ये भी ठीक ही है

  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • Business
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • Downloads
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • Parent Category
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • Featured
  • Health
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Wednesday, December 5, 2012

भारतीय राजनीति

 December 05, 2012     manu shrivastav, turkash.blogspot.in, अरविंद केजरीवाल, नरेंद्र मोदी. turkash, भारतीय राजनीती     No comments   

भारतीय राजनीति को समझना बहुत हि टेढ़ी खीर है।
'आप' के नेता अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी पर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खुलासा किया है। उनने कहा- मोदी ने कांग्रेस की एक सांसद के पति की कंपनी को भी दस हजार करोड़ रुपये मूल्य वाला गैस का कुआं मुफ्त में दिया है। केजरीवाल ने बताया कि संबंधित कागजात उन्हें निलंबित आइपीएस संजीव भट्ट ने दिए हैं। भट्ट की पत्नी मोदी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर लड़ रही हैं।
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, December 4, 2012

मैं पाप बेचती हूँ.

 December 04, 2012     manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, tambaku, turkash, turkash.blogspot.in, मैं पाप बेचती हूँ     No comments   

एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी। कालिदास जी ने उस महिला से पूछा : क्या बेच रही हो ?महिला से पूछा : क्या बेच रही हो ?
महिला ने जवाब दिया : महाराज ! मैं पाप बेचती हूँ. कालिदास ने आश्चर्यचकित होकर पूछा : पा
प और मटके में ? महिला बोली : हाँ महाराज मटके में पाप है। कालिदास : कौन-सा पाप है ?

महिला : आठ पाप इस मटके में है | मैं चिल्लाकर कहती हूँकी मैं पाप बेचती हूँ पाप …और लोग पैसे देकर पाप ले जाते है अब महाकवि कालिदास को और आश्चर्य हुआ : पैसे देकर लोग पाप ले जाते है ? महिला : हाँ महाराज ! पैसे से खरीदकर लोग पाप ले जाते है

कालिदास : इस मटके में आठ पाप कौन-कौन से है ?
महिला : क्रोध, बुद्धिनाश, यश का नाश, स्त्री एवं बच्चों के साथ अत्याचार और अन्याय, चोरी, असत्य आदिदुराचार, पुण्य का नाश, और स्वास्थ्य का नाश … 
ऐसे आठ प्रकार के पाप इस घड़े में है कालिदास को कौतुहल हुआ की यह तो बड़ी विचित्र बात है किसी भी शास्त्र में नहीं आया है की मटके में आठ प्रकार के पाप होते है|

वे बोले : आखिरकार इसमें क्या है ?
महिला : महाराज ! इसमें शराब है शराब|

कालिदास महिला की कुशलता पर प्रसन्न होकर बोले : तुझे धन्यवाद है ! शराब मेंआठ प्रकार के पाप है यह तू जानती है और "मैं पाप बेचतीहूँ" ऐसा कहकर बेचती है फिर भी लोग खरीद कर ले जातेहै, धिक्कार है ऐसे लोगों पर...

(( वर्तमान मेँ गुटखे तम्बाकू सिगरेट आदि पर चेतावनी लिखी रहती है कि इनसे कैँसर हो सकता है फिर भी लोग दुगने पैसे देकर ब्लैक मेँ खरीदते है.....))
----------------------------------------------------
साभार - Unknown वाया FACEBOOK  
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, December 2, 2012

दिल ज़रा उदास है

 December 02, 2012     dil jara udas hai, hindi kavita., hindi poem, kavita, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, दिल ज़रा उदास है     1 comment   


कुछ दर्द हैं सीने में जिसे छुपा नहीं सकते,
कुछ दर्द है की उनको अक्षरशः बता नहीं सकते।
ना ये मोहब्बत का गम है, ना ये जुदाई का गम है,
ना ये किसी की रुसवाई का गम।
दिल ज़रा उदास है,
कई कारण होते हैं उदासी के,
बस सम्हल रहे हैं खुद हीं,
एक हीं कारण बहुत है बर्बादी के .

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, November 21, 2012

चंचल बाबा के नुस्खे - आखरी भाग।

 November 21, 2012     chanchal baba ke nuskhe, hasya, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, व्यंग, हास्य     1 comment   


चंचल बाबा के नुस्खे -1 में आपने चंचल बाबा के नुस्खे पढ़े। यहाँ कुछ और नुस्खे हैं, जिनको लोगो ने प्रयोग किया था। 

सेठ जी के बैठते हिं चंचल बाबा के चेले ने हांक लगे। - तो इसी बात पर बोलो चंचल बाबा की जय।

बाबा ने उसे शांत कराया और और बोले - अब कोई दूसरा भक्त अपनी कथा सुनाये।

एक दूसरा भक्त अपनी धोती में लगी मिटटी झाड़ते हुए उठा और बोलना शुरू किया - चंचल बाबा को कोटि कोटि प्रणाम। बाबा जब भी मैं बाजार जाता तो सौ रुपया लेकर जाता था और पुरे सौ रुपये का पेट्रोल मोटर सायकल में भरवा लेता था। मैं रोज़ इतनी महँगी पेट्रोल भरा भरा के थक गया था। फिर मैं परेशां होकर चंचल बाबा के शरण में आया। बाबा ने बताया जिस तरह दूध में पानी मिला कर उसे दुगुना कर देते हैं। वैसे हि पेट्रोल के साथ भी करो, तुम्हारा खर्चा आधा हो जायेगा। मैंने ऐसा हीं किया और देखिये मेरा खर्चा आधा होने के बजाय पूरा हीं कम हों गया है। कारण पानी मिलाये पेट्रोल से मोटर सायकल तो चलती हीं नहीं। सारे दिन घर में पड़ी रहती है। और अब मेरे पुरे सौ रुपये बचने लगे हैं। चंचल बाबा आप महान हो। बाबा की जय।

आदमी अपनी बात पूरी कर के बैठ गया। उसके बैठते हीं बाबा का चेला चिल्लाया - तो इसी बात पर बोलो चंचल बाबा की जय।

बाबा ध्यान लगाये बैठे थे। उसी मुद्रा में बोले - नेक्स्ट।

अब वो भक्त उठ खड़ा हुआ जिसने पहले बताया था की, उसकी शादी नहीं हुई है।
बोला - चंचल बाबा आप महान हैं। मैं अपने प्रेमिका से पीछा छुड़ाना चाहता था। और इसी का उपाय जानने के लिए जब मैं आपकी शरण में आया तो आपने बताया की अपनी प्रेमिका को रोज एक प्रेम पत्र लिखा करो। पहले तो मैं चकरा गया की जिस प्रेमिका से मैं पीछा छुड़ाना चाहता हूँ, बाबा उसे रोज प्रेम पत्र लिखने के लिए क्यों बता रहे हैं। लेकिन फिर भी मैं उसे रोज एक प्रेम पत्र लिखना शुरू किया। और एक महीने में हीं मुझे मेरी प्रेमिका से मुक्ति मिल गयी। उसकी शादी उसी डाकिये से हो गयी थी, जो उसे मेरा पत्र रोज़ ले जाकर दिया करता था। बाबा आप महान हो, आपकी महिमा अपरम्पार है।

तभी एक आदमी उठ कर चिल्लाने लगा। चंचल बाबा, फ्रोड हैं, चंचल बाबा मुर्दा बाद।

किसी को कुछ समझ नहीं आया की माजरा क्या है, वहां बैठी पब्लिक उठी और उस आदमी की कुटाई करने लगी। भरपूर कुटाई होने के बाद उस आदमी से पूछा गया की तुह कौन हो? और बाबा जी को मुर्दाबाद क्यों बोल रहे हो?

आदमी बोला - चंचल बाबा के कारण हीं मेरा जीना नरक हो गया है। मैं वही डाकिया हूँ, जो रोज चिट्ठी लेकर जाया करता था
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, November 14, 2012

सन ऑफ़ सरदार.

 November 14, 2012     hasya, jokes, manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, son of sardar, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, व्यंग, हास्य     No comments   


दिवाली पर एक फिल्म रिलीज हुई है.
सन ऑफ़ सरदार.
सोंच रहा हूँ देखने के लिए.
मेरे ऑफिस में एक सरदार जी हैं.
उन्होंने वादा किया है की 
कल वो ऑफिस में 
अपने बेटे को लेकर जरुर आयेंगे 

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, November 10, 2012

देंगे दुआएं, उसे मुफ्त की

 November 10, 2012     manoranjan, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, व्यंग, हास्य     4 comments   

भूख लग गयी हैं
अतंडिया कुलकुला रहीं हैं,
पास वाली चिकन 
मोमोज की दुकान 
हमको बुला रहीं हैं.
मारा है महंगाई ने,
जेबों पे ऐसे डाका
हम गरीब तीन शाम से, 
हर शाम को,  
बिन पिज्जा कर रहे हैं फांका.
चाहिए एक पथ प्रदर्शक
जो खुदा से हमे मिला दे,
देंगे दुआएं,  उसे मुफ्त की अपनी,
जो हमे मोमोज खिला दे,
बियर पीले दे 

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, November 7, 2012

जन्म दिवस की बधाई !

 November 07, 2012     manu shrivastav, tarkash, tarkash.blogspot.in, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, October 27, 2012

चंचल बाबा के नुस्खे -1

 October 27, 2012     hasya, manoranjan shriavstav, manu, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, चंचल बाबा के नुस्खे, व्यंग, हास्य     1 comment   

चंचल बाबा शहर में आये थे. उनके आगमन से शहर का वातावरण काफी बाबामय हो गया था. शाम में चंचल बाबा अपना प्रवचन शुरू करने वाले थे. चंचल दरबार में काफी लोग जमा हो चुके थे. नियत समय पर बाबा का प्रवचन शुरू हुआ. बाबा देश में बदती हुई गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा से बहुत परेशान और व्यथित थे. और वे इसे जड़ से ख़त्म कर देना चाहते थे.

