गए , कई यो को सजे .

मुन्नी को अपने बारे में उतना पता नहीं कि वो क्या है, जबकि शीला को अच्छी तरह से पता है कि वो चीज़ क्या है ?

 जहाँ मुन्नी अपने प्रियतम के लिए बदनाम हो जाती है , वही शीला  अपने कई प्रियतम को चैलेंज करती है कि, मुझे पता है बच्चे तुझे क्या चाहिए , पर ये कभी नहीं मिलेगी , क्यों कि मैं शीला हूँ और ये मेरी जवानी है, यानि शीला कि जवानी .

मुन्नी है कि बता रही है कि , उसकी क्या क्या खासियत है, उसके गाल गुलाबी है, नैन शराबी  है, ये तो न्योता दे रही है मानो आओ शराबियो, पिलो इन मस्त मस्त नैनो से. चाल नबाबी है, माने कि ऊँचे चाल ढाल हैं उसके, मुन्नी ये भी बता रही है कि वो अपने प्रियतम के लिए वो झ्न्दुबाम भी हुई, झंडूबाम , जिससे लगाने से कैसा भी दरद हो मिट जाता है, मुन्नी अपने प्रियतम के दुःख दर्द को मिटाने कि कोशिश करती है और बदनाम हो जाती है.


शीला को पता है को उसकी दीवानी सारी दुनिया है. पर उसे खुद से बहुत प्यार है और खुद को ही गले लगाना चाहती है, ये तो फेकने कि हद है, खुद को गले कैसे लगाएगी. शीला को पता है कि वो बहुत ही सेक्सी है और वो किसी के हाथ नहीं लगेगी, लग गयी तो वो भी बदनाम नहीं हो जाएगी मुन्नी कि तरह.


मुन्नी थोड़ी मोटी भी है , और आउट डेटेड भी है, शिल्पा जैसी फिगर है. अदा भी ऐसी है , कि लोग बेहोश हो जाये . मोटी कि अदा देख के कौन  भला होश में रहेगा.
 पर बेवकूफ के पास पैसा हो तो भला समझदार बिना खाए मरेगा क्या?  मोटी मुन्नी के उन्ही अदाओ पे लाखो रुपये उडाये गए. कि मुन्नी मालामॉल हो गयी अपने प्रियतम  के लिए.

शीला , शहर के सडको पे जब निकली है तो लड़के पीछे हो लेते हैं. शीला को अच्छा लगता है जो लोग उसके बारे में बतियाते हैं, पर उसे लोगो के ये सारे पैतरे  पता है, काफी एक्सपेरीएन्स है  ना उसे..
 पर लोगो के नैन जो हैं ऐसे नज़ारे देखने के लिए तो तरसते रहते हिं. देखते रोज़ हैं, कहते हिं सौ बरस से नहीं देखा कुछ, अब तो कुछ दिखा दे, थोड़ी बारिस करा दे ताकि सुखे दिल में कुछ हरियाली आये.
पर शीला है को सब पता है कि बच्चे को क्या चाहिए. पर ये कभी नहीं मिलेगी , क्यों कि मैं शीला हूँ और ये मेरी जवानी है, यानि शीला कि जवानी .

छोटे छोटे गाँव , उनकी छोटी छोटी गलियां, और हर गली में मुन्नी के ही चर्चे हैं, और इतनी पब्लिसिटी है मुन्नी के कि पेपर में भी आगया कि मुन्नी बदनाम हो गयी. पर गरीब मुन्नी को इससे कोई फरक नहीं पडता है, उसे अपने खर्चे चलने के लिए पैसे चाहिए. और उसका प्रियतम एकदम फुद्दू अनाड़ी है , पैसा वैसा देता नहीं , इतनी महंगाईदायाँ इतनी कामिनी है कि गरीब आदमी का जीना मुहल कर रखा है.
पर मुन्नी के भी चाहने वालो कि कमी नहीं है. एक लम्बू ही है, जो पोपट , माने कि कट्टा , लेके मुन्नी के पीछे पड़ा है.
अब लम्बू के पास पोपट है तो बाकि के लिए चौपट है, मुन्नी.

