वाह रे नितीश का सुशासन !
Thursday, December 22, 2011
Thursday, December 1, 2011
Monday, November 28, 2011
Sunday, November 27, 2011
शहीद की आत्मा
November 27, 2011
manu shrivastav, manu srijan, short story
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युवक बोला - हम आप लोगो को कैसे भूल सकते हैं? हम आपको सैल्यूट करते हैं, और दिन में मैंने इसके लिए अपना फेसबुक स्टेटस अपडेट भी किया था.
Friday, November 25, 2011
Dear Facebook
November 25, 2011
facebook, jokes, manu shrivastav, manu srijan
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Everytime I add a girl you ask me "Do you know her?"
I am asking to you - Is she your sister.. ??? :P
and I do not stop sending friend request to galz . facebook blocked my sending friend request optin for two days.
means - le bhugat aur bhej meri bahano ko friend request :D :D
Thursday, November 24, 2011
Wednesday, November 23, 2011
यु पी के चार टुकडे
November 23, 2011
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पूजा मिश्रा - एक टुकड़ा बसपा के लिए, दूसरा भाजपा के लिए, तीसरा कांग्रेस के लिए .
बिग बॉस - और चौथा?
पूजा मिश्रा - देखिये ! मैं उस चौथे हिस्से पे राज्य करने नहीं जाने वाली . स्पेयर मी .
Friday, November 18, 2011
भ्रूंड हत्या - लघु कथा
November 18, 2011
manu shrivastav, manu srijan, short story
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Thursday, November 17, 2011
Tuesday, November 8, 2011
स्वामी अग्निवेश अब बिग बॉस के घर में जायेंगे,
November 08, 2011
BJP, congress, kavita, manu shrivastav, manu srijan, sawami agnivesh, vyang
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वहां के घर के कामो में हाथ बताएँगे,
मिल के काम करेंगे, बर्तन धोयेंगे, झाड़ू लगायेंगे,
पूजा मिश्रा उनको या वो पूजा को प्रवचन सुनायेंगे,
मानेंगे बिग बॉस का आदेश , नाचेंगे-गायेंगे
साथियों के व्यव्हार पे रोयेंगे या खिल्खिलायेंगे?
पहले कभी कभी आते थे, अब रोज़ टी वी पे आयेंगे
देश की हीं सेवा करेंगे, सबका मनोरंजन कराएँगे.
Tuesday, October 11, 2011
Monday, September 19, 2011
ड्रैकुला को खून चाहिए, कृपया डोनेट करिये !! - पार्ट 1
September 19, 2011
BJP, congress, dracula, India, manu, manu shrivastav, manushrivastav, ड्रैकुला को खून चाहिए
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कसाब को मेहमान जैसी इज्ज़त देने की बात सुन के एक आम भारतीय की तरह डॉक्टर झेंप गयी. वो बात को बदलते हुए पूछी - "वो सब छोडिये. ये बताइए, आप भारत कैसे आये? और आपकी ये हालत कैसे हो गयी?"
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क्रमशः .............
Monday, September 12, 2011
Saturday, September 3, 2011
Friday, August 26, 2011
अन्ना जी के तीन...........
August 26, 2011
anna hazare, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, vyang, अन्ना जी के तीन
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दूसरा, कुछ गलत नहीं सुनाने वाला भी, कान से हाथ हटा लिया था. पर सुन तो वो अब भी नहीं रहा था किसी का, बस अपनी ही बोले जा रहा था.
तीसरे वाले ने , अपनी आँखों से हाथ हटा लिया था. उसने कई सालों से कुछ नहीं देखा था. वो अचंभित था - "अरे ! दुनिया इतनी बदल गयी क्या?" वो चुपचाप बैठ के बाकि के दोनों की लड़ाई देखने लगा. शायद, समझने की कोशिश कर रहा था की आखिर यहाँ चल क्या रहा है.