चंचल बाबा बोलना शुरू किये - गरीबी, भुखमरी और अशिक्षा के लिए सिर्फ बढती हुई जनसँख्या जिम्मेदार हैं. हमे जनसँख्या पे कंट्रोल करना चाहिए. और जनसँख्या पे कंट्रोल करने का सबसे उत्तम तरीका है ब्रह्मचर्य का पालन. यानी शादी हीं नहीं की जाये. और इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए. है कोई हमारे इस सत्संग में युवा मौजूद जो शादी नहीं करने की प्रतिज्ञा कर सके. 

एक भक्त उठ के बोला - बाबा मेरी तो शादी हो गयी हैं. पिछले महीने हीं हुई हैं. बाबा ने उसे डांट के बैठा दिया.

दूसरा भक्त उठ के बोला - मेरे तो चार चार बच्चे हैं.

तीसरा उठा और शरमाते हुए बोला - बाबा, मेरे तो सात बच्चे हैं.

बाबा गुस्से में अपना सर पिट लिए. तभी इक भक्त उठ कर बोला बाबा, मेरी शादी नही हूई है, मैं प्रतिज्ञा करता हूँ की शादी नहीं करूँगा और जनसँख्या नहीं बढ़ाऊंगा. 

बाबा जी चौथे भक्त की बात सुन के खुश हो गये, बोले - चलो कोई तो है इस चंचल दरबार में जो शादी शुदा नहीं है, अन्यथा मेरी भी शादी हुए तीस साल हो गये हैं.

बाबा उस चौथे आदमी से बोले - अच्छा पुत्र बताओ, तुम शादी तो नहीं करोगे न?

आदमी बोला - बाबा, मैं सिर्फ एक बार शादी करूँगा.....फिर कभी नहीं करूँगा.

बाबा- उत्तम.. अति उत्तम.....पुत्र अब बैठ जाओ. खड़े मत रहो. 

इतना कह कर चंचल बाबा ध्यान मग्न हो गये. और उनका चेला खड़ा होकर बोलने लगा - हाँ तो भक्तो. आप लोग अपने अपने अनुभव बताइए को चंचल बाबा के बताये हुए नुस्खों से प्राप्त हूया है.

एक मोटा सेठ उठ कर बोला - बाबा के चरणों में कोटि कोटि नमन. मैं इस शहर का धन्ना सेठ हूँ. मुझे सोने की बीमारी थी. मैं रात में घोड़े बेंच के सोया करता था. एक दिन मैंने चंचल बाबा का प्रोग्राम टीवी पर देखा , जिसमे बाबा ने बताया की रात में कोई भूत वाली फिल्म देखा करो, डर के मारे नींद नहीं आएगी. मैंने ऐसा हीं किया और सचमुच मुझे डर के मारे नींद नहीं आई. लेकिन मैं इतना डर गया था की डर के मारे कमरे से बहार नहीं निकला और उस दिन भी चोर आये और चोरी कर के चले गये.

चंचल बाबा ने आँख खोली और पूछा - भक्त, क्या तुम फिल्म देखते हुए पॉपकॉर्न का सेवन कर रहे थे??
मोटा सेठ - नहीं बाबा. डर के मारे तो मेरा बुरा हाल था और घर में पॉपकॉर्न कहा से आता.. वो तो सिनेमा हॉल में मिलता है न?

चंचल बाबा- बस यहीं पर कृपा रुकी हुई हैं. अगली बार पॉपकॉर्न खाना कृपा हो जाएगी..
मोटा सेठ बाबा की जय बोलते हुए बैठ गया..


क्रमशः
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, October 22, 2012

ए मुर्गी ए मुर्गी ! - repost

 October 22, 2012     hasya, India, manu shrivastav, reservation, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, कविता, व्यंग, हास्य     No comments   

ए मुर्गी ए मुर्गी !
क्या तेरे पास है अंडा?
जी जजमान! जी जजमान! 
मेरे पास है तीन अंडा
एक अंडा एससी / एसटी के लिए 
दूसरा ओबीसी के लिए
तीसरे से होगा मेरा लाल पैदा
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, October 16, 2012

में ए ए ए ए ए ?

 October 16, 2012     hasya, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

मैंने गुस्से में कहा - अलबत्त टाइप की बकलोल हो यार...
वो बोली - हु इज दिस अल्बर्ट? 
हुंह! बिहारी होके अंग्रेजी मेम पटाने का येही सब दुष्परिणाम है 
वो ठठा के हँस पड़ी - हा हा हा हा
हमने कहा - हंसो मत नहीं तो फंसा लूँगा.
बोली - फंसा के दिखाओ..
हमने कहा - उर्रर्र आव आव आव उर्रर्र 
वो तो नहीं फंसी, मगर
बगल के खेत से दुगो बकरी पूछने लगी
में ए ए ए ए ए ? में ए ए ए ए ए ?
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, September 27, 2012

भूख

 September 27, 2012     hasya, hindi poem, kavita, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, कविता, तरकश, मनु श्रीवास्तव, व्यंग, हास्य     2 comments   

शाम हो आई थी,
काम की व्यस्तता से फुरसत पा कर
जब थोडा अव्यस्त हुआ 
तो भूख लग आई.
सोंचा कुछ माँगा लेता हूँ!
क्या मंगाऊं? कितने का मंगाऊं?
सारी जेबें टटोल डाली,
एक चवन्नी भी नहीं मिली,
निराश हो के धम्म से बैठ गया कुर्सी पर
की भूख को बर्दाश्त करना होगा,
ना याद आये भूख की ,
खुद को दुबारा कामो में मशगुल करने लगा.
की अचानक मेरी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा
जब मुझे याद आया की 
जो लंच लाया था, 
वो तो अभी टिफिन में ही रखा है,
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, September 14, 2012

एक रियलिस्टिक कविता

 September 14, 2012     hasya, kavita, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


सावन की रात में पानी बरसता है, प्रियतम को मिलाने को मन तरसता है,
जोर जोर से बिजली कड़कती है, मेरी बायीं आँख भी फड़कती है,
दूर कहीं कुत्ता भौंकता है - भौंऊ भौं भौं भौं भौंऊ
मोहल्ले वाले घर से निकल के चिल्लाते हैं, 

चोर चोर चोर पकड़ो पकड़ो पकड़ो
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, September 11, 2012

अपने बाप का, अपने दादा का, सबका बदला लेगा ठाकरे

 September 11, 2012     hasya, manu shrivastav, thakare, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, August 15, 2012

मनमोहन सिंह जी की व्यथा - व्यंग

 August 15, 2012     hasya, India, manmoham singh, manu shrivastav, pradhan mantri, turkash, turkash.blogspot.in, vyang, तरकश, मनु श्रीवास्तव, व्यंग, हास्य     2 comments   

पंद्रह अगस्त का दिन बहुत ऐतिहासिक है। आज के दिन हीं देश आज़ाद हुआ था और आज के दिन हीं हम अपने प्रधान मंत्री जी को बोलते हुए देख पाते हैं, भाषण देते हुए।
 
आज सारे देश में हर्ष और उल्लास है, लेकिन मनमोहन सिंह जी काफी व्यथित थे। उनकी व्यथा का का मुख्य करना था, लोगो के द्वारा उनपे ये आरोप लगाना की वो बोलते हीं नहीं हैं। सोंच रहे थे की आज के दिन मैं सारे देश के सामने बोलता हूँ, भाषण देता हूँ। और  बाद लोग उस भाषण पे इतना हंगामा करते हैं की मुझे पुरे साल बोलने का मौका नहीं मिल पता। और लोग अपनी गलती देखने के बावजूद मेरी हीं गलतियाँ निकलते हैं। 
मैं इन सब आक्षेपों से तंग आ गया हूँ। लोगों को   ऐसा नहीं करना चाहिए, ये गलत बात है।

खैर काफी दिनों से नहीं बोलने के कारण  बोलने की आदत छुट गयी थी और आज काफी देर तक बोलना पड़ा था। जबड़ों में हल्का हल्का दर्द महसूस कर रहा हूँ। पहले एक पेन किलर तो खा लूं। 

 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, August 10, 2012

राजनैतिक मैदान में टीम अन्ना !

 August 10, 2012     anna hazare, arvind kejariwal, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

एक चुटकुला है.
एक बस में एक आदमी अपने परिवार के साथ सफ़र कर रहा था. एक वीबी, एक किशोर उम्र का लड़का, छोटा भाई, साले साब, यानि संयुक्त परिवार.
आदमी की किसी बात पे कंडक्टर से लड़ाई हो गयी और कंडक्टर ने आदमी जी को एक लाफा लगा दिया. सारे फॅमिली वाले के सामने लाफा खा के आदमी जी को बहुत गुस्सा आया. जोश में आके चिल्लाये - "अबकी मारा तो मारा, आगे मारा तो तुझे बताऊंगा . कंडक्टर में एक बार फिर खीच दिया कान के दरमियान.  
अब क्या था? आदमी बोला - मुझे फिर मार दिया? मेरे साले साब को मार के दिखा ! कंडक्टर ने उनके साले साब को भी नाप दिया. (यहाँ पे मुझे ये समझ नहीं आया की कन्दक्टार में कैसे पहचाना की येही साले साब हैं, और सही निशाना लगाया). आदमी ने कहा - मेरे साले को मारा? अच्छा चल मेरे भाई को मार के दिखा. कंडक्टर ने उनके भाई को भी एक लगा दिया. आदमी को और गुस्सा आया, बोला मेरे भाई को भी मार दिया, अच्छा मेरी पत्नी को भी मार के दिखा तो बताता हूँ तुझे. कंडक्टर ने उनकी पत्नी को भी मार दिया (भले ही चुटकुले में ही सही कंडक्टर ने उसकी पत्नी को मारा हो, लेकिन ये काम गलत किया था उसने). 
आदमी बोला - अरे तुने तो मेरी पत्नी को भी थप्पड़ मार दिया, तू मेरे बेटे को हाथ लगा के दिखा तो तुझे बताता हूँ, कंडक्टर ने उसके बेटे को भी थप्पड़ लगा दिया, और पूछा - हां बोल क्या बताएगा?
आदमी बोला- कुछ नहीं भाई, बस रोक के  हमे यहीं उतार दो. कंडक्टर में बस रुकवाई और पुरे संयुक्त परिवार को उतार दिया.
निचे उतरने के बाद उसकी पत्नी ने पूछा - ए जी ! एक बात बताओ, तुम तो कुटाये हीं कुटाये , हम सब को काहे कुटवा दिया? आदमी बोला - वो इसलिए की अब घर जा कर कोई किसी को नहीं बताएगा की कंडक्टर में थप्पड़ चलाया था.
खैर, ये तो चुटकुला था और पुराना भी. हंसी तो नहीं हीं आई होगी. अब थोड़ी पॉइंट की बात कर लेते हैं. 
पिछले साल अन्ना जी का अनशन हुआ, तो अनशन के पहले अन्ना जी बोले - जब तक सरकार मांगे मान नहीं लेती हैं. तब तक अनशन चलेगा, अनशन के बाद बोले - सरकार नहीं मानेगी तो मैं फिर अनशन करूँगा.
अन्ना जी का अनशन इस बार उतना धारदार नहीं था, जितना पहली बार में था. पहले तो टीम के लोग अनशन पे बैठे. अन्ना जी बोले - मैं चार दिन देखूंगा, सरकार नहीं मानी तो मैं खुद अनशन पर बैठूँगा. सरकार नहीं मानी.
अन्ना जी ने अनशन शुरू कर दिया, सरकार फिर भी नहीं मानी.
अब अन्ना जी बोले हैं की हम राजनितिक पार्टी बनायेंगे, सरकार अब भी नहीं मानी है. 
दिल और सरकार में एक समानता है, दोनों मानते नहीं. 
मेरा मानना है की टीम अन्ना का राजनीती के मैदान में जाने का फैसला अचानक लिया हुआ फैसला नहीं है. गाँव में कहावत है की हमने रास्ता दिखा दिया अब खुदे चलो इस पे . राजनितिक पार्टियों ने ये रास्ता खुद ही अन्ना को दिखाया है, अब अन्ना टीम किस अंदाज़ से इस पे चलती है ये महत्वपूर्ण है. पर उनको ये कहने से परहेज करना चाहिए, ये कर दिया न, अब ये कर के दिखाओ तो देखता हूँ