शीला कि मांगे ज्यादा  नहीं है , पैसा गाडी  और बड़ा घर चाहिए उसे बस और जो करेगा पूरी ये सब मांगे उसी आदमी का इंतज़ार है शीला को. खाली जेब वाले फटीचर को तो शीला पसंद भी नहीं करती है. पर एक को धुन्धो हज़ार मिलाते हैं, शीला के नखरे उठाने वाले. पर उनकी भी शर्त है, तू यहाँ से चाल , मेरे घर चल . तेरे कदमो पे स्वर्ग ला दूंगा. तेरे सारे  खाब पूरा कर दूंगा, मैं तुझे इतना चाहता हूँ कि कोई खाब अधुरा नहीं रहेगा.तुमहरा .
पर शीला कहा मानाने वाली है, उसके पास बियरर चेक है उसे अकाउंट पेयी क्यों बनाये. तब्बी तो इतराती फिरती रहती है, सबसे कहती है.. माई नेम इज शीला, शीला कि जवानी. शीला को पता है कि वो बहुत ही सेक्सी है और वो किसी के हाथ नहीं लगाने देगी , लगाने दिया तो वो भी बदनाम  हो जाएगी मुन्नी कि तरह.

पर शीला कि जवानी के चाहे जितने भी चर्चे हों. पूरी बोतल का नशा तो मुन्नी में ही है, जो हर किसी के दिल में अरमान जगा सकते हैं. अनपढ़ मुन्नी के मुंह पे फटाफट गली रहती है, और देखती भी ऐसे है मानो कि नैनों से गोली चला रही हो.  वो अपने प्रियतम के लिए आइटम बम्ब हुई, वो अपने प्रियतम  के लिए बदनाम हुई.

शीला कि जवानी के चर्चे चाहे जितने भी हों , बदनामी लेने का जोखिम मुन्नी ही उठा सकती है,

शीला कि जवानी और मुन्नी के बदनामी के बिच में फरक है तो बस इतना कि मुन्नी ने अपनी बदनामी स्वीकार किया. वरना बंद दरवाजे में शीला और उसकी जवानी  ने क्या क्या किया होगा, किसे पता.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

खानसामा

 December 04, 2010     manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     3 comments   

बड़े रईस थे वे. पुराने ज़माने से उनकी घर की रईसियत चली आ रही थी. दादा परदादा सभी रईस थे.

रईसियत में काफी शौख थे , जिनको पुरे करते आये वो. ज़माने के साथ कई चीज़े बदलीं , चाल ढाल, पहनावा ओढावा, खान पान,
मालिक बदले, नौकर बदले. पर नहीं बदला तो रईसियत और उनका एक खानसामा.

पुराने खानसामा का काम कुछ जायदा नहीं था, बस मालिक की पसंद का खाना बनाना और फाकें मारना.
हवेली में आये दिन नए मुलजिम आते और जाते रहते थे.
एक नए मुलाजिम ने पुराने खानसामा से पूछा - "मैंने पिछले कुछ दिन में देखा की कई लोग नौकरी पे आये और छोड़ के चाले गए. आप में ऐसी क्या खास बात है की तीन पीढियों  से इस घर में टिके हुए हो. "

पुराना खानसामा मुस्कराया , मानो नए मुलाजिम ने बच्चो जैसी बात कर दी हो. अपनी मुस्कराहट दबा के वो बोला - "बेटे! जो मालिक होता है , वो शक्ति का प्रतीक होता है, और उसकी जी हुजूरी करनी पड़ती है. मैंने अपने वर्तमान मालिक के दादा की जी हुजुरु की , इनके पिता की की, इनकी कर रहा हूँ , आगे भी करता रहूँगा. "
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, November 23, 2010

चैन से सो पाओगे ?

 November 23, 2010     hindi poem, jokes, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sms     1 comment   

आँखों  में  बसा  के  मेरा  चेहरा ,
क्या  तुम  मेरे  में  खो  पाओगे ...
हमे  यु  जगा  के  ज़ालिम , 
क्या  तुम  चैन  से  सो  पाओगे ?








ankho me basa ke mera chehara,
kya tum mere me kho paoge...
hume yu jaga ke zalim, 
kya tum chain se so paoge?






.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

शुरुआत हमसे होगी ..