चुप रहने वाला बन्दर दुबारा बोलना शुरू करने वाला था की, न सुनाने वाला बन्दर बोला - "तुम चुप रहे हो जी, तुमको बोलने का की क्या पड़ी है?" तो उसने जबाब दिया - "बोलने, मेरा मौलिक अधिकार है. संविधान ने ये दिया है मुझे !" न सुनाने वाला बन्दर बोला - "बोलने का अधिकार तो मुझे भी संविधान ने दिया है. और मैं बोल रहा हूँ की तुम चुप हो जाओ "
"चुप रहने का तो सवाल ही नहीं उठता. गाँधी जी का कहना मान के इतने साल चुप रहें हम, क्या मिला हमे उनके साथ रह के ? कोई हमे ठीक से जनता भी नहीं. अन्ना जी को देखो, उनके साथ रहने वाले कितने सोलिड हैं. वो ना तो किसी की सुनते हैं, ना किसी को बोलने देते हैं, और हर वक़्त सबको घूरते रहते हैं. वो लेडी को देखो. किसी की सुनती ही नहीं. अगर कोई कुछ बोलने की कोशिश करता है, तो डांट के चुप करा देती है. -'आप एक मिनट चुप रहिये, चुप रहिये ' क्या रुआब है भाई?. उनकी बात सुन के सब चुप हो जाते हैं. हमारी बात सुन के भला कोई चुप होगा? "
पहले वाले की बात सुन के दूसरा वाला बोला है - "हाँ यार ! सही कहते हो! मैंने तो ता उम्र किसी को नहीं सुना, पर ये लोग तो जम के सुनाते है दूसरो को. बोलते बोलते गला सुखा जाये तो पानी पी पी के सुनाते हैं. हमारी तो कोई सुनाता नहीं. " इस्पे तीसरा वाला बोला - "मुझे तो कुछ पता ही नहीं हो क्या रहा है? मैंने तो अभी अभी अपनी आँखे खोली है, पहले देख के कुछ समझ लेने दो फिर कुछ बोलूँगा."
पहला वाला निराशा भरे शब्दों में बोला - "हम गांधी जी के तीन बंदरो से कही ज्यादा बेहतर हैं ये अन्ना जी के तीन..........."
Tuesday, August 16, 2011
Sunday, August 14, 2011
देशभक्ति करने का मौका
August 14, 2011
bhaiya ji, manu shrivastav, manu srijan, vyang
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"हाँ ! तो अब जवानी में फ़ोन करने कि क्या जरुरत आ पड़ी?" भईया जी ने पूछा .
"तो बोल्लो ना ! चार भैसे खड़ी रम्भा रही हैं, उनको दुहना है अभी. "
"भईया जी ! मुझे एक स्कूल में पंद्रह अगस्त पे खाना खिलने का टेंडर मिला है. उसके लिए मुझे दूध का आर्डर देना था. अब तुम ही मेरे बाल सखा हो, इसलिए तुमको मैंने फोन किया है. अस्सी लीटर दूध कि जरुरत है, कल सुबह ही गाडी भिजवा दूँगा. "
"तुमने गाडी कब ली, तुम तो फटफटिया पे चलते थे ना?" भईया जी ने पूछा .
तोला राम खिलखिलाते हुये बोले - "सब दया है 'उपरवाले' की , प्रसाद चढ़ाया और फल प्राप्त हुआ और सरकारी कामो में तो खर्चा पाई का मुनाफा हज़ार का भी तो होता है."
तोला राम की बात सुन के भईया जी दंग रहा गए. पूछने लगे - "अरे ! कुछ हमे भी तो बताओ."
तोला राम बोले - "फोन से ज्यादा नहीं बता सकता हूँ. आजकल फोन टेपिंग बहुत बढ़ गयी है. कल पांच बजे गाडी तुम्हारे घर पहुँच जाएगी. सब तैयार रखना."
"पर, हमारी सारी भैंसे मिल कर भी चालीस लीटर दूध नहीं देती हैं. हम अस्सी लीटर का इंतजाम कैसे करेगे."
"हद है यार !" - तोला राम भड़क गए - "घर में चाप कल है की नहीं है."
"नहीं, सरकारी नल है और वो भी आज सुखा पड़ा है." - भईया जी उदास होके बोले.