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

पीएम इन वेटिंग

 August 10, 2012     arvind kejariwal, baba raamdev, India, lal krishna adwani, narendra modi, PM in waiting, prime minister of india, rahul gandhi, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

मेरे पास मोबाइल है

 August 10, 2012     manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, August 3, 2012

कुत्तों का लिंगानुपात - (A)

 August 03, 2012     hasya, kutton ka linganupat, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     4 comments   

बरसात का मौसम इंसानों के लिए हीं नहीं जानवरों के लिए भी मस्ती लेकर आता है.

मुझे याद है, जब में छोटा था, बरसात के मौसम में जब कुत्तों का झुण्ड देख के उन्हें भगाने लिए लिए पत्थर उठाया था तो एक बुजुर्ग ने डांट लगाई - क्या कर रहे हो? बरसात का मौसम है, सारे कुत्ते बौराए रहते हैं, काट लेंगे. 
खैर, तब तो समझ नहीं आया था की क्यों बौराए रहते हैं. बाद में समझ आया की यहो वो वक़्त होता है जब उनकी कामेक्षा चरम पे होती हैं. या यूँ कहें की सिर्फ बरसात में हीं वो सहवास के लिए तैयार होते हैं. यही कारण है की उनकी जनसँख्या इतनी कंट्रोल में हैं. इंसान तो आधे सेकेण्ड में ही "गेट रेडी फ़ॉर एक्शन" हो जाता है, और तडातड तडातड जनसँख्या बढाता है. 

बरसात का मौसम साल में एक बार आता है, और टेंशन की बात तो ये होती है की अगर ये चला गया तो फिर अगले साल की बरसात तक का इंतजार करना होगा. इसलिए लिए सारे कुत्ते इस फिराक में रहते हैं की उनको लाखों का सावन बेकार ना चला जाये. 

एक 'फिमेल' के पीछे दसियों लगे रहते हैं. कम्पीटीशन बहुत टफ्फ होता है. सारे कुत्तों को पता होता है की कोई एक ही "टॉप" करेगा और काम सुख का आनंद प्राप्त करेगा. तो टॉप करने के लिए सारे के सारे आपस में भौं भौं मचाये रहते हैं. 

खैर उनकी कोई गलती नहीं है. "विषय रस" को सबसे निम्न रस माना गया है, लेकिन आनंद तो इसी में आता है सभी को. 

कुत्तों को भी पता है, उनका लिंगानुपात एक के मुकाबले दस का है. जो उनके साथ बहुत नाइंसाफी हैं, समूचे जीव जगत में सिर्फ उनकी के साथ ऐसा लिंगानुपात क्यों हुआ, जाँच का प्रश्न हो सकता है.

पर उनके लिए एक संतोष की बात है. इन्सान जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या कर रहा है, कुछ ही वक़्त में इंसानों का लिंगानुपात भी एक के मुकाबाले ग्यारह होने वाला है.

फिर ये बात कुत्तों को राहत पहुंचा सकती है, की ऐसे विषम लिंगानुपात का दंश सिर्फ वे हीं नहीं झेल रहे हैं.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, August 2, 2012

दुनिया गोल है.

 August 02, 2012     manu shrivastav, rakhi, rakhi sawant, sawan, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

आज मुझे पूरा विश्वास हो गया की दुनिया गोल है.
सावन में अंत में राखी आता है.
राखी सावंत में - राखी के अंत में सावन-त आता है
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

मोहब्बत जरुर हो जाये

 August 02, 2012     hindi poem, manu shrivastav, poem, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

ना चाहो किसी को इतना की उसे गरूर हो जाये
नशा न उढेलो आँखे से इतना की सरुर हो जाये
मोहब्बत को बस मोहब्बत ही रखो 
जिसे ना हो, उसे भी मोहब्बत जरुर हो जाये 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, July 31, 2012

हम भीड़ हैं ?

 July 31, 2012     anna hazare, arvind kejariwal, bharat, bhartiya janta party, congress, corruptions, hindustan, India, janta bhid hai, jantar mantar, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     2 comments   

टीम अन्ना जिस तरह से गैर जिम्मेदाराना वक्तव्य देती आई है, वो किसी भी कोण से काबिल-ए-तारीफ नहीं है. आन्दोलन में शामिल होने वाली भारतीय जनता को टीम अन्ना द्वारा "भीड़" कहना, बहुत ही निंदनीय और अशोभनीय है. देश की जनता हर कोने से आपको अपना सहयोह और समर्थन कर रही है, और आप की नज़र में वो सिर्फ भीड़ है. लो लानत है हमें आपको समर्थन करने पर.
मुझे ऐसा लग रहा है की जनलोकपाल को लेकर होने वाला आन्दोलन, अब देश का आन्दोलन न रह कर, टीम अन्ना का आन्दोलन रह गया है. साथ हीं ये भी महसूस हो रहा है की ये अब खुद के तुस्टीकरण के लिए चलाया जा रहा है. आन्दोलन अपनी पवित्रता खोकर बयानबाज़ी और फोकसबाज़ी तक सिमित होती जा रही है. जब आप अपनी टीम के सदस्यों को एकजुट नहीं रख सकते, तो देश की जनता को एक जुट रखने का दावा किस आधार पर कर रहे हैं. 
टीम अन्ना का एक सदस्य कुछ बोल रहा है तो दूसरा कुछ और बोल रहा है. हाथ की पांचो उंगलियाँ बराबर नहीं होती हैं या पांच लोगों के विचार एक से नहीं होते हैं. इस कथन की ओट में आप छिप नहीं सकते हैं. क्यों की ना तो आप उँगलियों का जीवविज्ञान पढ़ा रहे हैं और ना हीं लोगो की सोंच का मनोविज्ञान. आप एक कानून बनाने के लिए आन्दोलन कर रहें हैं, जो आने वाले अनंत वर्षों के लिए देश की दशा और दिशा तय करेगा. तो क्या पहले आपको अपनी सोंच एक नहीं करनी चाहिए?
अगर आपको लगता है की आन्दोलन में पहुँचने वाली जनता भीड़ है तो आप गलत सोंच रहे हैं. और अगर आप मानते हैं की आपकी सोंच सही है तो आप कोई राजा रामचंद्र नहीं हैं की आपके एक आह्वान पे सारे लोग लंका में कूद जांयें. 
अहिंसा किसी को लाठी मारने या जान से मार देने को हीं नहीं कहते हैं. आपकी बात किसी को आहत करे तो, वो भी हिंसा हीं है. तो फिर किस आधार पर आप आन्दोलन को अहिंसक बता रहे हैं.
टीम अन्ना के इस वक्तव्य से जनता के आत्मसम्मान को ठेस पहुचती हैं, मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची हैं. मैं कोई भीड़ नहीं हूँ, अतः मैं इस आन्दोलन का समर्थन करना बंद करता हूँ.
टीम अन्ना को अपने वक्तव्य के लिए जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए. क्यों की टीम अन्ना के एक सदस्य के लहजे में ही बोले तो ये उनको खुद सोचना है की उनको भीड़ का साथ चाहिए या जनता का. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, July 28, 2012

हाथी उड़, चिड़िया उड़, करप्शन उड़

 July 28, 2012     corruptions, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     2 comments   

इस कहानी की पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं.

पसीने वाली खुजली जब हो जाती है तो जाने का नाम नहीं लेती है. चाहे कुछ भी लगा लो. फिर दुबारा पसीना हुआ और खुजली चालू. भ्रष्टाचार भी ठीक पसीने की खुजली की तरह ही है. जाने का नाम नही लेती.

लेकिन गोविन्द, मोहनीश, सुशांत, और सुमन ने कसम खायी थी की भ्रष्टाचार को ख़त्म कर के हीं मानेंगे. चाहे इसके लिए जो करना पड़े, आर पार की लड़ाई लड़ेंगे. चारो मिल के एक साथ भ्रष्टाचार से लोहा ले रहे थे. एक साथ काम करते करते गोविन्द कब टीम को लीड करने लगे, किसी को भी पता नहीं चला. 

लगभग साठ सालों से चली आ रही भ्रष्टाचार को मिटाने के दावे के साथ, भ्रस्ताचार से लड़ना आसान नहीं होता है. लेकिन साथ वर्षीय भ्रष्टाचार भी कोई छोटी मोती हस्ती नहीं थी की कोई चुटकी बजा के उसकी हस्ती मिटा दे.

