ये भी ठीक ही है

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Thursday, December 22, 2011

सुशासन !

 December 22, 2011     manu shrivastav, manu srijan, vyang     2 comments   

दो घंटा लाइट पचास रुपये किरासन,
वाह रे नितीश का सुशासन !
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Thursday, December 1, 2011

ए मुर्गी ए मुर्गी !

 December 01, 2011     hasya, manu shrivastav, manu srijan, vyang     4 comments   

ए मुर्गी ए मुर्गी !
क्या तेरे पास है अंडा?
जी जजमान! जी जजमान!   
मेरे पास है तीन अंडा
एक अंडा एससी / एसटी के लिए 
दूसरा ओबीसी के लिए
तीसरे से होगा मेरा लाल पैदा 
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Monday, November 28, 2011

Anna ji on FDI

 November 28, 2011     1 comment   



reporter - anna ji, desh me FDI lagu ki ja rahi hai. isase gareeb dukandaro ko nuksan hoga. kya aap iska virod karenge?

anna - ab sare kaam main hi karu ?
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Sunday, November 27, 2011

शहीद की आत्मा

 November 27, 2011     manu shrivastav, manu srijan, short story     1 comment   

एक शहीद की आत्मा एक युवा के सपने में आके पूछने लगी . हमने इस देश के लिए अपने जान न्योछावर किये. क्या आज की युवा पीढ़ी हमे याद करती है.

युवक बोला - हम आप लोगो को कैसे भूल सकते हैं?  हम आपको सैल्यूट करते हैं, और दिन में मैंने इसके लिए अपना फेसबुक स्टेटस अपडेट भी किया था.
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Friday, November 25, 2011

Dear Facebook

 November 25, 2011     facebook, jokes, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

Dear Facebook,, 
Everytime I add a girl you ask me "Do you know her?"
I am asking to you - Is she your sister.. ??? :P

and I do not stop sending friend request to galz . facebook blocked my sending friend request optin for two days.

means - le bhugat aur bhej meri bahano ko friend request :D :D
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Thursday, November 24, 2011

युवक ने थप्पड़ मारा

 November 24, 2011     bigg boss 5, jokes, manu shrivastav, manu srijan, puja mishra, sharad pawar     2 comments   

बिग बॉस पूजा मिश्रा से -  कृषि मन्त्री शरद पवार को एक युवक ने थप्पड़ मारा. क्या कहना है आपका?
पूजा मिश्रा -  जनता को महंगाई की मार पड़ रही है , उन्हें एक थप्पड़ की मार पड़ गयी तो क्या हुआ? प्लीज स्पेयर मी 
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Wednesday, November 23, 2011

यु पी के चार टुकडे

 November 23, 2011     bigg boss 5, jokes, manu shrivastav, manu srijan, mayawati, puja mishra, uttar pradesh     1 comment   

बिग बॉस पूजा मिश्रा से - यु पी को मायावती चार टुकड़ो में बाँटना चाहती हैं. क्या कहती हो आप इस पे? 


पूजा मिश्रा - एक टुकड़ा बसपा के लिए, दूसरा भाजपा के लिए, तीसरा कांग्रेस के लिए .


बिग बॉस  - और चौथा?

पूजा मिश्रा - देखिये ! मैं उस चौथे हिस्से पे राज्य करने नहीं जाने वाली . स्पेयर मी  .

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Friday, November 18, 2011

भ्रूंड हत्या - लघु कथा

 November 18, 2011     manu shrivastav, manu srijan, short story     No comments   

छेदी सिंह को उनके दोस्त ने कंप्यूटर गिफ्ट किया. और इन्टरनेट भी लगवा दिया. छेदी सिंह बहुत खुश हुए की अब वे भी इन्टरनेट का लुफ्त उठा पाएंगे. छेदी सिंह के दोस्त ने बताया की फेसबुक पे अकाउंट बना लो वहां  पे   
कई लोगो के संपर्क में आओगे. नए दोस्त बनेंगे. छेदी सिंह से फेसबुक पे अकाउंट बना लिया. 

अब वे लोगो के फ्रेंड लिस्ट में जा जा के दुसरे को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने लगे. लेकिन एक बात उन्हें हमेशा परेशान करती थी की जिसके भी फ्रेंड लिस्ट को चेक करते , वहां उन्हें लड़कियां कम और लड़के ज्यादा मिलते. 
उनने अपने दिल की बात अपने परम मित्र को बताई. 

मित्र  बोले कहा से होंगी फेसबुक पे ज्यादा लड़कियां. उनके भ्रूंड की तो गर्भ में ही हत्या कर दी जाती. फेसबुक पे लड़कियों का अनुपात लड़के के बराबर हो, इसके लिए हमे कन्या भ्रूंड हत्या बंद करनी होगी. 



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Thursday, November 17, 2011

नाक क्यों नहीं टकराती

 November 17, 2011     jokes, manu shrivastav, manu srijan     3 comments   



गर्ल फ्रेंड - जब हम किस करते हैं तो हमारी नाक क्यों नहीं टकराती हैं?

बॉय फ्रेंड गुस्से में - या तो तू नाक टकरवा ले या किस कर ले !

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Tuesday, November 8, 2011

स्वामी अग्निवेश अब बिग बॉस के घर में जायेंगे,

 November 08, 2011     BJP, congress, kavita, manu shrivastav, manu srijan, sawami agnivesh, vyang     2 comments   

स्वामी अग्निवेश अब बिग बॉस के घर में जायेंगे,
वहां   के   घर   के   कामो   में   हाथ   बताएँगे,
मिल के काम करेंगे, बर्तन धोयेंगे, झाड़ू लगायेंगे,
पूजा मिश्रा उनको या वो पूजा को प्रवचन सुनायेंगे,
मानेंगे   बिग   बॉस   का   आदेश ,   नाचेंगे-गायेंगे
साथियों  के  व्यव्हार  पे  रोयेंगे  या  खिल्खिलायेंगे?
पहले कभी कभी आते थे, अब रोज़ टी वी पे आयेंगे
देश की हीं सेवा करेंगे, सबका मनोरंजन कराएँगे.


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अग्निवेश बिग बॉस के घर में

 November 08, 2011     1 comment   

आज स्वामी अग्निवेश बिग बॉस के घर में जा रहे हैं. वह पे टास्क के रूप में बर्तन धोना, झाड़ू लगाना , खाना बनाना सभी कुछ सम्मिलित है. 

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Tuesday, October 11, 2011

अंग्रेजी

 October 11, 2011     jokes, manu srijan, manushrivastav, sms     3 comments   

दूर से देखा तो 'अंग्रेजी' लिखा था.
पास गया तो "सीखे तीस दिन में" भी लिखा हुआ था 
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Monday, September 19, 2011

ड्रैकुला को खून चाहिए, कृपया डोनेट करिये !! - पार्ट 1

 September 19, 2011     BJP, congress, dracula, India, manu, manu shrivastav, manushrivastav, ड्रैकुला को खून चाहिए     7 comments   

भूतो का सरदार ड्रैकुला सरकारी अस्पताल में एक गंदे से बेड पे रुग्ण अवस्था में पड़ा था . खून की कमी के कारण उसका चेहरा पीला पड़ा था. ये वही ड्रैकुला है, जिसका चेहरा एक दम लाल हुआ करता था , लोगो का खून पि पि के. 

अस्पताल में वो अपनी घड़ियाँ गिन रहा था. उसके सारे संगी साथी उसका साथ छोड़ के चले गए थे. अब एक पिलपिले ड्रैकुला के भला कोई डरता है है क्या ? अब इस महंगाई के ज़माने में उसके रिश्तेदारों को अपना जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा था, वो भला ड्रैकुला के लिए ताज़ा खून कहा से इन्तेजाम करते. कमजोरी के वजह से ड्रैकुला चिडचिडा हो गया था. उसके साथी उसके पीठ पिच्छे उसे ड्रैकुला के वजाए, क्रेकुला कहा करते थे.

सरकारी अस्पताल में उसकी देख रेख करने करने वाला कोई भी नहीं था, प्राइवेट में वो इलाज करा नहीं सकता था. उसके रिश्तेदारों ने उसे सम्पति से बेदखल कर दिया था. अब वो महंगा इलाज तो करा नहीं सकता था. वो अपने जीवन की अंतिम घड़ियाँ गिन रहा था. उसके प्राण पखेरू कभी भी उड़ सकते थे. पर वे थे की उड़ ही नहीं रहे थे. 

पर कहते हैं न, जाको राखे साइयां मार सके न कोय. उस अस्पताल में एक बहुत ही दयालु डॉक्टर विजित पे आई.  उसे ड्रैकुला की दयनीय स्थिति नहीं देखी गयी. वो उसके पास उसका जाने लगी की, एक नर्स बोली उसके पास मत जाइये . बहुत ही कमीना मरीज़ है वो, अकेले में नर्सो के गले में दांते गढ़ा देता है. इस अस्पताल की कोई नर्स उसके नजदीक नहीं जाती. 

"तो एक मरीज़ को ऐसे मरने के लिए छोड़ दोगे तुम लोग? लेडिस के बदले जेंट्स नर्स भेजो उसके पास." डॉक्टर गुस्साई. 

"भेजा था . उसको भी दांत काट लिया. पता नहीं कैसा टेस्ट है इसका. औरत मर्द का कोई फर्क ही नहीं है इसके लिए." नर्स बोली. डॉक्टर , नर्स की बातो पे ध्यान दिये बगैर ड्रैकुला के बेड की तरफ बढ चुकी थी.

उसके पास पहुँच के डॉक्टर वाली मुस्कान , जिसे देख  के ही मरीज़ को लगता है की अब मेरी बीमारी ठीक हो जाएगी, के साथ बोली - "हल्लो !  मैं इस अस्पताल की नयी डॉक्टर हूँ. आप अब बिलकुल मत घबडाइये. अब आपके इलाज में कोई कमी नहीं होगी"

ड्रैकुला मन ही मन हंसा " सरकारी अस्पताल में, प्राइवेट अस्पताल वाली डाईलॉक मार रही है".  

डॉक्टर ने पूछा - "आपका नाम क्या है? " 

ड्रैकुला ने सोचा , सीधे सीधे अपना नाम बता दिया तो, ये भी डर के चली जाएगी . मेरा फिर इलाज नहीं हो पायेगा. उसने अपने नेचर के विपरीत , पुरे पेशेंस के साथ डॉक्टर को समझाया की वो ड्रैकुला है. ड्रैकुला का नाम सुन के डॉक्टर ज़रा सी भी नहीं डरी तो, ड्रैकुला को ताज्जुब हुआ .

उसने कारण पूछा तो डॉक्टर बोली - "हम डॉक्टर, को किसी से डरने की क्या जरुरत है. हमारा काम है लोगो की सेवा करना. उसकी जान बचाना. अब वो चाहे इन्सान हो या हैवान . और फिर मैं भारतीय हूँ, और आप हमारे मेहमान हुए. "  

"आपकी बात सुन के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली" - ड्रैकुला बोला - "वैसे मैं जानता हूँ , की आप भारतीय लोग अपने देश में आये किसी की भी बहुत इज्ज़त करते हो, उसकी सेवा सुश्रुवा करते हो. चाहे वो इन्सान हो या हैवान. मैंने कसाब के बारे में बहुत पढ़ा है." 

कसाब को मेहमान जैसी इज्ज़त देने की बात सुन के एक आम भारतीय की तरह डॉक्टर झेंप गयी. वो बात को बदलते हुए पूछी - "वो सब छोडिये. ये बताइए, आप भारत कैसे आये?  और आपकी ये हालत कैसे हो गयी?"

ड्रैकुला बोला - "भारत के पिचास भुखमरी के शिकार हो के भूखो मर रहे थे. भारत, जो आबादी के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, उस देश में पिचासो को पिने के लिए लिए इंसानों का खून नहीं मिल पा रहा हो और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी हो. ये बहुत ही चिंता का विषय था हमारे लिए. तो मैं इसी की जाँच करने आया था."

"तो जाँच के दौरान क्या पाया आपने ?" डॉक्टर ने उत्सुकता से पूछा. उसे ड्रैकुला की बात में एक सच्चाई की झलक मिली थी.