 November 23, 2010     hindi poem, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, non-veg, sms     No comments   

यादो  कि  शुरुवात  हमसे  होगी ,
वादों  कि  शुरुआत  हमसे  होग i.
लगा  देंगे  आग  ऐसी  आपके  दिल  में 
कि  जज्बातों  कि  शुरुआत  हमसे  होगी ..






yado ki shuruwat humse hogi,
wado ki shuruaat humse hogi.
laga denge aag aisi aapke dil me
ki jajbato ki shuruaat humse hogi..
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

आपसे बाते सारी रात होती |

 November 23, 2010     hindi poem, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sms     No comments   

आपके  प्यार  का  इंतज़ार  हर  पल  रहता  है . 
हर  पल  मेरा  दिल  ये  कहता  है .
आप  आते  खाबो  में  तो  क्या  बात  होती  ,
आपसे  बाते  सारी  रात  होती |.




aapke pyar ka intezar har pal rahata hai.
har pal mera dil ye kahata hai.
aap aate khabo me to kya baat hoti ,
aapse baate sari raat hoti.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, October 24, 2010

जय हो बबासीर वाले बाबा कि !!!!

 October 24, 2010     manoranjan shriavstav, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

मन्ना भाई एम बी बी एस होके युएस गया,
बबासीर वाले बाबा को बबासीर हुआ.
 
मुन्नी बदनाम होके ऐसे भगी,
बबासीर वाले बाबा को मिर्ची लगी.

कॉम्मन वेल्थ गेम में सबको रेवड़ी बटी ,
बबासीर वाले बाबा कि वैसे  फटी.

यूपी कि सीएम  मायावती हुईं,
बबासीर वाले बाबा करें पुईं पुईं.

कश्मीर में गोली चले ठाएँ ठाएँ
बबासीर वाले बाबा करें काएं काएं.

माओवादी बोम्ब फोड़े भड़ाक भड़ाक,
बबासीर वाले बाबा पादें पडाक पडाक.

चोट लगी बाबा ने आउच किया.
कारण जौहर ने बाबा का कास्टिंग  काउच किया .

जय हो बबासीर वाले  बाबा कि !!!!
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, October 23, 2010

मुझ गरीब का एक दुश्मन आ गया !

 October 23, 2010     manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, short story, मुझ गरीब का एक दुश्मन आ गया     No comments   

<a href="http://blogs.raftaar.in/" title="रफ़्तार"><img src="http://www.raftaar.com/blogs/images/raftaar_blog_logo.jpg" border="0" alt="रफ़्तार" title="रफ़्तार"/></a>
                                   


वो अपाहिज था एक पैर से. बैशाखी के सहारे चला करता था. अक्सर हनुमान मंदिर के पास बड़ी ही दयनीय मुद्रा में खड़ा रहा था. मंदिर आने जाने वाले श्रद्धालु  उसे बेचारे को कुछ ना कुछ दे दिया करते थे. यही उसके जीवकोपार्जन का साधन था.

मंदिर में रोज़ आने वाले उसे पहचानने लगे थे, वो भी सभी को पहचानने लगा था. जब कोई उसे कुछ देना भूल जाता वो बड़े अधिकार से लोगो से मांग लिया करता था. लोग उसे ये कहते हुए दे जाते- बाबा , माफ़ करना भूल गया था. ध्यान कही और था.


एक दिन एक भक्त ने उसे शानि मंदिर  कि सीढियों पे उसके अपने चिरपरिचित मुद्रा में खड़े देखा. उन्होंने उससे पूछा -"क्या हुआ बाबा? उधर से इधर कैसे आ गए?"

वो  बोला -"क्या करू? वहाँ  मुझ गरीब का  एक दुश्मन आ गया था, तो इधर आना पड़ा. "
भक्त ने पूछा _"आपका कोण दुश्मन होगा भला?"
वो बोला-"एक अँधा आ गया था, वो जब से मंदिर कि सीढियों पे फूल बेचने लगा था, तब से लोगो ने मुझे देना बंद कर दिया. "

 ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
समर्पित है, उस जुझारू इंसान को , जो आंखे नहीं होने के बाद भी, सिवान और छपरा [बिहार] के बिच के लोकल ट्रेन में मूंगफली बेच के खुद्दारी का जीवनयापन करता है.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, October 22, 2010

आज बहुत सी लड़कियां जल रही हैं.