भ्रष्टाचार को भी अपने पे गर्व था. आज़ादी के साथ साथ ही उसका जन्म हुआ था. मानो, उसके पहले भ्रष्टाचार का न कोई अस्तित्व था , न कोई नामोंनिशान. 

जैसे साठ साल के बाद नेताओं का कैरियर अपने चरम पे होता है. अच्छे अच्छे मंत्री पद मिलते हैं. ठीक वैसे ही साठ वर्षीय भ्रष्टाचार की जवानी अपने चरम पे थी.

लेकिन चारों ने हिम्मत नहीं हारी "रघुकुल रित सदा चली आई, प्राण जाये पर वचन न जाई " के उच्चारण के साथ उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आमरण अनशन की घोषणा कर दी और बैठ गए जंतर मंतर पर.

कई आन्दोलनों का गवाह बना जंतर मंतर भी ये सोच रहा था की कोई आन्दोलन "उसके" लिए भी होगा, जो उसे मरणासन्न हालत से बाहर निकालेगा. जंतर मंतर के इस मानसिक स्थिति को भ्रष्टाचार में भांप लिया. वो ठठा कर हसंते हुए बोला - भले उम्र में मेरे से तुम बड़े हो. लेकिन अभी देश की सबसे बड़ी समस्या मैं हूँ मेरे से ध्यान हटे, तब तो इन "छोटे मोटे" समस्याओं के तरफ ध्यान जाये किसी का. तुम अपने अंतिम यात्रा की तैयारी कर लो. तुम्हारे पे तो किसी का ध्यान है नहीं, तुम्हरा अस्तित्व ख़त्म होने के बाद, न जंतर मंतर होगा, न लोग यहाँ धरना करेंगे, और नहीं मेरा नाश होगा. और ना मेरा नाश होगा और न लोग बाकि के समस्याओं पे ध्यान देंगे.

जंतर मंतर और भ्रष्टाचार के इस आपसी द्वन्द से अनजान चारो लोग अनशन पे बैठे थे. और टाइम पास के लिए उन्होंने कौवा उड़ चिड़िया उड़ खेलना शुरू किया. 

गोविन्द जी टीम लीड थे, उन्होंने सबको खेलाना शुरू किया. कउवा उड़, सबने अपनी अपनी उंगली हवा में उठा दी. फिर उन्होंने कहा- मचली उड़, किसी ने अपनी उंगली नहीं उठाई. खेल आगे जारी हुआ.

गोविन्द जी बोले- कमल उड़. सबने ऊँगली उठा दी. कारण पिछले आठ साल से तो उड़ा ही हुआ है आखिर.
गोविन्द जी ने खेल आगे बढ़ाये, बोले - हाथ उड़. सबने फिर उंगली उठा थी. सोंचा होगा अगली चुनाव में उड़ जाये शायद. 

फिर गोविन्द जी ने कहा- हाथी उड़. किसी ने उंगली नहीं उठाई, सिवाय गोविन्द जी के. अब खेल के नियम के मुताबिक गोविन्द जी को अपना हाथ आगे कर के मार खानी थी. सब कहने लगे, पहले मैं मारूंगा, पहले मैं मारूंगा. 

गोविन्द जी ने आँख तरेरी - मुझे मारोगे? मैं टीम लीड हूँ टीम से बाहर कर दूंगा. सारे चुप हो गये. खेल फिर जारी हुआ.

अनशन पर साथ में बैठे कुछ और लोगों ने भी खेल में शामिल होने के लिए अपनी उंगली आके कर दी. गोविन्द जी बोले - साईकिल उड़. इस बार भी गोविन्द जी को छोड़ कर किसी और ने उंगली नहीं उठाई. 

इस पर एक खिलाडी ने आपत्ति कर दी - ये तो गलत है. या तो हाथी उड़ेगी या फिर साईकिल. आप हाथी और साईकिल एक साथ नहीं उड़ा सकते.

उस खिलाडी की बात गोविन्द जी को नागवार गुजरी, और उस खिलाडी को खेल से हटा दिया. 

अबकी बार गोविन्द जी बोले - करप्शन उड़. किसी ने उंगली नहीं उठाई.

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, July 24, 2012

खुजली और गोलगप्पा

 July 24, 2012     khujali aur golgappa, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

खुजली और गोलगप्पा में बहुत समानता है. या यूँ कहें की गोलगप्पा और खुजली में बहुत समानता है.

खुजली दो तरह की होती है. एक पसीने वाली खुजली. जिसे "कलकल" भी कहते हैं. जो भीगी भीगी सी होती हैं. गीली गीली सी . खुजाते रहो और आनंद प्राप्त करते रहो. वैसे ही गोलगप्पा, जो पानी में डुबो डुबो के खाओ और आनंद को प्राप्त करो 

दूसरी सुखी खुजली होती है. बस खुजाते रहो और आनंदित होते रहो. और गोलगप्पा का सुखा हुआ रूप, जिसे लोग पापड़ी कहते हैं.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, July 15, 2012

कौन है जिम्मेदार ?

 July 15, 2012     manu shrivastav, turkash.blogspot.in     2 comments   

Jamshedpur se prakashit

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, July 13, 2012

............ आज़ादी...........

 July 13, 2012     No comments   

           







कुछ उदासी कुछ ख़ुशी कुछ नमी हैं इन आँखों में.....  
कहीं खुशबू की लहर तोह कहीं गमी है पटाखों में.......
दीये जलते रहते हैं पास मेरे हर रोज़ हर शाम....
दम ढूँढती रहती हूँ उन चार कंधों में.......
जो मुझे आज़ाद करदें मेरी चिता की राखों में......
पानी में बहकर मुझे भी खुद को धोना है.....
पत्थरों से टकराए बिना मुझे भी पिरोना है....
वोह प्यार वोह मोहब्बत जो मुमकिन न थे....
वोह किसी अपने का साथ पाकर चैन से मुझे सोना है.....
जब उठून तोह सुकून भरी सांस लेकर कह सकूँ....
कि न दुनिया की मार न तानो का तिकोना है....      
यहाँ सिर्फ और सिर्फ मिटटी का पुतला ही खिलौना है...
जहाँ हर छत क नीचे प्यार का बिछौना है...
और नफरत का वास नहीं सिर्फ नफरत का गौना है....
बस प्यार के ही फूल लगें पेड़ों की दालों में....
अब उन्ही फूलों को एक प्यार की माला में पिरोना है...
और इसी माला क साथ मुझे बिदा होना है....
बस ख़ुशी ही ख़ुशी हो इन आँखों में....
बस खुशबु की लहर और दिवाली हो पटाखों में....
सिर्फ वोही चार काँधे चाहियें....
जो आज़ाद करदें मुझे मेरी चिता की राखों में....


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, July 11, 2012

स्वर्ग की तुझको देवी कह के

 July 11, 2012     kavita, manu shrivastav, turkash.blogspot.in     No comments   


आसमान में लाखों तारे
जगमग जगमग करते सारे
चुन चुन के सब दे दूँ तुझको
बोल तुझे हैं कौन से प्यारे.
आ सजा दूँ तेरे बदन पे इनको
झिलमिल झिलमिल ये नज़ारे.
स्वर्ग की तुझको देवी कह के
वंदन करता सांझ सकारे

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, July 10, 2012

हुनर न था

 July 10, 2012     hunar na tha., kavita, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

तेरी यादो में तड़पते रहें ता उम्र इस कदर,
तेरी यादों के सहारे जीने का हुनर न था,
इतराते रहे प्यार को अपनी तेरे आँखों में देख कर,
दिल के गहराई में उतरने का हुनर न था,
खुदा से पाक थी मोहब्बत तेरी,
मोहब्बत में सजदे का हुनर न था, 
मरता रहा 'मनु' तेरी हर अदा पे,
तेरी अदाओं को जीने का हुनर न था 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, July 8, 2012

कसाब को फाँसी नहीं दे पाने की मज़बूरी

 July 08, 2012     bharat, kasab, manu shrivastav, pakistan, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

कसाब को फाँसी नहीं दे पाने की भारत की अपनी मज़बूरी हो सकती हैं. मसलन सबरजीत का पाकिस्तान की जेल में कैद होना, जिस तरह पाकिस्तान सबरजीत को पाकिस्तान में हुए बम धमाके का दोषी मानते हुए उसे फांसी सुनाने के बाद भी उसे फांसी नहीं दे रहा है. उसका ये ही कदम शायद कसाब को या अफज़ल को फाँसी के फंदे तक पहुँचने से रोक रही है.
 वैसे ये जगविदित है की पाकिस्तान में सरबजीत को झूठा गया फसाया है और कसाब ने खुलेआम सारी दुनिया के सामने भारत में भारतीयों को मारा है. सरकार को चाहिए की कसाब को फांसी दे और सबरजीत को छुडाये. 
लेकिन ये कूटनीति बहुत टेडी चीज़ होती है. कुछ कठोर कदम उठाने हीं नहीं देती.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, July 7, 2012

Aaram

 July 07, 2012     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

google sab janata hai

 July 07, 2012     manu shrivastav, turkash.blogspot.in     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, July 6, 2012

कोई हेल्प करेगा

 July 06, 2012     jokes, koi help karega, manu shrivastav, turkash.blogspot.in     No comments   

नागिन सोंच में पड़ गयी की क्या बताऊ, जब नाग ने उससे पूछा - ओये तुम्हारा फिगर क्या है ?