ड्रैकुला बोला - "शुरुवाती जाँच में मुझे ये ही पता चला की यहाँ की वर्तमान गठबंधन सरकार की नीतियों ने जनता का खून चूस रखा है, जिससे  पिचासो को पिने के लिए पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा है. और उनके भूखे मरने की नौबत आ गयी है "

---------------------------------------------------------------------------------------------------------
 क्रमशः .............



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Monday, September 12, 2011

God is bias.

 September 12, 2011     God is bias, manu shrivastav, manu srijan, twitter     2 comments   

Sense of Humor is gift by GOD to me. If you can't understand humor . Its GOD's fault , not of your. God is bias.
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Saturday, September 3, 2011

मुस्कुराना तेरा

 September 03, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, muskurana tera, poem     6 comments   

खिन्न हो मन
या उठ रहा हो
गुस्से का गुबार,

संकोच में घेरा हो
या झेल रहे हों 
कोई संताप,

उदासी का आलम हो
या हो सुखो का 
वनवास,

कर देता है,
आसन,
हर मुश्किलों को,
ये,
"मुस्कुराना तेरा"


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Friday, August 26, 2011

अन्ना जी के तीन...........

 August 26, 2011     anna hazare, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, vyang, अन्ना जी के तीन     2 comments   

गाँधी के तीनो बन्दर, अहिंसा के उनके उपदेश को भूल के आपस में तू तू मैं मैं करने पे उतारू थे. वो जिसने अपने मुंह पे हाथ रख के बुरा नहीं बोलने की कसम खायी थी, वो अपना हाथ हटा के धारा प्रवाह बोले जा रहा था, ठीक वैसे जैसे, हिमालय की चोटियों से निकल के गंगा धारा प्रवाह बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जा मिलाती है. नॉन स्टॉप.
    दूसरा, कुछ गलत नहीं सुनाने वाला भी, कान से हाथ हटा लिया था. पर सुन तो वो अब भी नहीं रहा था किसी का, बस अपनी ही बोले जा रहा था.
     तीसरे वाले ने , अपनी आँखों से हाथ हटा लिया था. उसने कई सालों से कुछ नहीं देखा था. वो अचंभित था - "अरे ! दुनिया इतनी बदल गयी क्या?" वो चुपचाप बैठ के बाकि के दोनों की लड़ाई देखने लगा. शायद, समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर यहाँ चल क्या रहा है.
    चुप रहने वाला बन्दर दुबारा बोलना शुरू करने वाला था की, न सुनाने वाला बन्दर बोला - "तुम चुप रहे हो जी, तुमको बोलने का की क्या पड़ी है?" तो उसने जबाब दिया - "बोलने, मेरा मौलिक अधिकार है. संविधान ने ये दिया है मुझे !" न सुनाने वाला बन्दर बोला - "बोलने का अधिकार तो मुझे भी संविधान ने दिया है. और मैं बोल रहा हूँ की तुम चुप हो जाओ "
     "चुप रहने का तो सवाल ही नहीं उठता. गाँधी जी का कहना मान के इतने साल चुप रहें हम, क्या मिला हमे उनके साथ रह के ? कोई हमे ठीक से जनता भी नहीं. अन्ना जी को देखो, उनके साथ रहने वाले कितने सोलिड हैं. वो ना तो किसी की सुनते हैं, ना किसी को बोलने देते हैं, और हर वक़्त सबको घूरते रहते हैं. वो लेडी को देखो. किसी की सुनती ही नहीं. अगर कोई कुछ बोलने की कोशिश करता है, तो डांट के चुप करा देती है. -'आप एक मिनट चुप रहिये, चुप रहिये ' क्या रुआब है भाई?. उनकी बात सुन के सब चुप हो जाते हैं. हमारी बात सुन के भला कोई चुप होगा? "
    पहले वाले की बात सुन के दूसरा वाला बोला है - "हाँ यार ! सही कहते हो! मैंने तो ता उम्र किसी को नहीं सुना, पर ये लोग तो जम के सुनाते है दूसरो को. बोलते बोलते गला सुखा जाये तो पानी पी पी के सुनाते हैं. हमारी तो कोई सुनाता नहीं. "
   इस्पे तीसरा वाला बोला - "मुझे तो कुछ पता ही नहीं हो क्या रहा है? मैंने तो अभी अभी अपनी आँखे खोली है, पहले देख के कुछ समझ लेने दो फिर कुछ बोलूँगा."          
   पहला वाला निराशा भरे शब्दों में बोला - "हम गांधी जी के तीन बंदरो से कही ज्यादा बेहतर हैं ये अन्ना जी के तीन..........."
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Tuesday, August 16, 2011

जय हिंद , जय करप्शन ;)

 August 16, 2011     2 comments   

तुम मुझे पैसा दो, मैं तुम्हारा काम करूँगा
जय हिंद , जय करप्शन ;)
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Sunday, August 14, 2011

देशभक्ति करने का मौका

 August 14, 2011     bhaiya ji, manu shrivastav, manu srijan, vyang     2 comments   

भईया जी अपनी भैस को दुह के उठे और दूध से आधी भरी बाल्टी को नल के नीचे रख के नल चालू कर दिया . पर उससे पानी नहीं आया, सरकारी था . भईया जी खुन्नस में बडबडाये - "जब सारा दूध बिक जायेगा, तब इसमें पानी आएगा." 

तभी उसना मोबाइल बज उठा - "कोई होता जिसको अपना , हम अपना कह लेते यारों " ये उनका पसंदीदा रिंग टोन था. फ़ोन रिसीव कर के अभी 'हल्लो' भी नहीं कर पाए थे कि उधर से आवाज़ आई - "भईया जी ! मैं तोला राम , तुम्हे बचपन का दोस्त बोल रहा हूँ ."

"हाँ ! तो अब जवानी में फ़ोन करने कि क्या जरुरत आ पड़ी?" भईया जी ने पूछा .

तोलाराम ने समझाते हुये कहा - "अरे भाई ! नाराज़गी छोडो मैंने तुम्हरे फायदे के लिए फ़ोन किया है. " 

"तो बोल्लो ना ! चार भैसे खड़ी रम्भा रही हैं, उनको दुहना है अभी. "

"भईया जी ! मुझे एक स्कूल में पंद्रह अगस्त पे खाना खिलने का टेंडर मिला है. उसके लिए मुझे दूध का आर्डर देना था. अब तुम ही मेरे बाल सखा हो, इसलिए तुमको मैंने फोन किया है. अस्सी लीटर दूध कि जरुरत है, कल सुबह ही गाडी भिजवा दूँगा. "

"तुमने गाडी कब ली, तुम तो फटफटिया पे चलते थे ना?" भईया जी ने पूछा .

तोला राम खिलखिलाते हुये बोले - "सब दया है 'उपरवाले' की , प्रसाद चढ़ाया और फल प्राप्त हुआ और सरकारी कामो में तो खर्चा पाई का मुनाफा हज़ार का भी तो होता है." 

तोला राम की बात सुन के भईया जी दंग रहा गए. पूछने लगे - "अरे ! कुछ हमे भी तो बताओ." 

तोला राम बोले - "फोन से ज्यादा नहीं बता सकता हूँ. आजकल फोन टेपिंग बहुत बढ़ गयी है. कल पांच बजे गाडी तुम्हारे घर पहुँच जाएगी. सब तैयार रखना."

"पर, हमारी सारी भैंसे मिल कर भी चालीस लीटर दूध नहीं देती हैं. हम अस्सी लीटर का इंतजाम कैसे करेगे."

"हद है यार !" - तोला राम भड़क गए - "घर में चाप कल है की नहीं है."

"नहीं, सरकारी नल है और वो भी आज सुखा पड़ा है." - भईया जी उदास होके बोले.

"चलो यार, तुम्हरे लिए पानी भिजवा देता हूँ. पर, इसके पैसे कट जायेंगे ! और सुनो, दूध तीन प्रकार का होना चाहिए. एक, विशेष अतिथि के लिए. दूसरा, शिक्षकों के लिए और बाकि का बच्चो को पिलाने के लिए. तुम भी आ जाना फंक्शन में, गेस्ट का पास मिल जायेगा और तुम्हारा चालीस किलो दूध, अस्सी किलो में खड़े खड़े बिकवा दिया, तो मेरा भी ख्याल रखना. अच्छा अभी फोन रखते हैं, बहुत काम है. जय हिंद! "

भईया जी कुछ कहते, तब तक फ़ोन कट गया था. और 'सों-सों' के आवाज़ के साथ नल में पानी आने लगा था. भईया जी फोन को लुंगी में खोसते हुये बोले - "चलो ! पुरे साल देश को लूटने खसोटने के बाद, एक दिन तो देशभक्ति करने का मौका मिला."

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Friday, August 12, 2011

रक्षा बंधन के त्यौहार की बधाई !

 August 12, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, raksha bandhan     3 comments   

वक़्त कितना बदल गया. जब हम सालों भर लड़ते रहते थे. और हर बार वो मुझे मनाती थी. सिर्फ आज के दिन ही मेरी कोशिश होती की लड़ाई ना हो, पर होती थी और मुझे मनाना होता था . पर अब हम इतनी दूर दूर हैं की ना लड़ सकते हैं, ना मना सकते हैं.  मेरी सारी शुभ कामना तुम्हारे लिए . मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ . हर वक़्त तुम्हारे सपोर्ट में . ये मैंने तुमसे ही सिखा है. रक्षा बंधन के त्यौहार की बधाई ! 
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Tuesday, August 9, 2011

आरक्षण

 August 09, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, reservation     5 comments   

आरक्षण का इजाद तब हुआ था जब देश आज़ाद हुआ था, देश की पिछड़ी जातियों को आगे लाने के लिए उनको आरक्षण दिया गया था. ताकि वे भी आगे आगे आके देश के विकास में सहायक हों. दिन , महीने, साल, और दसक बीत गए पिछड़ी जातियां आज भी पिछड़ी हैं , पर पिछड़ी जातियों पे राजनीती करने वाले कहा के कहा पहुँच गए. सबसे ज्वलंत उदाहरण मायावती है. मायावती इतने आगे आयीं की अपना खुद का मंदिर ही बनवाने पे अमादा हो गयीं.  कालांतर में आरक्षण, वोट बैंक का एक हथियार बन गया, जिसे कोई भी राजनितिक दल नहीं खोना चाहता है.

पर इस आरक्षण के आग में कई अन्य लोग भी झुलस रहे हैं. मसलन कोई सामान्य विद्यार्थी  अस्सी मार्क्स लाके भी नौकरी का हक़दार नहीं है, और कोई साठ मार्क्स लाके भी नौकरी का अधिकारी है.  आरक्षण जाती के नहीं , किसी को भी उसकी माली हैसियत के आधार पे देना चाहिए. जातिगत आधार पे लोगो को लाभ देने का ही दुसपरिणाम है की कई लोग फर्जी जाती प्रमाण पत्र बना के अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं. 

आरक्षण तो होना ही नहीं चाहिए !

कहावत है की, सन १९२३ में जब तुर्की आज़ाद हुआ था तो उसके प्रथम रास्त्रपति,मुस्तफा कमल पासा, ने अपने मंत्रियो से पूछा था की पिछड़ी जातियों को सामान्य जाती के बराबर लाने में कितना वक़्त लगेगा. मंत्रियो ने जबाब दिया - "कम से कम दस साल ". इसपे मुस्तफा कमल पासा ने कहा - "समझ लो वो दस साल आज खत्म हो गया." 

और ये घटना भारत के आज़ाद होने के २४ साल पहले की है.
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Sunday, August 7, 2011

खुदा से फरियाद कर लो .

 August 07, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     4 comments   

दुआओं में ना सही, बददुआओं में याद कर लो,
हो जांयें फ़ना हमे यूँ बर्बाद कर लो ,
नफरत के स्याही से लिख कर के तुम,
तबाही की हमारी, खुदा से फरियाद कर लो . 
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Friday, July 29, 2011

लटों का लहराना

 July 29, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     2 comments   

उन लहराते लटो को,
 जब झटकती हो अपने चेहरे से,
तो सोचती होगी शायद तुम,
 "कम्बख्त, आ जाते हैं,
 बार बार चेहरे के आगे." 
पर लटों को भी,
लहराना अच्छा लगता होगा,
मना करने पे भी कोई बात न माने,
यूँ ही नहीं होता . 
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Thursday, July 28, 2011

भाड़ में जा

 July 28, 2011     bhad me ja, hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem, shayari, sher     1 comment   

साला टेंशन दे frustration 
जाने कौन सा ये  equation 
मेरी तरफ से कर ले mention 
fuck you, fuck off , भाड़ में जा  
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नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है.