 October 22, 2010     aaj bahut se ladkiya jal rahi hain, dahej, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav     No comments   

तुमसे मैं  कुछ कहना चाहता हूँ,
पर डरता हूँ  बताने से,
मैं बहुत कुछ कर सकता हु,
पर डरता हूँ ज़माने से.
                             
                                  क्या पता कही तुम्हारा भाई पहलवान  हो?
                                  पीछे पड़ जाये मेरी जान को ,
                                  वो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगे
                                 और मैं,  पुकारने लगु  भगवान को.

तुम्हारा बाप कुछ नहीं कहता है,
हर वक़्त मुझे घूरता रहता है,
मैं कौन हूँ , क्या करता हूँ?
हर किसी से पूछता रहता है.

                                        तुम्हारी माँ बहुत अच्छी लगती है ,
                                        कुछ नहीं कहती है वो,
                                       काश ! वो तुम्हारी माँ नहीं होती,
                                       और मैं भी उनके उम्र का होता,

शादी तो मैं तुमसे ही करूँगा ,
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए,
टीवी कार  फ्रीज तो सभी  देते हैं,
इसके अलावा २ -४ लाख नगद चाहिए.

                                      कम दहेज़ में मेरी शादी हो गयी
                                      ये बात मुझे खल रही है,
                                       दहेज़ ही वो कारण है जिससे,
                                      आज बहुत सी लड़कियां  जल रही हैं.


करो कुछ ऐसा कि दहेज़ का धंधा बंद हो,
गरीब लडकियों के भी  जीवन में ख़ुशी हो, आनंद  हो.                                
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, October 21, 2010

तू ही मेरी माशूका

 October 21, 2010     hindi poem, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, तू ही मेरी माशूका     3 comments   

जागती और सोती आँखों का फरक ही मिट जाता है , जब दोनों सूरत में तेरी सूरत दिखाई देती है.
आदि और अंत क्या , जब हर बात तेरे से शुरू होके तेरे पे ही  ख़तम होती है.
क्या चिंता करें जीवन कि दुस्वारियो  कि, मेरा भुत औ भविष्य भी तू है.
भूल गया मैं,  इबादत खुदा कि , याद है, बस, अब तेरी ही इबादत ,

 सांस लेना भूल जाऊ मैं एकबारगी, भूलू कैसे मैं तुझे?
तुझसे ही है मेरी जिंदगी , एक एक पल मैं जीयु तुझे!
हर कदम जो उठती है तेरी ओर , तुझे पाने के लिए, 
तुझे पाना आसन है, बस भागीरथी प्रयाश करना है.
मेरा लक्ष्य.
तू ही मेरी माशूका , तू ही महत्वाकांक्षा ! 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, October 19, 2010

n i kisss you !!

 October 19, 2010     hindi poem, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

i come to you,
hug you tightly,
wrap my hand around you ,
a bunch of hair flying on your face,
i remove that from you face,
n i see your sstraberry juicy lips,
n i kisss you tightly
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

दहले पे नहला !!

 October 19, 2010     dahale pe nahala, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, short story, दहले पे नहला     1 comment   

वो उस दिन बहुत जल्दी में था . तेजी से चला जा रहा था. पर देखने वाले उसे देख के समझ रहे थे की वो दौड़ रहा है. पर उसे तो अपने लक्ष्य पर पहुचने का ध्यान था, लोग क्या देख रहे हैं, सोच रहें हैं, इसपे ध्यान देने की जरुरत भी नहीं थी उसे. 

पाँव जितने तेज चल रहे थे, उससे तेज तेज चल रही थी उसकी सोच. 


सोच, सबसे तेज चलती है. पल में चाँद पे , पल में धरती पे फैली चांदनी पे .


सोच रहा था, आज देर न हो जाये ऑफिस पहुचने में. भागा जा रहा था. कल रात ने समय पे सो गया रहता तो आज देर से नींद ना खुलती. और अभी भागना ना पडता.  ऑफिस भी पास नहीं है, मेट्रो ट्रेन के बाद बस भी पकड़ना होगा . भला हो मेट्रो का को इसमें ट्राफिक जाम नहीं होता है.

मेट्रो स्टेशन पहुँच के ही साँस ली हो मानो उसने, एक लम्बी साँस. मेट्रो रेल में चड़ने के बाद ली थी उसने दूसरी साँस. उसने लम्बी साँस ली है ये उसे तब पता लगा जब सामने वाले ने टोका - "भाई ! आराम से साँस ले लो."