कोई उसकी हेल्प करेगा प्लीज !
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, June 22, 2012

आग में पानी डालें या तेल

 June 22, 2012     mantralay me aag, mumbai, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, June 16, 2012

पताली एलियन का हमला

 June 16, 2012     hasya, laghu katha., manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     1 comment   

राम लाल मोहल्ले में पानी की बहुत किल्लत है. लगभग सारे चापाकल सुख चुके हैं. या यूँ कहें की सारे झारखण्ड का यही हाल है. खबरों की माने तो राजधानी दिल्ली में भी पानी की मारामारी है. खैर दुसरे की फटे में टांग अड़ाने की बजाय रामलाल के मोहल्ले की बात करते हैं. 
पानी के किल्लत से परेशान होके राम लाल जल विभाग गए. वहां किसी ने सलाह दी, 'डीप' बोरिंग करा लो समस्या दूर हो जाएगी.  रामलाल लग गए बोरिंग करने. बिहार में तो बीस फूट पे ही पानी आने लगता है, परन्तु झारखण्ड अस्सी फीट के पहले तो केवल पत्थर ही आते हैं. 
अस्सी फीट पे पानी आया. राम लाल बोले थोडा और डीप करो. 
थोडा और डीप करने पे लौह अयस्क निकलने लगा. 
राम लाल बोले थोडा और डीप करो. फिर कोयला निकला. राम लाल नहीं माने बोले थोडा और डीप करो. 
फिर पाइप से एक कमल का प्रिंट हुआ दुशाला निकला, राम लाल सोंचे पाइप अन्दर हीं अन्दर मुड के कर्णाटक के कोयला खदान तो नहीं पहुँच गयी. 
थोडा और डीप किया गया पाइप को. अब तो उसमे से सों सों कर के हवा निकालने लगी. राम लाल घबडाये ये क्या हुआ.
एक पढ़े लिखे ने समझाया - हवा तो हर जगह मौजूद है, धरती के अन्दर कोई जगह खली होगा, वह हवा मौजूद होगी. 
राम लाल पाइप में मुंह लगा के हल्लो हल्लो बोलने लगे इस उम्मीद में की उधर से कोई "पानी का प्रवक्ता" कोई बयान दे की हां है पानी और डीप करवा लो. 
काफी देर हल्लो हल्लो करने के बाद कोई कोई बोला नहीं अन्दर से तो राम लाल सोंचे की हवा का क्या करना है? पाइप को ऊपर खिचवा लेता हूँ. 
पाइप को वापस खिंचवाया जहाँ से पानी आने लगा वही पाइप सेट करवा दिया.
पानी आ गयी थी, ज़मीं से निकाला हुआ ताज़ा पानी एक ग्लास में ले के गटक गए. लौह अयस्को से मिश्रित पिने के अयोग्य पानी कलेजे को चीरती पेट में पहुंची. पर राम लाल को ख़ुशी थी की पानी की समस्या का समाधान हो गया. 
फुरसत पा के टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज देखने बैठे. 
न्यूज आ रहा था. अमेरिका में पताली एलियन का हमला. एक दो फूट चौड़ी पाइप जैसी नली ज़मीं के अन्दर से निकली. उसमे में तरह तरह की आवाजें आ रही थीं. थोड़ी देर के बाद वह वापस ज़मीन के अन्दर वापस चली गयीं. विशेषज्ञों का मानना है की वो निरिक्षण करने आये थे. उनकी योजना शायद धरती पे हमला करने की हो सकती हैं.  
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

पापी को सज़ा

 June 16, 2012     manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, कहानी, लघु कथा     2 comments   

सावन का महिना था. जोरो की बारिश हो रही थी. बीच बीच में बारिश थोड़े देर के लिए थमती भी थी तो फिर बरसने लगती थी. जोर जोर से बिजली कड़क रही थी. मानो कही पास में ही गिरी हो.
इसी मुसलाधार बारिश में एक बस धीरे धीरे चली आ रही थी. यात्रियों से खचाखच भरी हुई बस आंधी पानी में हिचकोले खाते हुए आगे बढ़ रही थी. कड़कती हुई बिजली कभी बस के दायें तरफ गिरती  थी तो कभी बाएं तरफ.
बस में बैठे हुए पंडित जी बोले - "जरुर इस बस में कोई पापी चढ़ा हुआ है, जिसके कारण बस के आसपास बिजली गिर रही है. अपने साथ साथ वो हमे भी मारेगा."
तभी जोर की बिजली कड़की और ठीक बस के आगे गिरी. उसकी चमक में ड्राइवर को आँखे चुन्धियाँ गयीं. ड्राइवर ने जैसे तैसे बस को सम्हाला नहीं तो सड़क किनारे पेंड से जा टकराती बस. यात्रियों की चीख निकल गयीं. घबडा के सबके मुंह से अलग अलग वक्तव्य निकले. जैसे की ओ तेरी की, हे भगवन, इसकी ..... की , इत्यादी इत्यादी.
पंडी जी खड़े हुए बोले - "हमारे बीच जरुर कोई पापी बैठा है, जिसे प्रकृति दंड देना चाहती है. अब उस पापी के किये का दंड बाकियों को न मिल जाये. इसके लिए सबको बारी बारी से निचे उतरना होगा. जिसे प्रकृति सजा देना चाहती है उसे दे देगी, बाकि लोग बच जायेंगे. "
सबसे पहले ड्राइवर उतरा, शायद उसमे सोंचा हो, मैं ही सबसे बड़ा  पापी हूँ, जाके के पेंड के निचे खड़ा होगा. पर ना बिजली चमकी, ना कड़की और ना ही कहीं गिरी. उसे कुछ हुआ नहीं. वो राजाओं की तरह शान से चलता हुआ अपने सिट पे आ बैठा, बोला - "मैं तो पापी नहीं हूँ."
बारी बारी से सब उतरते गए और वापस आके बस में बैठते गए. किसी को कुछ नहीं हुआ. आखिर में एक बृद्ध बचे, आखिरी सिट पे अपने मैले कुचैले कपडे में सहमे बैठे थे. अब सारे लोगों की नज़ारे उनपे टिकी थी और वे थे की उतरने का नाम ही नहीं ले रहे थे. 
पंडित जी गरजे -" देख क्या रहे हो, इसे उतारो निचे. इसी के कारण हो रहा है ये सब."
कुछ हट्टे कट्टे लोगो ने उसे ज़बरदस्ती निचे उतारना शुरू किया था बिजली का कड़कना शुरू हो गया. उस बृद्ध को बस के दरवाजे बाहर कर के सारे लोग बस में वापस दुबक गए. बृद्ध को भी अपना अंत समय दिखाई देने लगा था.
पर कहते हैं ना की जब तक सांस तब तक आस. बृद्ध पेंड के निचे छिपाने के लिए लपके. 
वो अभी पेंड के निचे पहुंचे भी नहीं थे की जोर की बिजली कड़की और बस पर आ गिरी .


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, June 15, 2012

प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है. re-post

 June 15, 2012     2 comments   


क्या करोगी जान के मेरे बारे में ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो  इतना प्यार का,  ना रूप होता है ना रंग होता है .

क्या करोगी देख के मुझको,  मेरी ऐ जाने जाँ
बस जान लो  इतना प्यार का, ना देह होता है ना आकर होता है.

क्या करोगी सुन के मुझको,  मेरी ऐ जाने जाँ ,
बस जान लो  इतना प्यार का, ना बोली होती है, ना आवाज़ होती है.

कर सको महसूस, तो कर लो, मुझे ऐ जाने जाँ,
बस जान लो  इतना प्यार में, बस ख़ुशी होती , बस दर्द होता है. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

क्लीन चिट

 June 15, 2012     anna hazare, baba raamdev, clean chit, manu shrivastav, mulayam singh yadav, sharad pawar, turkash, turkash.blogspot.in     1 comment   

बात तब की है जब बिहार में दसवीं, बारहवीं के एक्जाम में कुर्सी बेंच सब पास हो जाया करते थे. माने की जो पढ़ता था वो भी, जो टनडईली करता था वो भी. सं 1995 तक तो सब pass करते थे. achchhe number से. 1996 में कोर्ट के आदेश के बाद कदाचार मुक्त परीक्षा हुई कुछ सालों तक. तब जाकर कुर्सी बेंच को राहत प्राप्त हुई. नहीं तो हर साल कितना कष्टकारी है एक क्लास से दुसरे क्लास में जाना  बिना हाथ pair वाले कुर्सी बेंच के लिए.



खैर, बात कर रहा था की कुर्सी बेंच सब पास कर जाता था. करे भी क्यों नहीं, सभी को 'चिट' करने की खुली छुट  थी .लोग तो यहाँ तक कहते थे की हम तो टेबुल पे चाकू रख के लिखते हैं, मजाल है की कोई रोक ले हमें. इसमें कितनी सत्यता थी, पता नहीं.

शरीफ टाईप  के लोग चिट कर के संतोष कर लेते थे. एक्जाम में लोग "बाहर से भी सपोर्ट" करते थे. कोई खिड़की से फर्रे पास करा रहा होता था तो कोई पत्थर में लपेट के फेंक रहा होता. इसी बहाने क्रिकेट की प्रक्टिस हो जाया करती थी. किसी की थ्रो फेंकने की तो किसी की कैच करने की. 

हम भी पहुंचे  थे देखने की कुर्सी बेंच कैसे पास होता है, आखिर हमारी भी बारी आने वाली थी पास करने की . देखा, एक्जाम रूम की खिड़की पे एक तमतमाया हुआ चेहरा प्रगट हुआ, चिल्लाया- "ये क्या भेजा है, इस चिट में? सादा पन्ना भेज दिया क्या ?"

चिट फेंकने वाला हड बडाया, बडबडाया - " सादा चिट चला गया क्या? लगता है की क्लीन चिट दे दी मैंने!"  
तब पहली बार आवगत हुआ था मैं क्लीन चिट से. फिर तो कई बार या यूँ कहूँ की बार बार सुनाने को मिलाता रहा क्लीन चिट. इसने उसको क्लीन चिट दिया, उनने किसी और को क्लीन चिट दिया. पर मैंने आज तक नहीं सुना की किसी ने किसी से क्लीन चिट लिया.

अब कुछ दिन पहले की बात है. टीम अन्ना चौदह मंत्रियों सहित पी. एम. पे भी आरोप लगा रहे थे की ये सब भ्रष्ट  हैं और हमारे पास इसका सबूत भी है.  वगैरा वगैरा . फिर अन्ना ने खुद पीएम को क्लीन चिट देते हुए कहा - "पी एम इमानदार है, सरकार भ्रष्ट"

सरकार को भ्रष्ट तो बाबा रामदेव भी कहते हैं. उनका मानना है की भ्रष्ट लोगो का कला धन विदेशों में जमा है. वे तो एक निश्चित अमाउंट का उल्लेख करते हुए कहते हैं "इतना" जमा है विदेशी बैंकों में. 