 July 28, 2011     hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem, shayari, sher, नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है     No comments   

नशीली आँखों का कमाल बाकी है,
इस साकी का सवाल बाकी है,
बेमानी है मधुशाला में जाना,
नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है.


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आंसू

 July 28, 2011     hindi poem, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem, shayari, sher     1 comment   


भावनाओ को मूक आवाज़ होते हैं,

ख़ुशी और गम दोनों में गालो को भिगोते हैं,

गौर से देखिएगा इन आसुओं को,

हमारे साथ वो भी हंसते रोते हैं .
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Wednesday, July 27, 2011

दिल चाक चाक सा हो जाता है .

 July 27, 2011     dil chak chak sa ho jata hai., hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, poem     4 comments   


खामोश आँखे तेरी,
कहती हैं कितना कुछ,
जब तलक उसकी भाषा,
समझ ना आये.
वे,
खामोश सी लगती हैं,
और जब,
आती है समझ,
भाषा तेरे आँखों की,
बस, उसी पल,
दिल चाक चाक सा हो जाता है .

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तेरी आँखों में डूब जाने को जी करता है .

 July 27, 2011     hasya, manu shrivastav, manu srijan, shayari     2 comments   


तेरी आँखों में डूब जाने को जी करता है .
पर क्या करें ज़ालिम उधर कीचड़ बहुत है .
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Thursday, July 21, 2011

सूरज चाचू.

 July 21, 2011     kavita, manu srijan, manushrivastav, poem     2 comments   

चलते चलते थक गए,
शाम ढली तो रुका गए,
थोडा सा कर लो विश्राम, 
कल से फिर करना काम 
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Wednesday, July 20, 2011

खौफ

 July 20, 2011     jokes, manu srijan, manushrivastav, sms     2 comments   

बे खौफ वही रहते हैं जिनके दिल साफ़ होते हैं ,
खौफ खाने वालो को शायद हार्पिक के बारे में नहीं पता. 
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मैंने आपको फोल्लो किया है,

 July 20, 2011     kavita, manu shrivastav, manu srijan     8 comments   

कोई आपके पीछे भागे,
किसी के पीछे आप.
आप धापी लगी हुई है,
मची है भागम भाग.
कितने सारे ब्लॉग यहाँ पे,
हर ब्लॉग को आके पढ़िए ना,
मैंने आपको फोल्लो किया है,
आप भी मुझको करिए ना. 
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गोविन्द तिवारी को नहीं जानते?

 July 20, 2011     manu shrivastav, manu srijan, vishesh     No comments   

शाम के  बजे अख़बार पढ़ा तो पता लगा की गोविन्द तिवारी कौन है.?
एक दिन में ट्विटर की दुनिया में छा जाने वाला शख्स ! 

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रुसवा

 July 20, 2011     manu shrivastav, manu srijan, shayari, sher     2 comments   

नाम उसका बताने से कोई गुरेज़ नहीं हमें ,
पर सोंचते हैं, एक बेवफा को रुसवा क्यों किया जाये .
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Tuesday, July 12, 2011

दहेज़ कु-प्रथा !

 July 12, 2011     dahej, hasya, kavita, manu srijan, manushrivastav, vyang     8 comments   

तुमसे मैं कुछ कहना चाहता हूँ,
पर डरता हूँ ज़माने से, 
मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
पर डरता हूँ बताने से .
क्या पता कहीं तुम्हारा भाई , पहलवान हो
पीछे पड़ जाये मेरी जान को
वो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगे
और मैं पुकारने लगूँ भगवान को
तुम्हारे पिता जी देखने में ही खूसट लगते हैं,
हर वक़्त मुझे घूरते रहते हैं,
मैं कौन हूँ?  क्या करता हूँ?
हर किसी से पूछते रहते हैं.
तुम्हरी माँ मुझे मुझे बहुत अच्छी लगती है,
कुछ नहीं कहती है,
पर एक कमी उसकी मुझे खलती है,
कहीं नहीं जाती वो , घर में ही रहती है
(तुमसे मिलाने नहीं आ पता हूँ  !)
जब मियां बीवी राज़ी 
तो क्या करेंगे पिताजी , माता जी 
मैंने उन दोनों को समझाया 
और प्यार से बताया 
शादी तो मैं आपकी बेटी से ही करूँगा
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए
टीवी कार फ्रिज तो सही देते हैं
इसके अलावा दो चार लाख रूपया चाहिए 
दहेज़ जैसी कुप्रथा आज भी 
देश में चल रही है,
यही वो कारण है जिससे आज भी
बहुत सी औरतें जल रही हैं.  
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Saturday, July 9, 2011

वन्स मोर !

 July 09, 2011     hasya, jokes, manu shrivastav, once more     7 comments   

कोई बड़ा सेलिब्रेटी अगर पोट्टी कर के भी आये तो उसके फैन्स क्या चिल्लायेंगे ?
 "वन्स मोर ! वन्स मोर !"
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Saturday, June 18, 2011

मुझे जूता लेना है !

 June 18, 2011     bhaiya ji, BJP, congress, jokes, juta, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, politics, shoe     7 comments   

भईया जी, जूते की दुकान पे .- "मुझे जूता लेना है, लेटेस्ट डिजाइन दिखाओ !"
दुकानदार - "पहनने के लिए चाहिए या फेंक के मारने के लिए? "


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Tuesday, June 14, 2011

क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?

 June 14, 2011     aandolan, baba raamdev, bihar, bihari, delhi, facebook, humanity, manu shrivastav, manu srijan     11 comments   

फेसबुक पे एक ग्रुप में चर्चा करते हुए , मेरे मन में एक सवाल आया की क्या मानवता की भी कोई सीमा होता है?
क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है? मानवता को अंग्रेजी में  Humanity कहते हैं.. मुझे ह्युमनीटी इसलिए लिखना पड़ रहा है क्यों की ह्युमनीटी शब्द ज्यादा प्रचलित है. 

दो अलग अलग, मगर एक सामान घटनाओं पे उक्त महिला की मानवता अलग अलग थी. एक पे शुष्क तो दुसरे पे व्यथित. 

पहली घटना थी,दिल्ली में बाबा राम देव के पंडाल में पुलिस द्वारा निर्दोष जनता पे लाठी चार्ज . 
दूसरी घटना थी, बिहार के फारबिसगंज में पुलिस द्वारा निर्दोष जनता पे लाठी चार्ज . 

घटनाये दोनों एक जैसी हैं, पर उन महिला की भावनाएं अलग अलग थी. 

दूसरी घटना को वो अमानवीय करार दे रही थी, पुलिस की अमानवीय करवाई करार दे रही है थी.  तर्क ये था, की पुलिस महिलाओ और बच्चो को बड़े बेहरमी से पिट रही थी, सही तर्क था. इतनी बेरहमी से तो यहाँ जानवरों को भी नहीं पीटने का कानून है यहाँ. 

मगर पहली घटना पर उनके विचार थे की दिल्ली के रामलीला मैदान का आन्दोलन ढोंग था. 

सवाल ढोंग का नहीं है, सवाल है, यहाँ भी पुलिस के अमानवीय व्यव्हार का. यहाँ पे भी पुलिस ने लोगो को जानवरों सा पिटा, कई घायल हुए, कइयो की हालत इतनी नाजुक थी की उनको आई सी यु  में भर्ती किया गया . इक्यावन बर्सिया राज बाला  की हालत, आज दस दिन बाद भी नाजुक है. वो कोमा में हैं. इस घटना से उन महिला को कोई सहानुभूति नहीं थी.

ये कैसी मानवता है? जो क्षेत्रवादी है. शर्म आती है ऐसी मानवता पे . 


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बाबा का अनशन टुटा !

 June 14, 2011     baba ka anshan tuta, baba raamdev, bhrastachar, BJP, congress, corruptions, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

अपनी मांगे नहीं माने जाने तक अनशन की उदघोषणा करने वाले बाबा राम देव ने मात्र नौ दिन में ही अपना अनशन तोड़ दिया. बड़े ताज्जुब की बात है. अपनी आखिरी साँस तक लड़ने का दावा करने वाले बाबा. दो दो बार मौत के भय से अपने कदम पीछे कर लिए. 

अब ये बताने की कतई जरुरत नहीं है की पहली बार वे पुलिस के डंडे से चोट खाने के डर से बचने के लिए औरत के वेश धारण कर के भागे थे. अब अब उनकी भूख ने उनको मात दे दिया. फ्रंट फुट में सरकार को ललकारने की घोषणा करने वाले बाबा, अब खुद ही बैक फुट पे होते जा रहे हैं. 

आपकी तुलना भले अन्ना हजारे के साथ की जा रही हो. पर अन्ना के तुलना करने में आप कही भी खड़े नहीं होते हैं. अन्ना के पास दंभ नहीं है. ये बहुत ही बड़ी बात है. ऐसा नहीं है की आपको मांगे जायज़ नहीं है. पर आपके मांगो की लम्बी लिस्ट में कई सारी असंवैधानिक मांगे भी हैं. 

कानून बनाना आसान नहीं है और वैसे भी भारतीय संविधान इतना लचीला है की कानून के जान कार उसे तोड़मरोड़ कर अपनी मतलब की चीज़े निकाल लेते हैं. ऐसे ही भारतीय संविधान को वकीलों का स्वर्ग नहीं कहा जाता है.
हम आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं. आप लम्बे समय तक हमे योग सिखाते रहें.
जिसका काम उसी को साज़े  अब इस तरह आपको ढोंगी बाबा बनाने की क्या जरुरत है, आप योगी बाबा ही अच्छे थे . 
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Sunday, June 12, 2011

भूखी जनता की चीत्कार

 June 12, 2011     anna hazare, baba raamdev, bhrastachar, bhukhi janta ki chitkar, BJP, congress, corruptions, hindi poem, manu shrivastav, manu srijan, poem, sarkar     1 comment   

ओ सत्ता के भूखों सुन लो, भूखी जनता की चीत्कार 
हमारा   मुद्दा   रोटी   है,   तुम्हारा   मुद्दा   भ्रष्टाचार .

प्रजातंत्र   बेचारी    की   ये   साड़ी  जो  तुम  खिंच  रहे  हो.
कितना खून निचोड़ोगे और देश के निचुड़े गुर्दे भींच रहे हो.
सुख  चुके  आँखों  के  आंसू  , बहते  थे  जो  बन  के  धार,
हमारा     मुद्दा     रोटी    है,     तुम्हारा    मुद्दा     भ्रष्टाचार .

राजनीती के चौपड़  पे तुम ये जो दाँव आपस में  खेल रहे हो,
क्या   बिगाड़ा   हमने   जो   तुम,   बारी   बारी   पेल   रहे  हो?
आरोपों  प्रत्यारोपों  का  जो  कर   रहे   हो    वार  पे  वार,
हमारा   मुद्दा    रोटी    है,    तुम्हारा     मुद्दा      भ्रष्टाचार .

सुख चूका आँखों का पानी,  गंगा जमुना के औलादों के,
नंग  धडंग  तांडव  कर  रहे ,  अब ये  वंशज  हैं  जल्लादों के 
गोरे काले धन के पीछे, क्यों छीन रहे सुखी रोटी अचार,
हमारा   मुद्दा    रोटी    है,    तुम्हारा     मुद्दा      भ्रष्टाचार

हम त्रस्त हैं, तुम भ्रष्ट हो, हम पस्त हैं, तुम मस्त हो,
हम लुट गए, तुम लूट गए , क्यों कोई तुमको कष्ट हो?
बस जान लो ए ज़ालिम बस बहुत हुआ ये अत्याचार,
हमारा   मुद्दा    रोटी    है,    तुम्हारा     मुद्दा   भ्रष्टाचार

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गर्ल फ्रेंड का अंतिम संस्कार !

 June 12, 2011     jokes, manu shrivastav, manu srijan, sms     1 comment   


गर्ल फ्रेंड का अंतिम संस्कार कर के लड़का अभी घर पे पहुँचा था की अचानक बिजली चमकी, तूफान आया और बादल गरजने लगे .