सोचा की बोलूं,  "सॉरी". पर बोला नहीं की . कही फिर लम्बी साँस ना छुट जाये.
नियत स्टेशन से बाहर निकल के बस स्टैंड के तरफ भागा.बसें कड़ी थी कतार में . सारे बस वाले चिल्ला ये पहले जाएगी, ये पहले जाएगी.


एक खाली वाले ने उसे टोका  - भाई साब ये बस पहले जाएगी .
उसने खाली बस देख के कहा - नहीं भाई मुझे आज देर से जाना. 
बस वाले ने सुर बदला - अरे ! भाई तो बैठो ना , खाली बस है भर के जाएगी देर तो होगा ही. 
उसने भी नहले पे दहला मारा - नहीं ! भाई मुझे आज जल्दी जाना है देर हो रही है.
उसने हड़बड़ी में गड़बड़ी होने से बचा लिया था. 





 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, September 27, 2010

और नदी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा |

 September 27, 2010     hindi poem, manoranjan shriavstav, manu srijan     2 comments   

लहरे नदी की, उठती हैं,
गिरती हैं, तट से टकराती है,
और लौट जाती हैं,
अनंत बार चलता है ये क्रम,
निर्विघ्न |

कोमल जल के प्रचंड प्रहार से,
टूटता है सीना तट का,
शनै: शनै:,
नदी चौड़ी होती जाती है,
अपना आकर बढाती है |

कोमल जल के प्रचंड प्रहार से
नहीं टूटता सीना तट का ,
वरन टूटता है उस एकता के
बल से जो लहरों में समाई होती है|

गर ख़त्म हो जाये ये एकता ,
तो लहरों की परिणति बूंदों ने हो जाएगी,
और नदी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा |
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, September 24, 2010

जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||

 September 24, 2010     manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     3 comments   

बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला,
बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला,

लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें,
रहें मुबारक पीनेवाले, खुली रही यह मधुशाला ||२०||

हरा भरा रहता मदिरालय, जग पर पड़ जाये पाला,
वहां मुहर्रम का तम छाये, यहाँ होलिका की ज्वाला;
स्वर्गलोक से सीधी उतारी वसुधा पर, दुःख क्या जाने;
पढ़े मर्सिया दुनिया सारी; ईद मानती मधुशाला.||25||

एक बरस में एक बार ही, जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगाती बाज़ी, जलती दीपों की माला ;
दुनिया वालो, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात देवाली, रोज़ मनाती मधुशाला||26||

दुत्कारा मस्जिद ने मुझको कह कर पिने वाला,
ठुकराया ठाकुरद्वारे ने देख हथेली पर प्याला,
कहा ठिकाना मिलाता जग में भला अभागे काफ़िर को?
शरणस्थल बनकर न मुझे यदि अपना लेती मधुशाला ||46||

सजे न मस्जिद और नमाजी, कहता है अल्लाताला ,
सजधजकर, पर साकी आता , बन थान कर , पीनेवाला,
शेख कहा तुलना हो सकती है मस्जिद की मदिरालय से,
चिर-विधवा है तेरी मस्जिद सदा सुहागिन है मधुशाला||48||

मुस्लमान औ  हिन्दू हैं दो, एक, मगर, उनका प्याला,
एक मगर, उनका मदिरालय , एक, मगर, उनकी हाला;
बैर बढ़ाते मंदिर मस्जिद, मेल कराती मधुशाला ||50||

कोई भी हो शेख नमाजी या पंडित जपता माला,
बैर भाव चाहे जितना हो, मदिरा से रखने वाला,
एक बार बस मधुशाला के आगे से होकर निकले,
देखूँ कैसे थाम न लेती दमन उसका मधुशाला ||51||



आज करे परहेज जगत, पर कल पीनी होगी हाला,
आज करे इंकार जगत पर, कल पीना होगा प्याला;
होने दो पैदा मद का महमूद जगत में कोई, फिर
जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||




--- साभार मधुशाला 
हरिवंश राय बच्चन
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

चुनाव लड़ा व् दुर्गा माई के

 September 24, 2010     No comments   

       


मेरे भजन पे आधारित, देखे जरुर. !!!!
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

फितरत है .......!