"चलो यार, तुम्हरे लिए पानी भिजवा देता हूँ. पर, इसके पैसे कट जायेंगे ! और सुनो, दूध तीन प्रकार का होना चाहिए. एक, विशेष अतिथि के लिए. दूसरा, शिक्षकों के लिए और बाकि का बच्चो को पिलाने के लिए. तुम भी आ जाना फंक्शन में, गेस्ट का पास मिल जायेगा और तुम्हारा चालीस किलो दूध, अस्सी किलो में खड़े खड़े बिकवा दिया, तो मेरा भी ख्याल रखना. अच्छा अभी फोन रखते हैं, बहुत काम है. जय हिंद! "
भईया जी कुछ कहते, तब तक फ़ोन कट गया था. और 'सों-सों' के आवाज़ के साथ नल में पानी आने लगा था. भईया जी फोन को लुंगी में खोसते हुये बोले - "चलो ! पुरे साल देश को लूटने खसोटने के बाद, एक दिन तो देशभक्ति करने का मौका मिला."
Friday, August 12, 2011
रक्षा बंधन के त्यौहार की बधाई !
August 12, 2011
aalekh, manu shrivastav, manu srijan, raksha bandhan
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Tuesday, August 9, 2011
आरक्षण
August 09, 2011
aalekh, manu shrivastav, manu srijan, manushrivastav, reservation
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Sunday, August 7, 2011
Friday, July 29, 2011
Thursday, July 28, 2011
भाड़ में जा
July 28, 2011
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नशे के लिए तेरा ख्याल काफी है.
July 28, 2011
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Wednesday, July 27, 2011
Thursday, July 21, 2011
Wednesday, July 20, 2011
Tuesday, July 12, 2011
दहेज़ कु-प्रथा !
July 12, 2011
dahej, hasya, kavita, manu srijan, manushrivastav, vyang
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क्या पता कहीं तुम्हारा भाई , पहलवान होपीछे पड़ जाये मेरी जान कोवो आके मुझसे कुश्ती लड़ने लगेऔर मैं पुकारने लगूँ भगवान को
तुम्हरी माँ मुझे मुझे बहुत अच्छी लगती है,
कुछ नहीं कहती है,
पर एक कमी उसकी मुझे खलती है,
कहीं नहीं जाती वो , घर में ही रहती है
(तुमसे मिलाने नहीं आ पता हूँ !)
शादी तो मैं आपकी बेटी से ही करूँगा
दहेज़ में कुछ ज्यादा नहीं चाहिए
टीवी कार फ्रिज तो सही देते हैं
इसके अलावा दो चार लाख रूपया चाहिए
Saturday, July 9, 2011
Saturday, June 18, 2011
Tuesday, June 14, 2011
क्या मानवता भी क्षेत्रवादी होती है ?
June 14, 2011
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बाबा का अनशन टुटा !
June 14, 2011
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Sunday, June 12, 2011
भूखी जनता की चीत्कार
June 12, 2011
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Thursday, June 9, 2011
एम एफ हुसैन नहीं रहे !
June 09, 2011
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परन्तु, इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है. उनकी मौत से कला जगत को बहुत ही क्षति हुई है
Wednesday, June 8, 2011
मिस इंडिया लागअ तारु ए गोरी !
June 08, 2011
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अब ढोंगी बाबा हो गए !!!
June 08, 2011
aalekh, baba raamdev, congress, manu shrivastav, manu srijan, RSS, yogi baba ab dhongi baba ho gaye hain
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Tuesday, June 7, 2011
...एहिसे भैंस कहाली.
June 07, 2011
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ये कैसा सत्याग्रह था ?
June 07, 2011
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बाबा के असली मनसा के बारे में जानने के लिए पढ़े .डॉक्टर दुष्यंत जी का लेख
Monday, June 6, 2011
Sunday, June 5, 2011
राम (देव) लीला !!!