लड़का हँस के बोला-  लगता है, पहुँच  गयी 
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Thursday, June 9, 2011

एम एफ हुसैन नहीं रहे !

 June 09, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, MF husain nahi rahe     No comments   

एम एफ हुसैन एक बड़े आर्टिस्ट थे. पर जिस तरह का अपमान वे हिन्दू देवी देवताओ का करते रहे, जो असहनीय था ये उनकी सड़ी हुई मानसिक सोच थी.  और उनके इसी कुकृत्य के लिए देश से निर्वासन का जीवन व्यतीत करना पड़ रहा था. जो बहुत सही था. उनकी अंतर रास्ट्रीय लोकप्रियता को देखते हुए,भले ही  ये कुटनीतिक बयान   दिया जा रहा हो, की वे एक अच्छे कलाकार थे. पर कलाकार किसी के भावनाओ को आहात नहीं करता है. सामाजिक रूप से कोई भी उनको महान कहता फिरे , पर वो एक सड़ी गली सोच के वाहक थे, और सोच से ही आदमी का चरित्र प्रतिबिंबित होता है .

प्रधान मंत्री का बयान निः संदेह हास्यास्पद है, की इससे रास्ट्र को क्षति हुई है. जो व्यक्ति भारतीय कानून से बचने के लिए किसी और मुल्क में जा छिपा हो, जो देश का नागरिक हो ही नहीं, उसके मरने से किस तरह की रास्ट्रीय क्षति  हुई?

परन्तु,  इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है. उनकी मौत से कला जगत को बहुत ही  क्षति  हुई है

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Wednesday, June 8, 2011

मिस इंडिया लागअ तारु ए गोरी !

 June 08, 2011     bhojpuri, manu shrivastav, manu srijan, miss india laga taru aye gori, video     No comments   






Miss India Laga taru aye gori

Singer - Ludu Diwana

Lyrics - Manu Shrivastav











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अब ढोंगी बाबा हो गए !!!

 June 08, 2011     aalekh, baba raamdev, congress, manu shrivastav, manu srijan, RSS, yogi baba ab dhongi baba ho gaye hain     9 comments   

बाबा की मानसिक स्थिति ख़राब हो चुकी है.
जो आदमी कुछ दिन पहले देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का झूठा सपना देश को दिखा रहा था.
अब वही आदमी देश में अपनी सेना के निर्माण की बात कर रहा है, ये तो 'हिटलर' की तरह खुद के महत्वा कांक्षा को पूरा करने जैसा है. 
योगी बाबा अब ढोंगी बाबा हो गए हैं ! 
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Tuesday, June 7, 2011

...एहिसे भैंस कहाली.

 June 07, 2011     ahise bhais kahali, bhojpuri, geet, manu shrivastav, manu srijan, हास्य     1 comment   

बहिना हई गईया के हो बैला के हई साली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

घास खाए हरिहर आ दूध देवे उजर,
सरसों के तेल नियन सु सु करे पियर,
दूध, दही, धी, माथा मिली, भैंस के ल तू पाली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

झुमत चलेले आपन पूंछ हिलावत,
पीछे से टप टप  गोबर गिरावट.
जोखे खातिर तहरा के सिंघ पर उठाली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली.  

भईस पे बैठी के  मिले जहाज के माज़ा,
देले   पटक   त   हो   जाला   हो   साजा, 
भईस जब चहेटे त लोग खुबे बजावे तली,
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 

बिच सड़क पे बैठी खुबे पागुर करेले,
कतनो हटाई नहीं रहिया से हटेले,
पड़े न असर कतनो, चाहे बिन बजालीं 
पांकी में खुबे  नहाली , एहिसे भैंस कहाली. 






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ये कैसा सत्याग्रह था ?

 June 07, 2011     aalekh, baba raamdev, congress, corruptions, India, manu shrivastav, manu srijan, ye kaisa satyaagrah tha, yof     No comments   


शब्दों का जाल ऐसा होता है की आप अपने तर्क से सूरज को भी पश्चिम से उगा सकते हैं.

बाबा रामदेव के उस शिविर को सत्याग्रह की संज्ञा दी जा रही है तो सरकार के उस  कुकृत्य को जलियांवाला बाग़ की . 

सरकार को देश चलाना है, अब हर दिन कोई अनशन पे बैठ जाये और सरकार को झुकाए, ये तो सरासर गलत है.

माना की बाबा रामदेव ने मुद्दा सही उठाया था. पर तरीका तो सरासर गलत ही था. एक तरफ आप कहते हो इस आन्दोलन में ५००० लोग आयेंगे , दूसरी ताराग आपने इतना ताम झाम लगा रखा था की लाखो लोगो के आने पे भी सबको बैठने की, जल-मल की सुविधा मुहैया करा रखी थी.

जब आप सत्याग्रह ही कर रहे थे, तो पुलिस के बच के भागने की क्या जरुरत थी, क्या आपके मन में एक बार भी ये ख्याल नहीं आया, की जो लोग आपके बुलावे पे पता नहीं कहाँ कहाँ से चल के आये हैं. उनके साथ क्या होगा?

ये तो सरासर गैर जिम्मेदारी है आपकी की आपने अपने समर्थको को बिच में ही छोड़ के चुपचाप खिसक लिया.
आप सत्याग्रह कर रहे थे, तो आपको अपनी गिरफ्तारी देनी थी. नहीं की भाग निकलना था,  बाद में बयान देने के लिए की अपनी जान बचाने के लिए मैं भागा. 

आप सत्याग्रह चलाने की बात कर रहे हैं, आपको अपनी जान प्यारी थी, पर क्या उन लोगो के जान की कोई कीमत नहीं थी, जिनको  छोड़ के आप भाग गए थे.

और पुलिस आपको गिरफ्तार करती तो आपका कद और भी ऊँचा ही होता, आपके सत्याग्रह को और ताकत मिलती.

  सरकार से अपने मुद्दे मनवाने के लिए ही आन्दोलन था आपका और आप कह भी रहे थे की  सरकार ने आपकी ९९ प्रतिशत बात मान ली है. तो ऐसा था तो आपने अपना आन्दोलन रोका क्यों नहीं. इससे तो यही लगता है की आप अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते थे,  अपने योग भक्तो की आड़ में .

आप भले इसे सत्याग्रह कह लें, पर ये सत्याग्रह कही से भी नहीं था.

बाबा के असली मनसा के बारे में जानने के लिए पढ़े .डॉक्टर दुष्यंत जी का लेख
राम देव अन्ना नहीं हैं, और ना ही अब बाबा हैं


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Monday, June 6, 2011

लडल कब छोडिहन सन !

 June 06, 2011     bhojpuri, hasya, jokes, kutta, ladal kab chhodihan san, manu shrivastav, manu srijan, neta, sms     No comments   

दू गो जवान कुकुर के आपस में कुकुरहट करत देख के , बुजुर्ग कुकुरन के अपना नया पीढ़ी पे बहुत दुःख के साथ कहे के पडल - "इ ससुरा सन , नेतवन नियन लडल कब छोडिहन सन"
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Sunday, June 5, 2011

राम (देव) लीला !!!

 June 05, 2011     aalekh, bhartiya janta party, congress, corruptions, manu srijan, ramdev lila     14 comments   

पहले मैं बता दूँ की , यहाँ प्रयुक्त "लीला" शब्द . संज्ञा, नहीं क्रिया है . बाबा राम देव की  लीला.
बाबा राम देव को कौन नहीं जानता! भाई ! पूछ नहीं रहा हूँ, बता रहा हूँ की कौन नहीं जानता बाबा राम देव को ! जो नहीं जानते हैं, तो भैया जान लो . नहीं तो बाबा ने अगर ठान लिया तो , शीर्षासन करा के ही मानेंगे, जैसा की अभी केंद्र सरकार को करा रहे हैं. 

बाबा राम देव ने मुद्दा तो एकदम  सही उठाया है. मैं समर्थन  करता हूँ  की विदेशी बैंक से काले धन की वापसी होनी चाहिए. ये पैसा वापस आये तो तो देश की तरक्की के कामो में प्रयोग होगा.

 काले धन के वापसी के इस आन्दोलन पे कुछ लोग ऐसे तुनके मानो किसी ने उनके पूंछ में पैर रख दिया हो. किंग खान तो बोल दिए की वो बाबा के इस आन्दोलन का समर्थन नहीं करते हैं. सही है भाई, जो काम करने का मन न करे उसे करना ही नहीं चाहिए. 

वैसे भी ये हिंदुस्तान है, चीन थोड़े न है. यहाँ कुछ भी कह सकते हो, कर सकते हो, संविधान में लिखा है. यहाँ, हिंदुस्तान में जहा एक किताब की दुकान पे जहाँ एक तरफ तुलसी दास द्वारा रचित ग्रन्थ "राम चरित मानस" बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से बेचीं और खरीदी जाती है, तो उसी दुकान में दूसरी  तरफ विश्वनाथ द्वारा लिखी हुई किताब "हिन्दू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदास " भी बड़े चाव और शौख से बेचीं और खरीदी जाती है. 

अब सवाल ये है की सारा देश बाबा राम देव को समर्थन दे रहा है. इस भ्रष्टाचार विरोधी और देश का पैसा , देश में वापस लेन की मुहीम में तो, किंग खान को उन्हें समर्थन न देने की वजह क्या है? मेरे मन में ख्याल आ रहा था की कही ऐसा तो नहीं की किंग खान का पैसा भी बाहर में जमा हो. पर मैंने वो ख्याल आने नहीं दिया.

बाबा राम देव भी, योग करते-कराते, बोर हो गए थे. सोच रहे होंगे, योग तो जन जन तक पहुचने वाला है. उसके बाद क्या? उसके बाद योगा से क्या होगा? अभी यही सोच रहे थे की  अन्ना हजारे के आन्दोलन और उसकी आपार सफलता से  आइडिया क्लीक किया होगा - "आहा ! आइडिया !" 

अचानक  से कोई सूझ(आइडिया) दीमाग में आने के लिए , मनोविज्ञान में 'सूझ का सिद्धांत' दिया गया है.

अन्ना हजारे के पास साधन नहीं था . बाबा राम देव के पास साधन है , जिसका जम के प्रयोग किया है. टेंट लगवाए, लाउड स्पीकर लगवाए, पानी पिने, नहाने सब का प्रबंध किया है. सही है.

तैयारी देख के सरकार भी बैक फुट पे थी. दूध से जला , भला छाछ भी फूंक के ना पिए? यहाँ तो पूरा समंदर उफान मार रहा था. 

ज्यादातर, मंत्रीयों मान मनौवल होता है. "मंत्री जी, हमरा कामवा करवा दीजिये ना !" परन्तु यहाँ मंत्री जी योगी बाबा को मनाने में लगे थे. आम आदमी को ये दृश्य देख के कलेजे में ठंडक नहीं पहुची हो तो, वो आम आदमी नहीं है.

सरकार तो कई मांगे मांग चुकी थी. कुछ पे विचार करने का प्रस्ताव था. पर बाबा जी को तो पूरा माँगा मनवाना था. वे योग नहीं हठ योग पे जो थे. 

एक बात बताइए ! क़त्ल की सजा फाँसी मिलाने पर भी कैदी , अभी तक महामहिम से क्षमा याचना के फेर में पड़ा हुआ, ये सपने देख रहा हो की उसे माफ़ी मिल जाएगी. औरतो का बलात्कार कर के, उनकी इज्ज़त और सामाजिक जीवन की हत्या करने के बाद भी , लोग खुल्ले आम घुमाते हैं. देश के बाहर से आतंकवादी आके, देश में लोगो को मौत के घाट उतरते हैं. और उनकी फाँसी की सजा महामहिम में पास पेंडिंग पड़ी हुई है, और आप हर भ्रस्टाचारी को फाँसी की सजा दिलाने की बात कर रहे हैं .

अब हर भ्रष्टाचारी को फाँसी होने लगी तो , हर साल सैकड़ो लोगो को फाँसी की सजा सुनाई जाने लगेगी. और सबकी की क्षमा याचना महामहिम के पास जायेगी. अभी तक ३५ -४० याचिकाओ पे सुनवाई नहीं हुई है. आप तो, महामहिम पे और वर्क प्रेशर डालना चाहते हो !