वो कौन है जो बाबा को अंदरूनी खबर  दे जाता है. उस गुप्तचर को तो भारतीय गुप्तचर विभाग में होना चाहिए. ताकि गुप्तचर विभाग अपने माथे से ये कलंक तो हटा सकें की वे हमेशा विफल रहती हैं और कोई सूचना नहीं देती हैं. 

बाबा राम देव, कालेधन की वापसी के लिए सांसदों से मिल के उनका समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं. बाबा सांसदों से मिलते जा रहे हैं और उनको क्लीन चिट देते जा रहे हैं. कुछ लोगो, मुलायम सिंह , शरद पवार , को बाबा की तरफ से क्लीन चिट मिल गई है की "वो भ्रष्ट नहीं हैं."

यानि क्लीन चिट वही दे सकता है जो आरोप लगा रहा हो.

बाबा की लिस्ट में कई सांसदों से मिलाने का प्रोग्राम है और अभी तो उन्होंने क्लीन चिट देना शुरू हीं किया है.  
बाबा, मेरा एक सवाल है आपसे.  आपके प्रोग्राम लिस्ट में कर्णाटक के मंत्रियों और ए. राजा बगैर के नाम हैं क्या ? 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, June 3, 2012

आज भारत बंद है

 June 03, 2012     aaj bharat band hai., manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     5 comments   

भईया जी सुबह सो कर उठे, बहार का दरवाजा खोला तो पता लगा की आज भारत बंद है. दूध वाले ने दूध नहीं दिया था, सोंचे की खुद चल के ले लूं, पास में ही तो हैं.

खटाल पहुंचे तो दूध वाला बोला - "दूध नहीं है." भईया जी पूछे - क्यों? क्या हुआ? जबाब आया - आज भारत बंद है?

सुन के आश्चर्य हुआ, की केंद्र के पटरी इतना असंतोष की भारत बंद के दौरान भैंसों ने भी दूध देना बंद कर दिया. भईया जी की बात सुन के दूधवाला बोला - अरे नहीं वो सुबह से पानी नहीं आ रहा है. क्या भैंसों को पिलायें, क्या मिलाएं?  बिना खाए पिए भैंसिया अइसन मरने दौड़ी की रामदेव बाबा की राम लीला मैदान वाली घटना याद आ गयी.

पानी नहीं आ रहा है, सुन के भईया जी को बहुत चिंता हुई. अभी तो सो के उठे हैं. अभी कुछ किया धरा भी नहीं और अब वो ज़माना भी नहीं रहा की धो पोंछ के काम चला लें.
इसी चिंतन मनन में लगे थे की रोड से बंद समर्थो का जत्था गुजरा. सामने से एक स्कूटर वाला आ रहा था. भीड़ को देखते ही उसने स्कूटर साइड कर ली. भीड़ को पता लगते ही की स्कूटर वाला काम पे जा रहा है, सबने उसे घेर लिया. निचे उतर के 'निरमा' वाली धुलाई कर दी. मुझे लगा की स्कूटर वाला जोश में आएगा और पुरे भीड़ की धुलाई कर देगा. पर हर कोई 'सिंघम' तो नहीं हो सकता.

एक जोशीला बंद समर्थक चिल्लाया- हम पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के विरोध में भारत बंद कर रहे हैं. तुमको देश वासियों की जरा भी परवाह नहीं है. " गुस्से में उसने स्कूटर में आग लगा दी. पेंड़ो को कटते देख के धरती कुछ नहीं बोल पाती. वैसे ही वो अपने स्कूटर ओके धू धू जलते देख के कुछ बोल नहीं पाया.  एक बुजुर्ग जनता, पार्टी में से आगे आये और उसे समझाया - "उदास मत हो बेटा, गाडी का इन्श्योरेंसे तो कराया ही होगा. उसके पैसे से नया गाडी ले लेना."

 तभी सामने से एक समोसे वाला आता दिखाई दिया. भीड़ देखा के तो उसके प्राण सुख गए. वो बाज़ार से भागा भागा आ रहा था. बाज़ार में लोगो ने उसके समोसे गिरा दिए थे. उसने दूर से ही स्कूटर वाले की पिटाई होते देख ली , भीड़ ने उसे घेर लिया, बोले - भूख लग रही है यार, समोसे खिलाओ. समोसे वाला बोला -"वो तो ख़तम हो गयी. लाल चटनी बची है, खा लीजिये. कृपा हो जाएगी". उसके कहते हैं सारी भीढ़ लाइन लगा के लाल चटनी का सेवन करने लगी.

एक कार्यकर्त्ता भईया जी के पास आया और उनको एक पानी का बोतल थमा के बोला - "हई धरो, पानी तो आएगी नहीं आज. बंद में शामिल हो जाओ, तो और भी बोतल मिलेंगे पिने के लिए, सूखे गले से नारा कैसे लगा पाओगे?" भईया जी उससे कुछ कहना चाहते ही थे की कोई चिल्लाया - "भाग भाग ............. भाग " उस बन्दे ने अपना मोबाइल निकाला तो पता लगा की ये तो उसके मोबाइल का रिंग टोन है. पानी वाले भाई फ़ोन पे बतियाते हुए भीड़ में कहीं ग़ुम हो गये.
मोबाइल के रिंग टोन ने भईया जी के लिए प्रेरणा का काम किया. वो धीरे से घर भाग लिए.
बाज़ार बंद था, दुकाने बंद थी, भईया जी ने अपने खिड़की दरवाजा बंद कर लिया. क्योकि आज भारत बंद था. 

 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, May 29, 2012

प्रगतिशील सरकार की पहचान !

 May 29, 2012     congress, government, manu shrivastav, sarkar, turkash, turkash.blogspot.in, UPA     4 comments   

यूपीए सरकार के तीन साल पुरे हो गए , इससे बड़ी ख़ुशी और आश्चर्य की बात क्या होगी ? सब चिल्ला रहे हैं की पेट्रोल के दाम बढ़ गए . अरे ! ये भी तो देखो, पहले एल लीटर पेट्रोल से कारें सात किलो मीटर चलती थीं अब तो पच्चीस पच्चीस किलो मीटर चलने लगीं हैं. बाइक वाले पहले एक किलो मीटर में तीस पैंतीस किलो मीटर जाते थे, अब तो साठ सत्तर किलोमीटर तक हांक लेते हैं. अजी औसत निकल के देख लो, उस हिसाब से महंगाई बढ़ी कहा हैं?

मानो ना मानो ये सरकार सभी को सामान नजर से देखती है. क्या इन्सान? क्या मशीन? सभी को. पानी की इतनी किल्लत है. इंसानों को ठीक से पानी मय्यसर नहीं हो रहा है और आप अपने गाड़ियों को भर पेट पेट्रोल पिलाइयेगा . ये सरकार की "मशिनियत" हीं तो है की पेट्रोल महंगा कर दिया. ज्यादा पेट्रोल पीके इन गाड़ियों का मन न बढ़ जाये. दूसरी बात महँगी होने के कारण आप गाडी में उतना ही पेट्रोल न डालेंगे, जितना अपने पेट में राशन पानी जाता है. यानि इन्सान और मशीन सब बराबर है सरकार के नज़रों में . और आप हम हैं की समझते हीं नहीं बात को, पहुँच जाते हैं जंतर मंतर.

गैस महँगी हो गयी है. अजी तो गलत क्या है? सस्ती गैस घर में रख के क्या कीजियेगा. राशन है घर में पकाने के लिए? जो गैस गैस चिल्ला रहे हैं . सबके कहने से क्या होता है की जनता की बुरा हाल है. कहने से क्या होता है? फैक्ट देखिये .

गरमी इतनी भयंकर पड़ रही है. आदमी का जीना मुहल हो रहा है. अब ये मत कह दीजियेगा की भयंकर गर्मी पड़ने के पिच्छे यु पी ए का हाथ है. गर्मी इतनी है की बिजली के भी पसीने छुट रहे हैं. वो भी परेशां होके कट जाती है. बिजली रहेगी तो आप कूलर, ए सी , पंखा चलाइयेगा. बिजली की खपत बढ़ेगी ग्लोबल वार्मिंग होगा. आपको-हमको तो अपनी अपनी पढ़ी है. सरकार को तो साडी दुनिया जहान का सोंचना है. हमारी तरह 'सेल्फिश ' थोड़े न है वो.
पेट्रोल के मुकाबले डीजल सस्ता है की नहीं है? अब आप लक्जरी गाडी नहीं खरीद सकते तो गलती किसकी है ? आपकी या सरकार की?

अरे ! सुनिए ! जा कहाँ रहे हैं? लक्जरी गाडी बाद में खरीदिएगा. पहले दो जून की रोटी खरीदने की कोशिश करिए. गाडी खरीदना तो बहुत आसन है. कोई भी बैंक लोन दे देगा. रोटी केलिए लोन मिलते सुना है? नहीं ना?

बच्चों को गप्पे मरते देख बहुत डांट लगाया करते थे, खाली बात करके ही पेट भरोगे क्या? अगर ऐसा है तो करिए न जी भर के बात फ़ोन पे. सरकार ने फ़ोन कॉल रेट कितना सस्ता कर दिया है. सरकार पे ये बेबुनियाद इलज़ाम लगाना कहीं से बाजिब नहीं है की सरकार हर चीज़ को महंगा कर रही है .
पहले कम आनाज सड़ता था, सरकार ने प्रगति की अब ज्यादा सड़ रहा है. पहले छोटे घोटाले होते थे, सरकार की प्रगति देखिये बड़े बड़े हो रहे हैं. घोटाले बाजों पे बरसों बरस मुकदमे चलते थे, सजा नहीं हो पति थी. अब तो एक लाख के घुस पे ही चार साल की सजा करवा दी. ये क्या कम प्रगतिशील बात है ? बोलिए?

पहले सरकार के फैसले मैडम की इच्छा से होते थे, अब दीदी की इच्छा से हॉटे हैं. पहले एक डॉलर में पैतालीस रूपया आता था, अब पचपन आ रहा है. पहले फाँसी के लिए एक आतंकवादी कैद था, अब दो दो कैद हैं.
ये सब क्या है ? प्रगति ही तो है. और कितनी प्रगति चाहिए जी आपको?



Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, May 25, 2012

Suraj ki aag ugalati gami ka sadupayog

 May 25, 2012     No comments   

Garmi apne charam pe hain aur Din chadate hi suraj aag ugalane lagata hai. Haal ye hai ki duphar me agar kisi kaam se bahar jana ho to apna pura tan dhak ke nikalana hota hai. Aur itni garmi me bijali bhi bahut katati hai. Garmi aur pasine se haal behaal hua rahata hai. Suraj ki aag ugalati garmi pe ankush nahi lagaya jaa sakta aur nahi bijali ko katane se roka jaa sakta hai. Lekin agar, solar urja ka upyog kiya jaaye to surag ki aag ugalai garmi se hum bijali jarur bana sakte hain aur garami aur pasine se thodi nizat jarur paa sakte hain .
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, May 14, 2012

भ्रष्टाचार का दानव !

 May 14, 2012     bhrastachar ka danav, leon, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, भ्रष्टाचार का दानव     1 comment   

मंदिर की सीढियों पे बैठे कुछ लोग बतिया रहे थे भ्रष्टाचार तो दानव का रूप लेते जा रहा है . मंदिर के अहाते में गमछा बिछा पंडी जी सबकी बाते सुन रहे थे. दानव का नाम सुनते हिन् उनके शिखा में स्पार्किंग हुई और वो सावधान की मुद्रा में खड़ी हो गयी .पंडी जी के मन में पहला ख्याल आया - इस दानव का कुछ करना होगा, इससे निपटाना होगा .

दानव से कोई मानव निपट नहीं सकता, इसके लिए भगवन की हिन् शरण में जाना होगा.

अगले ही दिन पंडी जी ने मंदिर के श्याम पट्ट, जिसपे वे सूर्योदय कब होगा, सूर्यास्त कब होगा, एकादशी कब है, लिख के जनता को बताया करते थे, पे लिख के ऐलान किया की वे भ्रष्टाचार के दानव से निपटने के लिए हवन करने वाले हैं.

पंडित जी की सूचना जंगल के आग की तारा चारो तरफ फ़ैल गयी. लोग भ्रष्टाचार से निपटने के लिए चंदा भेजने लगे. लोगों में काफी जोश, उत्साह और एकता देखने को मिल रही थी. जो या तो इंडिया - पाकिस्तान क्रिकेट मैच के वक़्त दिखती है या लड़ाई के.

शाम तक मंदिर के दोनों दान पेटियों का पेट गले तक इस तरह से भर गया की अब वे डकार तक नहीं ले सकतीं थीं . पंडी जी मन ही मन खुश हुए अब तो इस दानव की खैर नहीं. अगले दिन तड़के ही पूजा पाठ शुरू करने केलिए, वे जल्दी ही विश्राम करने चले गए.

अगले दिन सुबह सो के उठने पे देखा , दान की एक ''पेटी" गायब है. पंडी जी ने अपना सर पिट लिया, परिणाम स्वरुप बाल रहित सर लाल हो गया.

   खैर जाने वालों का अफ़सोस नहीं किया जाता है, जितना होता है उसी में काम चलाया जाता है, हवन सामग्री लेन के लिए एक दल नियुक्त हुआ. और इस प्रकार हवन प्रारंभ हुआ. हवन में बहुत से लोगो ने बाद चढ़ के हिस्सा लिया. हवन सफलता पूरक संपन्न हुआ. 

   हवन के बाद, उसमे ख़रीदे गए सामान और उसमे खर्च किये गए पैसे की फेरहिस्त बनायीं जाने लगी. नौ का सामान नब्बे में आया देख के पंडी जी ऐसे खफा हुए जैसे ममता दीदी मनमोहन जी की सरकार से होतीं हैं. 

 पंडी जी सोंच रहे थे - "क्या इस भ्रष्टाचार के दानव से मानव लड़ सकता है?
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, May 12, 2012

निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं ???

 May 12, 2012     manu shrivastav, nirmal baba., turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


फेसबुक पर मैंने के पेज बनाया था "निर्मल बाबा इज फ्रोड". 

मुझे आज फेसबुक की तरफ से एक तरफ से मैसेज मिला , किसी थर्ड पार्टी के आग्रह/ कम्प्लेंट से आपका यह पेज डिलीट किया जा रहा है और आपको इस तरह की एक्टिविटी के लिए इनकरेज किया जा रहा है, दुबारा ऐसा ना करें अन्यथा आपका अकाउंट डिलीट कर दिया जायेगा .


डियर फेसबुक जी और थर्ड पार्टी जी,
बेशक कीजिये !!! किसी का अकाउंट डिलीट कर देने से निर्मल बाबा "दूध के धुलें" नहीं हों जायेंगे !
"निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं, लोगो को बेवकूफ बना रहे हैं "


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, May 7, 2012

राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए

 May 07, 2012     manu shrivastav, rashtrapati ka chunaw, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   


मेरा एक मित्र है, जिसने पिछले साल बिहार में लाइब्रेरियन की नौकरी प्राप्त की थी. स्कुल के लाइब्रेरी में किताबें तो थीं नहीं, तो वो खाली क्लास में जाके पढ़ा दिया करता था. कभी हिंदी , कभी संस्कृत, कभी गणित . वैसे उसने भौतिकी से मास्टर डिग्री कर रखी थी. एक शिक्षक जिन्होंने गणित से डिग्री हासिल की थी वो हिंदी पढ़ाते थे. वे कभी कभी इंग्लिश भी पढ़ा दिया करते थे. इसी तरह जो शिक्षक जिस विषय में निपुण थे उसे छोड़ के बाकि के विषय पढ़ाया करते थे.

सवाल ये नहीं है की आपकी पृष्ठभूमि क्या है? सवाल ये है की आपसे किस तरह से, किस तरह का काम लिया जा रहा है . और आप उसे कर पाते हैं की नहीं. उस जरुरत के अनुसार अपने सहज ज्ञान से अपने को अपडेट करते हैं की नहीं.

देश की जनता के पास गैर राजनितिक व्यक्ति के निर्णय पे भरोसा नहीं करने का रास्ता कहाँ बचता है. प्रस्ताव संसद पास करती है. राष्ट्रपति किसी प्रस्ताव को दो बात लौटा बार है. तीसरी बार वो प्रस्ताव स्वतः पास हो जाएगी . इसलिए राष्ट्रपति के राजनितिक पृष्ठभूमि के होने और नहीं होने से जनता को कहाँ फायदा पहुँच रहा है? जनता के हित ke बारे में सोचने ke liye राष्ट्रपति को राजनितिक पृष्ठभूमि का होना ही नहीं चाहिए. राजनितिक पृष्ठभूमि के होने का मतलब है की वो व्यक्ति किसी “खास दल ” के विचारों से सहमत होगा. उसे अन्य दल के द्वारा लाये गए प्रस्ताव पसंद नहीं आयेंगे और वो उसपे अपनी निष्पक्ष राय देने में असमर्थ होगा. अतः राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए

भारतीय राष्ट्रपति को जितने सिमित कार्य सिमित हैं उसके लिए उन्हें बहुत ज्यादा राजनितिक ज्ञान की जरुरत नहीं है. स्कुल और कोलेजों के नागरिक शास्त्र में जितना पढाया जाता है, उतना भी काफी है राष्ट्रपति के अधिकार और कर्त्तव्य के बारे में जानने के लिए , बाकि फैसले तो वो अपने सहज ज्ञान से ही लेते हैं .

मैं मानता हूँ की उतनी जानकारी मुझे भी है.

राष्ट्रपति के राजनितिक होने की बात करना, दलों द्वारा नामांकित किये गए अपने उम्मीदवारों के नाम को उचित बताने का बस एक बहाना मात्र हो सकता है.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, May 6, 2012

मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

 May 06, 2012     manu shrivastav, master ji fansi ka fanda ek bilaan chhoti kar do, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     No comments   

Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, May 5, 2012

धत तेरी की

 May 05, 2012     jokes, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

क्या होगा जब
हेल्लो
के बदले
धत तेरी की  
कहा जाये  
;)
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, May 3, 2012

गयी भैंस पानी में

 May 03, 2012     jokes, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in     No comments   

टीचर -  गयी भैंस पानी में और डूबी नहीं. इस वाक्य से एक और वाक्य बनाओ. 
स्टुडेंट्स - अच्छा हुआ नहीं डूबी , डूब जाती तो लोग कहते की बैल के बच्चे की माँ बनाने वाली थी तो आत्म  
 हत्या कर ली. 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, April 30, 2012

Humpty dumpty sat on Deewar

 April 30, 2012     jokes, manu shrivastav, turkash, turkash.blogspot.in, vyang     No comments   


Humpty dumpty sat on Deewar 

Humpty gir gaya foot gaya kapar 

Doctor bola pahale likhao complain 

Supreme court bole pahale treatment phir explain
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, April 23, 2012

कौन सा स्टेशन है?

 April 23, 2012     jokes, manu shrivastav, turkash     No comments   

स्टेशन पे ट्रेन रुकी. एक यात्री ने खिड़की के पास बैठे हुए यात्री से पूछा - कौन सा स्टेशन है? देखना क्या लिखा है?
एक ने बाहर देखा, बोला - पेय जल.
दुसरे यात्री भी बाहर देख रहा था, बोला - शौचालय.
स्टेशन का नाम पूछने वाले ने अपना सर पीट लिया, बोला - क्या बात कर रहे हो? एक स्टेशन का दो दो नाम कैसे हो सकता है ? 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, April 18, 2012

तेरे घर में ----- नहीं है क्या?

 April 18, 2012     jokes, manushrivastav, turkash     No comments   

एक लड़के ने लड़की को छेड़ा |
लड़की गुस्से में बोली - तेरे घर में माँ बहन नहीं है क्या?
लड़का - नहीं, मैं टेस्ट ट्यूब बेबी हूँ ! 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Saturday, April 14, 2012

आदमी बदल दो. काम हो जायेगा

 April 14, 2012     manu shrivastav, turkash     No comments   


ठाकुर - बाबा, गब्बर ने मेरा हाथ काट दिया है, उससे कैसे बदला लूं?
बाबा - ओह ! अच्छा बताओ, नित्य क्रिया करने के बाद की किसकी सहायता लेते हो?
ठाकुर - राम लाल की !
बाबा- तो आदमी बदल दो. काम हो जायेगा
अगले दिन ठाकुर को जय वीरू से संपर्क करते हुए देखा गया |
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, March 8, 2012

होली है ! होली है !