 September 24, 2010     hindi poem, manoranjan shriavstav, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

फितरत है हमारी, की हम दुश्मनों को भी दोस्ती का हाथ बढ़ाते है,
फितरत है  उनकी वो हाथ भी मिलाते  हैं   मानो   ट्रिगर दबाते हैं |
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, September 19, 2010

महिमा कुर्सी की

 September 19, 2010     hindi poem, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan     8 comments   

पत्रकार ने पूछा नेता से एक बात बताओ भाई,
कुर्सी के लिए आपस में आप क्यों करते हो लड़ाई.

नेता जी बोले सीक्रेट वाली बात नहीं बताई जाती है
होती है लड़ाई जो कुर्सी के लिए वही राजनीती कहलाती है.

कुर्सी हमारी भगवान है , कुर्सी में बसे हमारे प्राण हैं
कुर्सी    के    लिए    हम    लेते देते      जान       हैं


 जीते हैं कुर्सी के लिए , मरते हैं कुर्सी के लिए
हर जलालत मलालत हम सहते हैं कुर्सी के लिए

हे  कुर्सी देव आपकी महिमा अपरम्पार है
सरे नेताओ को कुर्सी से ही प्यार है
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, September 2, 2010

late jaungi?

 September 02, 2010     jokes, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu srijan, sms     No comments   

ladki office me late aayi to boss ne khoob danta.
ladaki - sir, main late aayi hu to late jaungi!
boss - ok, pahle mere sath
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

kiss kar lu?

 September 02, 2010     jokes, kiss kar lu? sms, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu srijan, non-veg     No comments   

ladka - main tumko kiss kar lu?

ladki - haa ! per aaj puchh kyu rahe ho?

ladka - wo tumhari sandale aaj dekhane me nayi lag rahi hai na.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

laal machchhar.

 September 02, 2010     jokes, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu srijan, sms     No comments   

ek machhar uper se niche laal ho gaya tha. ghar aaya to ukso misses ne puchha khoon pine gaye the ya usame nahane.
machchaar bola - do ladkiya kiss kar rahi thi, main unke otho ke bich dab gaya tha.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Newer Posts Home

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ►  2012 (57)
    • ►  December (3)
    • ►  November (4)
    • ►  October (3)
    • ►  September (3)
    • ►  August (7)
    • ►  July (11)
    • ►  June (6)
    • ►  May (8)
    • ►  April (4)
    • ►  March (1)
    • ►  February (6)
    • ►  January (1)
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ▼  2010 (33)
    • ▼  December (16)
      • नए साल में..................
      • हर दिल में एक दर्द होता है
      • सुरज कि किरणें हैं निकली, आया है प्रभात नया
      • मेरी क्रिसमस तेरी क्रिसमस, क्रिसमस आया रे.
      • ऐ भोला तू जींस पहिन लs, बदलs आपन वेश
      • उमर जैसे जैसे साठ के पार होता है आदमी इशक का और भी...
      • पक्ष और विपक्ष यहाँ पे दोनों को ही लांछन है.
      • <iframe src="http://www.facebook.com/plugins/likeb...
      • इतनी मेहनत के बाद भी सिर्फ नौवा नंबर - भईया जी
      • प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है
      • कानून के लम्बे हाथ !
      • अंतरास्ट्रीय एंटी करप्शन डे ! ९ दिसंबर !
      • भंडार तो धरती पे भी थे- भईया जी
      • हमे विकिलीक्स से पहले से पता है - भईया जी
      • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि ...
      • खानसामा
    • ►  November (3)
      • चैन से सो पाओगे ?
      • शुरुआत हमसे होगी ..
      • आपसे बाते सारी रात होती |
    • ►  October (6)
      • जय हो बबासीर वाले बाबा कि !!!!
      • मुझ गरीब का एक दुश्मन आ गया !
      • आज बहुत सी लड़कियां जल रही हैं.
      • तू ही मेरी माशूका
      • n i kisss you !!
      • दहले पे नहला !!
    • ►  September (8)
      • और नदी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा |
      • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
      • चुनाव लड़ा व् दुर्गा माई के
      • फितरत है .......!
      • महिमा कुर्सी की
      • late jaungi?
      • kiss kar lu?
      • laal machchhar.

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com