अब सरकार कुछ मुद्दों के लिए समय मांग रही थी तो देना चाहिए था. हर सरकार की अपनी मजबूरियां होती हैं.सरकार की हालत तो आप खुद ही देख रहे हैं. अभी लोकपाल वाली घंटी ठीक से बंधी नहीं थी की एक और घंटी  गले में बंधने के लिए तैयार देख के तिलमिलाना स्वाभाविक है.  उपर से बाबा ने पुरे ताम झाम और लाव लश्कर के साथ सत्याग्रह शुरू किया था. जले पे नमक. बाबा के आन्दोलन को मिलती लोकप्रियता और समर्थन देख के  सरकार के सरे कश बल ढीले हो गए.  हकबकाई सरकार ने कदम उठा लिया , एक  गलत कदम.

इस तरह से उसने अपना ही पैर कुल्हाड़ी पे दे मारा. पर क्या लगता है? की सरकार में बैठे लोग इतने नासमझ हैं? इसमें जरुर कोई दूसरा पेंच है.

भाइयों ! इतने स्ट्रेस और टेंशन के बाद आइये , थोडा खुश हो लिया जाये. विपक्षी दलों के साथ.

बाबा रामदेब द्वारा जलाई गयी इस आन्दोलन के आंच में अगर कोई रोटियां सेंक रही है , तो वो है विपक्षी दल. भ्रस्थाचार और आंतरिक कलह से आकंठ डूबी विपक्ष, सरकार को इस मुद्दे पे इतनी ख़ुशी ख़ुशी घेरने में लगी है. मानो अंधे के हाथ बटेर लग गयी है.

सबसे सही स्तिथि तो हमारी है. हम आम लोगो की. हमारी स्तिथि में कोई फर्क नहीं पड़ा है. आन्दोलन के पहले जो स्तिथि थी , वही अब भी है. बस संतोष इतना ही की कोई तो है, जो हमारे लिए बोल रहा है.

खैर, आरोप- प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, आगे आगे देखिये होता है क्या !!





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Saturday, May 28, 2011

अंडात्मा का रुदन !

 May 28, 2011     andatma ka rudan, hasya, hindi poem, kavita, manu shrivastav, manu srijan     3 comments   

अपना सर्वस्व लुटा कर,
उनकी जरुरत को पूरा करते ही आयें हैं हम,
सदियों से, पीढ़ी दर पीढ़ी |
परमार्थ हित में,
अपने जीवन की,
आहुति देने के लिए हीं,
वजूद में आता है,
अस्तित्व हमारा |

एक वीर की तरह,
हँसते हँसते,
बलि की वेदी पे चढ़ जाना,
फितरत है हमारी |

हाँ ! बलि की वेदी पे चढ़ जाना, 
फितरत है हमारी |
ये जानते हुए भी,
आहुति देने के लिए हीं,
जीवन मिला है हमे,
कोई विरला ही,
बार बार,
जन्म लेना चाहेगा|

एक एक करके,
जान न्योछावर कर दी,
मेरे सरे दोस्तों ने,
सगे सम्बन्धियों ने,

पर क्या?
मेरी किस्मत में शहीद कहलाना नहीं बदा हैं?
आठ पहर हो गए,
उसने मेरी शकल तक नहीं देखी|
कोई ऐसे करता है क्या?
तिरस्कार,
एक उबले हुए अंडे का !


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काँच और दिल टूटने में फर्क !

 May 28, 2011     kanch aur dil tutane me fark. poem, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

छन्न से टूट के बिखर गया, ग्लास काँच का,
कई टुकड़ो में ,
कुछ बड़े , कुछ छोटे, कुछ महीन,
जरुरी हो गया उन्हें,
उठा के कूड़े में फेंकना,
क्या पता?
चुभ न जाये किसी के पैरो में !

चुन चुन के उठा लिया,
हर बड़े  छोटे टुकडे को,
पर महीन टुकडे अभी बाकि हैं उठाने,
धीरे धीरे सावधानी पूर्वक उठाने लगा था मैं,
सतर्क होने के बावजूद भी चुभ ही गया, कमबख्त,
चुभन का दर्द रेंग गया उंगली के छोर तक.

फेंकते हुए काँच को ख्याल आया एक बार,
"एक टुटा तो क्या हुआ ? 
अभी पूरा 'सेट' तो सुरक्षित है| "

काँच और दिल टूटने में सिर्फ इतना फर्क है "मनु",
"दिल का कोई सेट नहीं होता !"
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वो कहते हैं,

 May 28, 2011     manu shrivastav, manu srijan, poem, wo kahate hain     No comments   


कौन कहता है की दिल मोहब्बत में टूटता है,
अजी !!!!!!!!
दिल दोस्ती में टूटते हैं .
हम समझाते हैं की हम मोहब्बत कर रहे हैं,
वो कहते हैं,
अजी !!!!!!!
हम तो दोस्त थे !
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Friday, May 27, 2011

लड़की और बेसन का हलवा !

 May 27, 2011     hasya, ladki aur besan ka halwa, manu shrivastav, manu srijan     4 comments   

आज मुझे एक गजब का ज्ञान प्राप्त हुआ ! आत्म ज्ञान ! वो भी बेसन का हलवा बनांते हुए |

अगर  पच्चीस ग्राम बेसन लेके फ्राई करते हैं तो वो फ्राई होने के बाद पचास ग्राम का लगने लगता है | और जब उसमे पानी डाल के फ़ाइनल टच देने लगो तो वो सौ ग्राम का हो जाता है |

लडकियां !  लड़कियों से कुछ बोलो तो, वो उसका आधा सुनती हैं, और आधे का आधा समझती हैं. पर बोलती दुगुने से जादा हैं |

हे प्रभु ! कितना अंतर है, बेसन के हलवे और लड़कियों में !



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Thursday, May 26, 2011

ग्लूकोज़ की चाय !

 May 26, 2011     manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, twitter     No comments   


अभी रात के 12.48 हो रहे हैं , चाय पिने की इच्छा हुई | पर चीनी ही ख़तम हो गयी है |

अरे ! ग्लूकोज़ का डब्बा दिख तो रहा है उधर !




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Wednesday, May 25, 2011

I want !

 May 25, 2011     manu shrivastav, manu srijan, twitter     No comments   

I want date you,
but, Ican't date you !

I want hate you,
but, I can't hate you !
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Monday, May 23, 2011

शराब और फेसबुक !

 May 23, 2011     aalekh, facebook, manu shrivastav, sharab     No comments   



वक़्त बदलता है , लोग बदलते हैं, और साथ में बदल जाते हैं लोगो के शौक. शराब के साथ शबाब की कहानियां तो बहुत सुनी और पढ़ी हैं. पर इनमे जो सामान्य बात है वो हैं लत की . शराब की लत लगे जाये तो छुडाये नहीं छूटती हैं, वही लत लग रही है सोसल नेट्वोर्किंग का , और कई पुरानी बातें नया आकर ले रही हैं,
वो ये की
शराब और फेसबुक !





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Thursday, May 19, 2011

ह्रदय विहीन हूँ मैं !

 May 19, 2011     hindi poem, hriday vihin hu main, manoranjan shrivastav, manu shrivastav     No comments   

जब तुम चली गयी तो अहसास हुआ,
कि कितना हृदय विहीन हूँ मैं,
सारे दिन के मेहनत के बाद तुमसे,
ये नहीं पूछा कि थक गई होगी,
लाओ तुम्हारी कुछ मदद कर दूँ !
उलटे तुमको कुछ और काम दे दिया,
तुमने कुछ नहीं कहा,
पर तुम्हारे दिल में ये वेदना तो हुई ही होगी,

सोचा तो होगा ही तुमने कि कितना हृदय विहीन हो तुम,
पर तुमने कहा कुछ नहीं
बस चुप रही !
तुम्हारी चुप्पी को मैंने हाँ समझा,
पर नहीं समझा, तो उसके अन्दर कि वेदना,
समझता भी कैसे,
कितना ह्रदय विहीन हो गया हूँ मैं !
 
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Sunday, May 15, 2011

वो कैसे जियेंगे ??

 May 15, 2011     bhaiya ji, BJP, congress, country, dush ka ubaal, mahangai, manu shrivastav, manu srijan, maulavi, petrol, sardar, vyang, wo kaise jiyenge     4 comments   

सरदार अमरीक सिंह तमतमाए चले आ रहे थे | इसमें उनका कोई दोष नहीं था, बाहर धुप ही इतनी कड़ी थी, की किसी का भी चेहरा तमतमा सकता था | 

मौलवी साब, मुँह से पान का जूस थूकने के बाद, नए पान को मुँह में समर्पित करते हुए बोले - "अमां अमरीक, भरी  दुपहरी में बिना छाते के बाहर घूम रहे हो, आईने में शकल देखो अपनी, बजरंगबली के जैसे चेहरा लाल हो रखा है तुम्हारा |"

इंसानों ने इतने पेड़ काटे हैं की सरदार जी जहाँ से आ रहे थे, रस्ते में एक भी पेड़ नहीं था | कड़ी धुप में से जलते फूंकते चले आ रहे सरदार जी को मौलवी साब का मजाक पसंद नहीं आया, वे भभक पड़े - "इन मौसम विभाग वालो को नौकरी पे किसने रखा, सुबह भविष्यवाणी की थी , की आज बारिस होगी | मैंने बारिस का मज़ा लेने केलिए छाता नहीं लिया |"

सरदार जी को भड़कते देख मौलवी साब चुप हो गए| ठीक वैसे, जैसे स्पेक्ट्रम घोटाले पे मनमोहन सिंह चुप हो जाते हैं |

भईया जी अपनी भैस दुह रहे थे, उनके पास इतनी भैंसे थी, की जब तक की सारी भैसों को दुह के निश्चिन्त होते थे, तब तक पहली भैंस को दुहने की बारी आ जाती थी | भैस दुहते हुए बोले - "अमरीक सिंह ! भैस का ताज़ा ताज़ा दूध पिओगे , मन तरोताजा हो जायेगा |"

सरदार जी - "दूध का नाम भी मत लो! आज से २ रूपया और महंगा हो गया है.|  देश की जनता क्या खाएगी,  क्या एल आई सी कराएगी? "

मौलाना साब बोले - "अरे भाई जान ! पेट्रोल भी ५ रूपया महंगा हो गया है आज से |"

सरदार जी - "धत तेरे की !"

भईया जी - "तुम क्यों अपना पैर पटक रहे हो अमरीक? तुम्हारे पास कोई गाडी घोडा तो है नहीं!"

सरदार जी - "मेरे पास लाइटर तो है ना !"

मौलवी साब - "सरकार इतना महंगाई बढ़ा रही है और देश वाले उसे सहन कर ले रहे हैं | तो विपक्ष वाले बेकार में ही हल्ला करते है, की देश में गरीबी है , लोग भूखो मर रहे हैं | "

सरदार जी - "लोग कैसे जियेंगे इतनी महंगाई में?"

भईया जी - "हम लोग तो चलो दूध नहीं कुछ और खा कर भी जी लेंगे | पर उन वाहनों का क्या होगा , जो पेट्रोल के अलावा कुछ और खाती-पीती ही नहीं हैं !!!"


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Friday, May 13, 2011

आज इतनी सुबह कैसे ?