 March 08, 2012     hasya, holi hai, manu shrivastav, manu srijan     4 comments   

लोग झुण्ड में चिल्लाते जा रहे थे - होली है ! होली है !
भईया जी छत की मुंडेर से झांकते हुए बोले - हाँ है ! हाँ हैं !
झुण्ड में से किसी ने रंग का गुब्बारा मारा - बुरा न मनो, बुरा न मानो,
भईया जी की वाइफ खिड़की का परदा सरकते हुए बोली - अईसे कईसे मान लेंगे ! अईसे कईसे मान लेंगे ! 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, February 14, 2012

सत्य क्या है?

 February 14, 2012     bhaiya ji, jokes, manu shrivastav, manu srijan     3 comments   

महात्मा जी प्रवचन दे रहे थे - भक्तों, सत्य क्या है?
भईया जी उठे और बहुत ही श्रद्धा से बोले - महात्मा जी, राम नाम सत्य है.  
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, February 13, 2012

This valentine.......

 February 13, 2012     manoranjan shriavstav, manu shrivastav, manu srijan, valentine     1 comment   


This valentine all girls will get her boyfriend, but all boys will not get his girlfriend.
Please, save girl child for our future.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Sunday, February 12, 2012

कुछ दान कीजिये

 February 12, 2012     bhaiya ji, jokes, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

भिखारी - बहुत भूख लगी है खाने के लिए  कुछ दान कीजिये . दाहिने हाथ से छू के कीजियेगा ..
भईया जी - प्यास लगी हो तो भी बता दो, पानी छू के दान करूँगा ! 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

किस करने का सबसे अच्छा वक़्त

 February 12, 2012     bhaiya ji, jokes, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav     3 comments   

सवाल - गर्ल फ्रेंड को किस करने का सबसे अच्छा वक़्त कौन सा होता है?

भईया जी   - जब उसके हाथ में मेंहदी में लगे हुए हों !
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Friday, February 10, 2012

किससे पढ़ के आये ?

 February 10, 2012     jokes, manu, manu srijan     6 comments   

इंटरव्यू में - साल में कितने दिन होते हैं?
केंडीडेट  - 360
इंटरव्यू लेने वाला - किससे पढ़ के आये हो भाई??
केंडीडेट - नितीश कुमार के शिक्षामित्र से !
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, February 6, 2012

लाईट कैसे कट जाती है?

 February 06, 2012     jokes, manoranjan shriavstav, manu shrivastav, manu srijan     2 comments   

टीचर - होम वर्क क्यों नहीं किया?
स्टुडेंट - लाइट कट गयी थी.
टीचर - लाईट कैसे कट जाती है?
स्टुडेंट - लाईट भक्क से कट जाती है.
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, January 5, 2012

क्या आप भ्रष्ट हैं ?

 January 05, 2012     bhartiya janta party, bhrastachar, congress, manu shrivastav, manu srijan     3 comments   

एक नेता जी,  भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में पहुँचा.
रिसेप्निस्ट से पूछा मुझे पार्टी ज्वाइन करनी है, क्या करना होगा मुझे?
रिसेप्निस्ट ने पूछा - क्या आप भ्रष्ट हैं या आप पे कोई मुक़दमा चल रहा है?
नेता जी ने शराफत दिखने के लिए झूठ बोल दिया - "नहीं"
रिसेप्निस्ट बोली - "तब आप गलत जगह पे आ गए हैं ! "
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Newer Posts Older Posts Home

Please Be the part of my life...

Blog Archive

  • ►  2021 (1)
    • ►  July (1)
  • ►  2019 (1)
    • ►  March (1)
  • ►  2018 (5)
    • ►  September (1)
    • ►  July (1)
    • ►  June (3)
  • ►  2017 (1)
    • ►  April (1)
  • ►  2016 (7)
    • ►  April (4)
    • ►  January (3)
  • ►  2015 (2)
    • ►  May (2)
  • ►  2014 (10)
    • ►  September (3)
    • ►  August (1)
    • ►  July (2)
    • ►  April (1)
    • ►  February (2)
    • ►  January (1)
  • ►  2013 (12)
    • ►  August (1)
    • ►  July (4)
    • ►  April (4)
    • ►  February (1)
    • ►  January (2)
  • ▼  2012 (57)
    • ▼  December (3)
      • भारतीय राजनीति
      • मैं पाप बेचती हूँ.
      • दिल ज़रा उदास है
    • ►  November (4)
      • चंचल बाबा के नुस्खे - आखरी भाग।
      • सन ऑफ़ सरदार.
      • देंगे दुआएं, उसे मुफ्त की
      • जन्म दिवस की बधाई !
    • ►  October (3)
      • चंचल बाबा के नुस्खे -1
      • ए मुर्गी ए मुर्गी ! - repost
      • में ए ए ए ए ए ?
    • ►  September (3)
      • भूख
      • एक रियलिस्टिक कविता
      • अपने बाप का, अपने दादा का, सबका बदला लेगा ठाकरे
    • ►  August (7)
      • मनमोहन सिंह जी की व्यथा - व्यंग
      • राजनैतिक मैदान में टीम अन्ना !
      • पीएम इन वेटिंग
      • मेरे पास मोबाइल है
      • कुत्तों का लिंगानुपात - (A)
      • दुनिया गोल है.
      • मोहब्बत जरुर हो जाये
    • ►  July (11)
      • हम भीड़ हैं ?
      • हाथी उड़, चिड़िया उड़, करप्शन उड़
      • खुजली और गोलगप्पा
      • कौन है जिम्मेदार ?
      • ............ आज़ादी...........
      • स्वर्ग की तुझको देवी कह के
      • हुनर न था
      • कसाब को फाँसी नहीं दे पाने की मज़बूरी
      • Aaram
      • google sab janata hai
      • कोई हेल्प करेगा
    • ►  June (6)
      • आग में पानी डालें या तेल
      • पताली एलियन का हमला
      • पापी को सज़ा
      • प्यार का, ना रूप होता है ना रंग होता है. re-post
      • क्लीन चिट
      • आज भारत बंद है
    • ►  May (8)
      • प्रगतिशील सरकार की पहचान !
      • Suraj ki aag ugalati gami ka sadupayog
      • भ्रष्टाचार का दानव !
      • निर्मल बाबा फ्रोड कर रहे हैं ???
      • राष्ट्रपति को गैर राजनितिक होना चाहिए
      • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो
      • धत तेरी की
      • गयी भैंस पानी में
    • ►  April (4)
      • Humpty dumpty sat on Deewar
      • कौन सा स्टेशन है?
      • तेरे घर में ----- नहीं है क्या?
      • आदमी बदल दो. काम हो जायेगा
    • ►  March (1)
      • होली है ! होली है !
    • ►  February (6)
      • सत्य क्या है?
      • This valentine.......
      • कुछ दान कीजिये
      • किस करने का सबसे अच्छा वक़्त
      • किससे पढ़ के आये ?
      • लाईट कैसे कट जाती है?
    • ►  January (1)
      • क्या आप भ्रष्ट हैं ?
  • ►  2011 (85)
    • ►  December (2)
    • ►  November (9)
    • ►  October (1)
    • ►  September (3)
    • ►  August (6)
    • ►  July (13)
    • ►  June (12)
    • ►  May (16)
    • ►  April (14)
    • ►  March (5)
    • ►  February (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2010 (33)
    • ►  December (16)
    • ►  November (3)
    • ►  October (6)
    • ►  September (8)

Popular Posts

  • जय माँ भवानी, थावे वाली
    स्कूल में पढ़ते समय शुक्रवार को ढेड घंटे का लंच टाइम हुआ करता था. हमारे कुछ शिक्षक और कुछ छात्र जुम्मे की नमाज अदा करने जाते थे. मेरा स्कूल ...
  • जहाँ अभी है मंदिर मस्जिद वहाँ बनेगी मधुशाला ||53||
    बजी न मंदिर में घडियाली, चढ़ी न प्रतिमा पर माला, बैठा अपने भवन मुअज्जिन देकर मस्जिद में टला, लूटे खजाने नरपतियों के, गिरीं गढ़ों की दीवारें, ...
  • मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
    मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी . प्यार से कहती मुझे गुडिया रानी, कभी  जो  करती  मैं  शैतानी , मम्मी  कहती  मुझे ...
  • कुत्ते, इंसानों के मोहल्ले में.
    सोसाइटी के सफाई वाले अकसर परेशान रहते हैं. आगे झाड़ू लगा रहे होते हैं. पीछे साफ किये जगह में कुत्ते लोटने लगते हैं. कुत्तों के लोटने से जगह फ...
  • मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!!
    मुन्नी कि बदनामी अभी कम नहीं हुई कि आ गयी शीला कि जवानी !!! पर, मुन्नी और शीला में कई फर्क हैं. मुन्नी कि गाँव कि गोरी है तो , शीला शहरी छोर...
  • अर्थला – पढ़ना एक व्यसन है (Arthla – Vivek Kumar)
    “पढ़ना एक व्यसन है.” उपरोक्त Quote मैंने इसी किताब से लिया है. अगर आपको पढ़ने का व्यसन है, या सरल भाषा में कहें की पढ़ने का नशा है, तो ये क...
  • अगर भारत में रहना है तो समोसा खाना पड़ेगा
    पिज्जों की बढ़ती माँग के कारण समोसों की माँग में भारी गिरावट देखने को मिली है. जिससे समोसा बेंचने वालों के रोजगार पर भारी असर पड़ा है. समोसों ...
  • मैं पाप बेचती हूँ.
    एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये वहाँ एक महिला बैठी मिली उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी।  कालिदास जी ने उस महिला से पूछा :...
  • मास्टर जी ! फांसी का फंदा एक बिलान छोटी कर दो

Copyright © ये भी ठीक ही है | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com