 May 13, 2011     diary, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan     1 comment   

सुबह की हवा कितनी ताज़गी देती है इसका अहसास तभी होता है जब ताज़ी हवा के झोके चेहरे पे आ लगते हैं | मन कितना आनंदित होता है, अपने बालकोनी में सुबह की ताज़ी हवा का आनद लेते हुए मन में कुछ ऐसे ही ख्यालात उमड़ रहे थे | 

हल्का अँधेरा जो की जा चूका था, सूरज कहीं  दिखाई तो नहीं दे रहा था, पर चारो तरफ उजाले का साम्राज्य कायम हो चूका था |  चिडियों की चुन चुन बड़े ही मनोहारी लग रहे थे | फिर लगा ऐसे की अभी बगल से कोई कंधे पे हल रखे , अपने बैल के गले की घंटी टुनटुनाते हुए निचे से गुजरेगा | पर कोई नहीं गुजरा | ध्यान आया मैं गाव में नहीं शहर में हूँ  | पर शायद  ख्यालों को नहीं पता थी ये बात |  

सर उपर उठा के देखा तो बादल भागे जा रहे थे, शहर के बादल भी भागमभाग के आदि हो चुके थे | उन्हें भी शायद अपने ऑफिस समय पे पहुचना था | उन्हें भी डर था की अगर टाइम पे नहीं पहुँचे तो एक या दो मिनट की देरी से ही हाफ डे न लग जाये | 

बादल भी कई तरह के थे, काले, सफ़ेद भूरे, पूरब की तरफ के बादल तो लाल लाल अंगारे जैसे लग रहे थे | जैसे लोहे को भट्ठी में तपाया गया हो |  मैं उन्हें देख के सोच में पड़ गया की ये गुस्से में लाल हैं या शर्म से लाल हो रहे हैं| तभी उनके पीछे से सूरज ने झाँका | अब जाके बादलों के लालिमा का कारण समझ में आया | वे सूरज की किरणों की वजह से लाल दिखाई दे रहे थे | 

खैर, अगर आप ये पूछोगे की देर सुबह तक जगने वाला आज इतनी सुबह कैसे जग गया ? तो मैं यही कहूँगा की आज मैं देर तक जाग रहा  हूँ !


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लुका छिपी !!

 May 13, 2011     bhaiya ji, India, luka chhipi, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, pakistan, vyang     2 comments   

सरदार अमरीक सिंह भन्नाये हुये आये और धम्म से खटिया पैर बैठ गए | बेचारी खटिया चर्र्रर्र्रर्र्र कर के चुप हो गयी, और कर ही क्या सकती है, बेचारी निरीह, भारतीय जनमानस की तरह |

भईया जी अपने परम मित्र की ये हालत देख के भैस दुहना छोड़ के उनके पास आये, और अपनी आवाज़ में मिश्री घोल ठीक वैसे ही बोले जैसे, सरकारी दफ्तरों में बाबु लोग, किसी से अपनी जेब गरम होने की उम्मीद में बोलते हैं, - "क्या हुआ, अमरीक, अमेरिका की तरह क्यों भन्नाये हुये हो?"

अमरीक सिंह - "आज दफ्तर में लुका छिपी खेल का आयोजन हुआ था | मैं कही भी जाके छुपता था, लोग आके पकड़ लेते थे | क्या, कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ कोई आराम से छुपे और पकड़ा ना जाये  ?"

भईया जी - "पाकिस्तान चले जाओ ! "


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दूध का उबाल !

 May 13, 2011     bhaiya ji, dush ka ubaal, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

 सरदार अमरीक सिंह अखबार पढ़ रहे थे और अपनी एक्सपर्ट राय भी देते जा रहे थे |  

अमरीक सिंह - "लादेन का तो लालटेन बुझ गया | पर उसके नाम पे इंडिया में भी राजनीती गरम हो रही है | विपक्षी  नेता लोग सरकार को जोश जोश में  हूल दे रहे हैं की इंडिया भी चाहे तो पाकिस्तान में छिपे इंडिया के मोस्ट वांटेड मुजरिमों को को पकड़ने में अमेरिका की तरह सक्षम है |"

भईया जी -  "चिंता मत  करो | विपक्ष का जोश, दूध का उबाल है, जल्दी ही ठंडा हो जायेगा |  "



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Saturday, May 7, 2011

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी !

 May 07, 2011     aalekh, manu shrivastav, manu srijan, mothers day     No comments   


सोने की लंका को जीतने के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी अपने छोटे भाई लक्ष्मण से कहा था
"अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी"
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Thursday, May 5, 2011

भईया जी !!

 May 05, 2011     bhaiya ji, bhartiya bhasha., bhojpuri, fanishwar nath renu, hindi poem, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

मेरे गाँव में एक भईया जी है. हैं बड़े जिंदादिल और कटु सत्य वाचक. उनके कटाक्ष बड़े जान लेवा होते हैं. खैर, जब तक कोई उनके पल्ले न पड़े , अहसास नहीं कर सकता है इन सब बातो का.

अबकी जब मैं गाँव गया तो , भईया जी से मिलने चला गया. परनामा-पाती के बाद सब हाल चाल होने लगा. भईया जी पूछे लिए  - "अरे ! मनुआ , तुम्हारा लिखाई-पढाई कैसा चल रहा है ? "

मैं -"भईया जी ! अब मैं नोकरी करता हूँ . लिखाई-पढाई तो कब का ख़तम हो गया है."

भईया जी - "ससुरे ! दिली जाके खुद को वायसराय समझाने लगे हो का? उ जो कहानी कविता लिखते हो , उसके बारे में पूछ रहा हूँ " 

मैं - "भईया जी ! वो सब तो शौखिया है, चलता रहता है."

भईया जी - "त का हुआ? 'लाला' लोग तो  बहुते शौखिन होता है. थोडा उसी में अच्छा से लिखो. "

मैंने बहाना बनाने के गरज से बोला -" हाँ  भईया जी !  सही कह रहे हैं आप. मैं अब थोडा थोडा उर्दू के शब्द भी सिख रहा हूँ , ताकि उसे लिखने के समय उपयोग कर सकूँ. किन्तु , जब लिखने बैठता हूँ तो वो सारे शब्द दीमाग में आते ही नहीं हैं. "

भईया जी - "यार ! तुम कैसी बात कर रहे हो. तुमको हिंदी आता है?"

"हूँ "

"इंग्लिश आता है ?"

"हूँ "

"भोजपुरी आता है?"

"हूँ "

"हिंदी बोलते हो, तो इंग्लिश प्रयोग करते हो?"

"हूँ "

"तो हिंदी लिखते हुए भोजपुरी क्यों नहीं प्रयोग करते हो! "

"हूँ " . मैं हडबडा के बोला - "ये कैसी बात कर रहे हैं आप.?"

भईया जी - "तुमने फणीश्वर नाथ 'रेनू ' की कहानी पढ़ी है की नहीं पढ़ी है? उनको आंचलिक कथाकार इसलिए ही तो कहते हैं. क्यों की उन्होंने हिंदी में भारतीय भाषा का प्रयोग किया, वे कर सकते हैं तो तुम क्यों नहीं कर सकते हो." 


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Tuesday, May 3, 2011

पिनिक के फायर !

 May 03, 2011     bhaiya ji, hasya, manu shrivastav, manu srijan, pinik ke fayar, हास्य     1 comment   


भईया जी पिनिके (गुस्साये ) हुए थे ! घर के सारे सहमे हुए थे, की हुआ क्या हैं? कल भौजी में भईया जी को कद्दू का तरकारी खिला दिया था. अब भईया जी  को पेट में बाय (गैस) हो गया था. डकार पे डकार मार रहे थे. और भउजी पर तर्रा रहें थे, "जब पता बा की हमे कोहड़ा (कद्दू ) के तरकारी पसंद नहीं आता, हमके जबरदस्ती खिला ने की जरुअत क्या थी? "
भउजी को अभी हड़का ही रहे थे की भईया जी के परम मित्र सरदार अमरीक सिंह आ गए. भईया की हालत देख के पूछे  की डाकदर बाबु को बोला के लायें का?
भईया जी का गैस के मारे बुरा हाल था, हिम्मत कर के बोलना चाह हूँsss. , मगर निकल गयी पूंsss .

मामले की गंभीरता को देख के अमरीक सिंह डाकदर बाबु को बोलाने चले गए.
इधर भईया जी , को जीतनी तकलीफ हो रही थी, भउजी पे उतने ही पिनिक  रहे थे, "खोर खोर के मुआने से अच्छा है की हमको एक बार में ही मार दो " 
थोड़े देर में ही डाकदर बाबु आ गए.  देख दुख के दवाई  देके चले गए. पर काफी देर के बाद भी आराम नहीं मिला.. भईया जी फेर भउजी पर बिगड़ने लगे. भउजी भी बड़ी देर से बर्दास्त कर रही थी. उहो गुस्सा के बोली - "अब दवाई असर नहीं कर रहा है तो हम पे कहे पिनिक के फायर हो रहे ho" वे झनकती फटकती घर में जाने लगी.
अचानक से दवाई ने असर किया और भईया जी के पेट से गैस निकले लगी.  
पोंssssssssssssssssssssssssssssssssssssssssss.

भईया जी चैन की साँस लेते हुए बोले पिनिक के फायर तो अब्ब हुआ है . :D



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Monday, May 2, 2011

चंद्रकांता

 May 02, 2011     aalekh, chandrakanta, devakinandan khatri, lekh, manu shrivastav, manu srijan, upanyas, vyang, उपन्यास     5 comments   

चंद्रकांता पढ़ रहा हूँ. जिसे बाबु देवकी नंदन खत्री ने सन 1888  में लिखा था. 

कहते हैं हिंदी में लिखे इस उपन्यास को पढ़ने के लिए लोगो ने हिंदी सिखाना शुरू किया, तब जब उर्दू और फारसी का वर्चस्व था . बचपन में माँ से चंद्रकांता और चंद्रकांता संतति की कहानी सुनी थी. माँ ने बताया था की उसने अपने स्कूल के दिनों में ये उपन्यास पढ़ा था.

जैसे जैसे उपन्यास आगे पढ़ते जा रहा हूँ, एक एक लाइन याद आ रहा है . जो माँ ने सुनाया था. और माँ ने एक एक लाइन सुनाया था जो उन्होंने अपने स्कुल के दिनों में पढ़ा था. ऐसा लग रहा है.

इस घटना प्रधान उपन्यास में एक के बाद एक  होती घटनाये इतनी मजेदार हैं की एक बैठक में पूरा उपन्यास ख़तम करने की इच्छा हो रही है. 

घात प्रतिघात , चालाकी , धोखा , मक्कारी, दोस्ती, दुश्मनी, मुहब्बत , वफ़ादारी, त्याग  क्या नहीं है इसमें !

भले ही इस उपन्यास के नायक और नायिका , बिरेन्द्र सिंह और चंद्रकांता हो, पर यह उपन्यास है ,ऐयारो (जासूस) , की. ऐयारो के कारनामो की . एक ऐयार अपने काम से दो राज्य को लडवा भी सकता था, और लड़ाई बंद भी करवा सकता था, बिना लड़ाई करे दुश्मन राज्य पे फतह भी हासिल कर सकता था. 

इस रोमांचक  घटनाप्रधान , जासूसी उपन्यास पढ़ के मैं ये सोच रहा हूँ की हम क्यों विदेशी लेखको उपन्यास के पीछे इतना भागते हैं जब की हमारे गागर ही मोतियों से भरे पड़े हैं. 


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Saturday, April 30, 2011

थावे भवानी के दरबार !

 April 30, 2011     bhojpuri, manu shrivastav, manu srijan, video     No comments   



सिंगर  - लुडू दीवाना
लेखक - मनु श्रीवास्तव  

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Friday, April 29, 2011

I feel Alone.

 April 29, 2011     manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, twitter     No comments   

i want to share, but have no words. I want to share, but to whom.
I am alone, but think about you. I think about you n I feel Alone.
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Thursday, April 28, 2011

बेचैनी !!!

 April 28, 2011     bechaini, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, poem .     1 comment   

बेचैनी कुछ इस तरह बढ रही है जहन में,
चैन का तो नामों निशाँ है भी नहीं कहीं |

बस सांसो का आना जाना लगा है सराय में,
ज़िन्दगी का तो नामों निशाँ है भी नहीं कहीं |

धड़कता है ये दिल बड़ी बेख्याली से जार जार,
दब जाती है बेचैनी की आवाज़ धडकनों में !

झटकने से भी दूर नहीं होते ख्याल खुदा के,
तुमको खुदा कहें या खुदा को कहें खुदा  |

कर दो करम कुछ ऐसा, आ जाये दिल-ए-सुकूँ ,
बेचैनी तो कदम मिला के चलती है रूह के भी !



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Tuesday, April 26, 2011

सम्मान माँगा नहीं दिया जाता है. चाहे सचिन के लिए भारत रत्न ही क्यों न हो !

 April 26, 2011     amitabh bachchhan, bharatratna, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, sachin tendulkar     No comments   

सम्मान माँगा नहीं दिया जाता है. चाहे सचिन के लिए भारत रत्न ही क्यों न हो !

अभी देश में जिस तरह से सचिन को भारत रत्न दिलाने की बात की जा रही है, उससे तो यही लगता है की सचिन को जबरदस्ती सम्मान दिलाये जाने की मुहीम हो रही है. बेशक वे एक महान बल्लेबाज़ हैं , पर खेलने के लिए  लिए उन्हें पैसे भी मिलते हैं. अपने खेल से उन्होंने देश क्या क्या भला किया है अगर ये पूछा जाये तो किसी के पास जबाब नहीं होगा. हां ये अलग बात है की, देश वासी एक भारतरत्न प्राप्त भारतीय को टीवी पर किसी खास व्यावसायिक सामान के प्रचार के  लिए या लोगो लो अंडे खाने के लिए आग्रह करते हुए देखना चाहे तो अलग बात है.

सचिन की महान उब्लाब्धियो (उनके व्यक्तिगत विशाल स्कोर, ) के लिए भारत रत्न दी जाने की बात हो रही है तो, अमिताभ बच्चन को भी भारत रत्न मिलाना चाहिए ! क्यों की वे सदी के महानायक हैं !

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Thursday, April 14, 2011

"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!"

 April 14, 2011     earth, help, manu shrivastav, manu srijan, save water, short story, story, water, water resource     No comments   

www.hamarivani.com

"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!"  की बड़ी तेज़ आवाज़ आई थी , तालाब से थोड़ी दूर ही आम का बगीचा था. वहाँ भरी दुपहरी में लोग पेंड़ो की छाया में आराम कर रहे थे की जो की आवाज़ सुन के सब चौक गए.

कुछ तो दौड़ के तालाब के किनारे पहुँचे की शायद कोई डूब न रहा हो,  पैर कोई डूब नहीं रहा था. एक बच्चा अपने भैंस को तालाब के किनारे पानी में नहला रहा था. बचाओ बचाओ की आवाज़ उसने भी सुनी थी, वो भी तालाब की तरफ देख रहा था की हुआ क्या है? 

कुछ नहीं पा कर सारे लोग जैसे ही वापस जाने को मुड़े , फिर आवाज़ आई -  "बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!" 

अब लोग थोडा ध्यान से देखने लगे , पर कुछ नजर नहीं आया. तालाब के दुसे किनारे पे कुछ औरते कपडा धो रही थी, वे कपडा धोने के साथ अपने हसी मजाक में इतनी मगन थीं की उनलोगों को पता ही नहीं था की वह हो क्या रहा है? 
लोगो ने अपनी नजरे दूसरी तरफ घुमाई, की कुछ दिख जाये, पर उस छोर पे दो लोग अपनी  पानी खीचने वाली माशीन से खेत को सिचने के लिए पानी निकालने में व्यस्त थे. पर वे इतनी दूर थी की उनकी आवाज़ यहाँ तक नहीं आ सकती थी. 
लोग अभी देख परख ही रहे थे की तीब्र आवाज़ सुनाई पड़ी -  "बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!" 

लोगो ने तालाब के चौथी तरफ देखा की शयद उधर कुछ हो रहा हो. पर उधर एक आदमी अपने कुदाल से कुछ करने में व्यस्त था. लोगो ने उसे आवाज़ दी-"क्या कर रहे हो भाई ? चीख क्यों रहे हो?"
आदमी बोला - "मुझे साँस लेने की फुरसत नहीं है तुम चीखने की बात कर रहे हो.शौच की टंकी फुट गयी है और टंकी से पानी बह के घर के पास जमा होगा गया है. उसके निकासी के लिए नाली बना रहा हूँ . " कह के आदमी वापस अपने काम में लग गया.

लोग सोच में पड़ गए. आखिर माज़रा क्या है ? कही भूत वूत का तो चक्कर नहीं है ?  उनमे से एक आदमी ने हिम्मत कर के पूछा - "भाई साहेब आप कौन हो? आप दिखाई ही नहीं दे रहे हो, तो हम भला मदद कैसे करें?"

आवाज़ आई - मेरी तुमको जरा भी परवाह नहीं है, मुझे बर्बाद कर रहे हो, मुझे तुम लोग गन्दा कर रहे हो, तो मुझे अपने लिए गुहार तो लगाने ही पड़ेगी !

एक आदमी ने पूछा - "पर आखिर तुम हो कौन?'

आवाज़ आई - "मैं पानी हूँ "
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पांडव ने मारा था रावण को |

 April 14, 2011     manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, pandav ne mara tha rawan ko     2 comments   

इतिहास की घंटी में मास्टर जी पढ़ा रहे थे | इतिहास भूगोल के बारे में तो कहा जाता है की इतिहास भूगोल बेबफा, रात को रात सुबह सफा . खैर इस कहावत का इस इतिहास की क्लास से कोई मतलब नहीं है | मास्टर जी पढ़ा रहे थे हम पढ़ रहे थे की हस्तिनापुर के राजा युधिस्ठिर के 4 भाई थे युधिस्ठिर को लेके 5 और कर्ण को लेके 6 . पर कर्ण ने बचपन में घर छोड़ दिया था . और अपने चचेरे भाई दुर्योधन के साथ रहता था . पांचो पांडवो की शादी द्रोपदी से हुई थी . पांचो पांडव ख़ुशी खुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे . की शकुनी मामा ने युधिस्ठिर को जुए में हरा के उनका सारा राज पाट हड़प लिए . ये तो युधिस्ठिर गलती थी जुए पे आज की सरकार ने बैन लगा रखा है . क्या ये बात उस टाइम के लोगो को नहीं पता थी क्या ?
जुए में घर बार हारने के बाद जंगल में जाना पड़ा बनवास के लिए. बनवास करते करते वे पुरे भारत का भ्रमण कर लिए. जंगल में इह्नोने कई देशो से लडाईयां की. जिसमे इन्होने अफगानिस्तान को पूरी तदाह बर्बाद कर दिया .
इसी क्रम में इनकी दोस्ती कृष्ण भगवन से हुई. वे इनके परम मित्र बन गए.
फिर ये यात्रा करते हुए थोडा और आगे बड़े . रास्ते में द्रोपदी को एक जगह प्यास लगी . द्रोपदी ने पानी पिने की इच्छा जताई .
युधिस्ठिर ने भीम को पानी लाने के लिए कहा .
भीम पानी लाने ले लिए चल पड़े .
भीम के गए काफी देर हो गए , वे वापस नहीं आये .
युधिस्ठिर ने अर्जुन को भेजा . अर्जुन गए तो गए ही रह गए , आये नहीं .
एक - एक कर के युधिस्ठिर ने अपने सरे भाइयों को पानी के तलाश में भेज दिया काफी देर के बाद भी कोई वापस नहीं आया. तो युधिस्ठिर खुद पानी और अपने भाइयों की तलाश में निकले.

टहलते टहलते वे एक तालाब के किनारे पहुचे तो देखा की उनके चारो भाई अचेतन हुए पड़े हैं. उन्होंने सोचा की प्यास से बेहोश हैं. इनके चहरे पे पानी का छिटा मार के होश में लाया जाये . जैसे ही पानी लेने के लिए तालाब पे झुके तालन से आवाज आई अगर पानी पीना है तो मेरे प्रश्नों का जबाब देना पड़ेगा तुमको . युधिस्ठिर ने पूछा कौन हो आप? तालाब से आवाज़ आई मैं कौन बनेगा करोड़पति से अमिताभ बच्चन बोला रहा हूँ . युधिस्ठिर मान गए . सवाल जवाब देना उनके बाएं हाथ का खेल था .

अपने गुरु द्रोन की क्लास में हमेशा वो 95% नंबर जो लाते थे . 100% भी लाने की तयारी थी पर तब ग्रेडिंग की व्यवस्था हो गयी . यहाँ पे उन्होंने अमिताभ बच्चन के 100 सवालो का सही सही जबाब दिया . अमिताभ बच्चन ने खुश होके कहा- परीक्षार्थी, परीक्षक से ज्यादा ज्ञानवान है .
फिर युधिस्ठिर ने अपने भाइयो पे पानी के छिटके मारे. पानी के छिटके पड़ते ही सरे पांडव होश में आये गए . होश में आते ही उन्होंने युधिस्ठिर से सवाल की - भाईजान आप हम पे ये पानी के छिटके मार के होली क्यों मना रहे हो .. तभी से हम होली का त्यौहार मानते आ रहे हैं .
वह से पांचो पांडव पानी ले द्रोपदी के पास पूछे . पर उनको वह पे द्रोपदी नहीं मिली .

उन्होंने अपने आस पास का सारा जंगल छान मारा . रास्ते में उनको जटायु मिला . उसने बताया - लंका का राजा रावण आपकी द्रोपदी का हरण कर के ले जा रहा था . मैंने विद्रोह करने की कोशिश की तो उसने मेरे पंख ये कह के का दिया की - ये पंख हमके डेड जटायु . मैं द्रोपदी को बचा नहीं पाया .

जटायु के दिशा निर्देश पे पे आगे बड़े . रास्ते में उनको हनुमान जी मिले .हनुमान जी ने उनको सुग्रीव से मिलाया . सुग्रीव ने बताया की अगर उनको उसकी मदद चाहिए तो बदले में उसको , उसके भाई बाली का राज्य दिलाना होगा .पांडव तैयार हो गए. युधिस्ठिर

ने अपने भाई भीम को बाली से लड़ने के लिए भेजा . भीम ने बाली को मल्लयुद्ध में बाली को पछाड़ दिया और उसके पैर पकड़ के दो तुकडे कर दिए . बाली की जगह सुग्रीव राजा बन गया .बाली को इतिहास में जरासंध के नाम से भी जाना जाता है.

सुग्रीव ने अपने वादे के अनुसार हनुमान को द्रोपदी की खोज में भेजा .
हनुमान ने पता लगाया की द्रोपदी को लंका के राजा रावण ने अशोक वाटिका में रखा है.
द्रोपदी का पता लगते ही पांडवो ने लंका पैर चढाई करने की योजना बनाई. लंका की तरफ बदते हुए वे जा पहुचे कन्याकुमारी. वहां से आगे जाने का मार्ग बंद था तो उन्होंने नल नील को बुला के सागर के उपर पूल बनाने का टेंडर देने को कहा . नल नील पूल बनाने के लिए तैयार हो गय. पूल बनाना चालू हो गया. पांडव रोज़ ही पूल की गुद्वात्ता की जाँच करते थे की कही इसमें नकली माल तो नहीं खपाया जा रहा है . कड़ी मेहनत और लगन से pool तैयार हो गयी . उसपे चढ़ के वे लंका की डरती पे उतारे ही थे की वहा के कस्टम वालो ने पासपोर्ट और वीसा की जाँच शुरू कर दी . कई लोग अंदर ही . पांडवो के पास भी पासपोर्ट और वीसा नहीं था . वनवास पे जाने के पहले दुर्योधन ने उनका पासपोर्ट और वीसा अपने पास जमा कर के देश से बहार जाने से मना किया था . कस्टम वाले पांडवो को अंदर ले जाने वाले ही थे की विभीषण वहा आ गए . उन्होंने पांडवो के सामने एक शर्त राखी . की अगर तुम को रावण को मारने का रास्ता बताऊ तो तुमको मुझे लंका का राजा बनाना पड़ेगा और बदले में मैं तुमको द्रोपदी को वापस कर दूंगा .

पांडव तैयार हो गए .

बहुत घमासान लडाई हुई और रावण मारा गया . पांडव अपनी द्रोपदी को लेकर वापस हस्तिनापुर आ गए .

और ख़ुशी ख़ुशी राज्य करने लगे .

नोट :
यह आज सन्(2009) के एक हजार साल बाद यानि 3009 के इतिहास के किताब के एक अध्याय से लिए गया है .

समर्पित :
उन सरकारों के नाम पे जो इतिहास को अपने मन से लिखवाते और स्कूल में पद्वते है . दूसरी सरकार आती है और उनमे फेरबदल कर के दुबारा से छपवाती है .
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ख़ुशी

 April 14, 2011     hindi poem, khushi, manoranjan shrivastav, manu, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

सुबह सवेरे पूरब से सूरज जब भी मुस्काता है
अपनी किरणों से जग को वह ख़ुशी दे जाता है

आसमान में देखो पक्षी कैसे उड़ाते जाते है ?
करते है कलरव और गीत ख़ुशी के गाते है

कलकल के के बहती नदी सबको ये समझाती है
रुकने को दुःख कहते है चलना ख़ुशी कहलाती है

फूलों पे मढ़राते भवंरे जब उसका रस पा जाते है
हो कर के मतवाले वे भी ख़ुशी में गाते है

काले काले बदल धरती पे जब बुँदे बरसते है
खेतो में लहराते पौधे झूम ख़ुशी में जाते है
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पर रोज़ यहाँ मैं मरता हूँ !

 April 14, 2011     gandhi ji, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, nathuram, roz yaha main marta hu     No comments   

सोंचा था खुल के जियूँगा पर,

मन की आस ना पूरी हुई,

आज़ादी का सपना, अपना,

पूरी, पर अधूरी हुई |
इतिहास दुहराता है है खुद को,

इतिहास में ही हम पढ़ रहे हैं,

अपनी अपनी हस्तिनापुर को,

आज भी भाई लड़ रहे हैं |
सुख चुका आँखों का पानी,

लाज हया विलुप्त हुई,

दानवता विस्तार पा रही,

मानवता सुसुप्त हुई|
गिर रहें हैं कट कट के सर,

धर्म के कारोबार में,

खुदा भी अब बँट चुका,

उत्तर- दक्षिण के त्यौहार में|
थी भली लाख गुना गुलामी, आज से,

आपस में तो ना लड़ते थे,

उन फिरंगी गोरों के आगे आ,

एक हिन्दुस्तानी होने का तो दम भरते थे|
था सही ऐ "नाथू" तूं,

अब यही सोचा करता हूँ,

मारा तुमने मुझे एक बार,

पर रोज़ यहाँ मैं मरता हूँ !
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ये सिसकन ही जिंदगानी है,

 April 14, 2011     hindi poem, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

करे गुहार वो किस चेहरे से, हर चेहरा बेमानी है,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,

किस्मत को या रब को कोसे, कोसे से ना रोटी मिलती,
मेहनत भी न कर पाते , बिन रोटी ना जां ये हिलती |
करमहीन बना डाला उनने , रोटी देते जो दानी हैं,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,

थूक के मलहम लगा लगा के, सूखे ओठ को गिले करते,
पेट की आग बुझा लेते तब , आँखों से जब पानी झरते,
पर कुवे जैसा सुखा चूका , आँखों का जो पानी है.
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,

जी रहे थे मर मर के, तो क्या हुआ जो मर गए,
छुटा पीछा नारकीय जीवन से, दुनिया से तो तर गए,
पर, छोड़ गए अपनी औलादे, ये कैसी नादानी है,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
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Sunday, April 10, 2011

पियाज वाला चाय

 April 10, 2011     bhojpuri, chai, manoranjan shriavstav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, piyaz wala chai, pyaaz     No comments   




सब केहू ब्लैक कॉफ़ी पियेला हम पियेनी ब्लैक चाय ! 
लोग पूछी काहे, हम कहेब "का करी तेंढ चले के आदत बा बचपने से. हँ भाई सांचो नु, बाबूजी कही स्कुल से सीधे घरे अईहे.त हम स्कूल से सीधे पूल पे जाई देखे खातिर की लोग मछरी केंगन मारेला  "
गायत्री पूजा के बाद पंडी जी कहले की बाबु गायत्री माता से मांगअ की हमार सारा खीस पित ले लीं , हम कहनी हमारा के औरी खीस पित दे दीं. उनकर का? दे दिहली ! 
गाँव के आटा चक्की के दोकान पे के के आटा पिसवईले ओकर लमहर लिस्ट जेंगन मशीन पे दुकानदार के पास होला, ओहिंगन हमारो तेंढ चाल के लमहर लिस्ट बात.  

त कहत रहनी ह की सब केहू ब्लैक कॉफ़ी पियेला हम पियेनी ब्लैक चाय. चाय बना के जैसे ही पहिला घूंट मरनी हँ पियाज के टेस्ट आइल ह, हम त घबडा गइनी की चायवा में पियाज के फोरन कब डाल देहनी ह हम. 
जाके चेक कईनि त पता चलल की जेमे चाय बनावेनी ओहिमे सबेरे पियाज कटले रहनी ह .

हम त पियाज वाला चाय पि लेहनी, रउआ लोग कब टीराई करेम ?
  
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Saturday, April 9, 2011

अँधेरा जैसा छा जाता है !

 April 09, 2011     doctor, jokes, manoranjan shriavstav, manu, manu mania, manu srijan, weakness     No comments   

 मरीज - डॉक्टर साहेब मेरे आँखों के आगे अँधेरा जैसा छा जाता है, क्या करू ?

डॉक्टर अर्पिता  -सी एफ एल बल्ब लगा लो वहाँ, बिजली बिल भी कम आएगा ! 
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दांतों में दर्द |

 April 09, 2011     doctor, hasya, jokes, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu, manu and tanu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, pain, sms, teeth     No comments   

मरीज - डॉक्टर साहब, मेरे दांतों में कई दिनों से भयानक दर्द हो रहा है, कोई ऐसा उपाय बताओ को दर्द जड़ से  ख़त्म हो जाये !!

डॉक्टर अर्पिता  - सारे दांत उखडवा दो !!  
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Friday, April 8, 2011

desserts !

 April 08, 2011     jokes, manoranjan shrivastav, manu, manu and tanu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sms     No comments   

manu to tanu - so sweet of you !!

tanu - yaar !! say something new !

manu - so desserts of you!!
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मक्खियाँ

 April 08, 2011     jokes, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu, manu and tanu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sms     No comments   

तनु  - तुम लड़के एक जैसे होते हो, जहाँ लडकियाँ देखते हो वही पे मडराते हो !
मनु - मक्खियाँ  सिर्फ गंदगी पे ही मडराती हैं ! :P 
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Tuesday, March 29, 2011

ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,

 March 29, 2011     dhoni, Indian cricket tean, mahender singh dhoni, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sachin tendulkar, virendar sehwag, world cup 2011, yuvraj singh     No comments   

दहल उठे तेरे प्रतिद्वंदी, ऐसी तेरी यलगार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,

करो विजय दुनिया को, तुम्हारा विजेता सा व्यव्हार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,

हिल उठे ये धरती फट जाये आकाश, कुछ ऐसी तेरी ललकार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,

ऐ इंडिया जीतो ऐसे हर तरह जयकार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,
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Sunday, March 27, 2011

पारो से प्यार ना करेब !

 March 27, 2011     bhojpuri, jokes, manoranjan shrivastav, manu, manu and tanu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

चोरी चोरी गइल रहनी मिले अपना पारो से
चढ़े  के त चढ़ गइनी, छत से उतारो के.

लोगवा जे देखलस त भइल बड़ा शोर
कुकुर साला छड़प गइल बूझिये के चोर

भगनी हम भायें दे, प्यार कुल्ही भूल गइल,
झाड़ी में फंस  के धोतियो खुल गइल.

जान बचा के केन्हुगन घरे पहुँच  गइनी,
दुआरे पे बाबु जी इंतजार करत रहनी,

मार मार के हमारे मुह फोर दिहनी,
मोतिया आ हमारा के बाहरे  छोर दिहनी,

राती में कब्बो उनके दीदार ना करेब,
फेरु कब्बो पारो से प्यार ना करेब.
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Friday, March 11, 2011

सूर्या बल्ब !!

 March 11, 2011     andher, bhagwan, der, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu and tanu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, non-veg, short story, sms, surya bulb     No comments   

मनु - भगवन के घर देर है अंधेर नहीं !
तनु - क्या वे सूर्या बल्ब यूज़ नहीं करते?
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Tuesday, March 8, 2011

प्रश्नोतरी !!

 March 08, 2011     gangotri, jokes, manoranjan, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, new, shyari, sms, yamunotri     No comments   

मनु - गंगोत्री और यमुनोत्री से मिलता जुलता कोई और जगह है क्या ?
तनु - है न !! प्रश्नोतरी !!
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Friday, March 4, 2011

मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!

 March 04, 2011     hindi poem, manoranjan, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu shrivastav, manu srijan, mummy, papa     No comments   

मम्मी  मेरी  बड़ी  है  प्यारी
सारी  दुनिया  से  वो  न्यारी .
प्यार से कहती मुझे
गुडिया रानी,
कभी  जो  करती  मैं  शैतानी ,
मम्मी  कहती  मुझे  शैतान  की  नानी ,
कान  उखाड़  के  करे  पिटाई ,
रोने  पे  चोकोलेट  पकड़ाई ,
रोते  देख  मुझे  खुद  भी  रोटी ,
फिर  क्यों  मेरी  पिटाई  करती .


पापा  मेरे  बड़े  ही  न्यारे ,
सारी  दुनिया  से  वो  प्यारे .
अच्छी  अच्छी  बाते  बतलाते ,
बुरे  काम  पे  डांट  लगते ,
कभी  जो  मम्मी  करे  शिकायत ,
पापा  कहते  हमे  नालायक .
कभी  जो  करते  हम  अच्छा  काम ,
पापा  कहते - तुमने  किया  मेरा  रौशन  नाम .

मम्मी  पापा  मेरे  सबसे  अच्छे
हम  भी  उनके   अच्छे  बच्चे .

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Thursday, February 17, 2011

गम ना करो !

 February 17, 2011     gam, manoranjan shriavstav, manoranjan shrivastav, manu, manu mania, manu srijan     1 comment   

गम में डूबे हुए हो!
तो ये बताओ,
क्यों नहीं हुआ तुम्हारा बेहतर?
क्या तुमने सोचा ?
तुमने किया है किसी का बेहतर?

खुद के बेहतर होने की अपेक्षा में,
तुमने कर दी उपेक्षा,
दुसरे की बेहतर करने की.

गम ना करो !
ना सहने की चीज़ है,
ना कहने की चीज़ है,
गम,
बिना गम के कोई जिंदगी नहीं होती.

गिर कर सम्हलने के लिए लगती है,
ठोकर जिंदगी में,
फिर भी जो ना सम्हले,
वो स्वाभिमानी नहीं होता.



क्यों रोते हो हमसफ़र के लिए ?
क्यों फैलाते हो बाँहे किसी के लिए ?
सिने से लगा के बैठोगे ये गम कब तलक ?
एकाध रास्ते अकेले तय कर के भी देख लो !
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Monday, January 31, 2011

सूरज चाचू !!!!

 January 31, 2011     good night, manoranjan shrivastav, manu mania, manu shrivastav, manu srijan, sun, suraj, suraj chachu, sweet dream.     1 comment   


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Friday, January 7, 2011

कृषि मंत्री को चिट्ठी !

 January 07, 2011     chitthi, krishi, krishi mantri ko chitthi, mahangai, mahangayi dayan, manoranjan shrivastav, mantri, manu, manu mania, manu shrivastav, manu srijan     No comments   

रफ़्तार



आदरणीय  कृषि  मंत्री  जी ,

मैं  आपके  देश  का  एक  गरीब  किसान  हूँ  . पुरे  साल  कड़ी  मेहनत  कर  के  अनाज , और  सब्जियां  उगाता हूँ . भगवान  और  मानसून  कि  दुआ  से  कमी -बेशी  इतना  तो  अनाज  और  सब्जियां  हो  ही  जाती  है  औसतन  सबका  पेट  भर  सके . फसल  पुरे  होने  के  बाद  मेरी  कोशिश  रहती  है  कि  अनाज  और  सब्जियां  जल्दी  से  जल्दी  बाज़ार  में  पहुचें  और  बाज़ार  वालो  का  भला  हो , माफ़  कीजियेगा  मेरा  मतलब  कि  देश  वालो  का  भला  हो . पर  एक  बात  समझ  नहीं  आती  बाज़ार  में  वे  सब  दिखाई  क्यों  नहीं  देती  हैं . सबसे  बड़ी  बात  कि  जब  मैं  ही  खरीदने  जाता  हूँ   तो  मुझे  दुगने  दाम  चुकाने  पड़ते  है . खैर  ये  बताइए , मैं  तो  अपना  काम  करता  हूँ  . आप  अपना  काम  कब  करोगे ?

सप्रेम 
एक  भारतीय  किसान
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