June 05, 2011
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अब सरकार कुछ मुद्दों के लिए समय मांग रही थी तो देना चाहिए था. हर सरकार की अपनी मजबूरियां होती हैं.सरकार की हालत तो आप खुद ही देख रहे हैं. अभी लोकपाल वाली घंटी ठीक से बंधी नहीं थी की एक और घंटी गले में बंधने के लिए तैयार देख के तिलमिलाना स्वाभाविक है. उपर से बाबा ने पुरे ताम झाम और लाव लश्कर के साथ सत्याग्रह शुरू किया था. जले पे नमक. बाबा के आन्दोलन को मिलती लोकप्रियता और समर्थन देख के सरकार के सरे कश बल ढीले हो गए. हकबकाई सरकार ने कदम उठा लिया , एक गलत कदम.
इस तरह से उसने अपना ही पैर कुल्हाड़ी पे दे मारा. पर क्या लगता है? की सरकार में बैठे लोग इतने नासमझ हैं? इसमें जरुर कोई दूसरा पेंच है.
भाइयों ! इतने स्ट्रेस और टेंशन के बाद आइये , थोडा खुश हो लिया जाये. विपक्षी दलों के साथ.
बाबा रामदेब द्वारा जलाई गयी इस आन्दोलन के आंच में अगर कोई रोटियां सेंक रही है , तो वो है विपक्षी दल. भ्रस्थाचार और आंतरिक कलह से आकंठ डूबी विपक्ष, सरकार को इस मुद्दे पे इतनी ख़ुशी ख़ुशी घेरने में लगी है. मानो अंधे के हाथ बटेर लग गयी है.
सबसे सही स्तिथि तो हमारी है. हम आम लोगो की. हमारी स्तिथि में कोई फर्क नहीं पड़ा है. आन्दोलन के पहले जो स्तिथि थी , वही अब भी है. बस संतोष इतना ही की कोई तो है, जो हमारे लिए बोल रहा है.
खैर, आरोप- प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, आगे आगे देखिये होता है क्या !!
Saturday, May 28, 2011
अंडात्मा का रुदन !
May 28, 2011
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काँच और दिल टूटने में फर्क !
May 28, 2011
kanch aur dil tutane me fark. poem, manu shrivastav, manu srijan
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Friday, May 27, 2011
लड़की और बेसन का हलवा !
May 27, 2011
hasya, ladki aur besan ka halwa, manu shrivastav, manu srijan
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Thursday, May 26, 2011
Wednesday, May 25, 2011
Monday, May 23, 2011
शराब और फेसबुक !
May 23, 2011
aalekh, facebook, manu shrivastav, sharab
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Thursday, May 19, 2011
ह्रदय विहीन हूँ मैं !
May 19, 2011
hindi poem, hriday vihin hu main, manoranjan shrivastav, manu shrivastav
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Sunday, May 15, 2011
वो कैसे जियेंगे ??
May 15, 2011
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Friday, May 13, 2011
आज इतनी सुबह कैसे ?
May 13, 2011
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लुका छिपी !!
May 13, 2011
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दूध का उबाल !
May 13, 2011
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Saturday, May 7, 2011
Thursday, May 5, 2011
भईया जी !!
May 05, 2011
bhaiya ji, bhartiya bhasha., bhojpuri, fanishwar nath renu, hindi poem, manu shrivastav, manu srijan
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Tuesday, May 3, 2011
पिनिक के फायर !
May 03, 2011
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Monday, May 2, 2011
चंद्रकांता
May 02, 2011
aalekh, chandrakanta, devakinandan khatri, lekh, manu shrivastav, manu srijan, upanyas, vyang, उपन्यास
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Saturday, April 30, 2011
Friday, April 29, 2011
Thursday, April 28, 2011
बेचैनी !!!
April 28, 2011
bechaini, hindi poem, manoranjan shrivastav, manu shrivastav, manu srijan, poem .
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बेचैनी तो कदम मिला के चलती है रूह के भी !
Tuesday, April 26, 2011
सम्मान माँगा नहीं दिया जाता है. चाहे सचिन के लिए भारत रत्न ही क्यों न हो !
April 26, 2011
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अभी देश में जिस तरह से सचिन को भारत रत्न दिलाने की बात की जा रही है, उससे तो यही लगता है की सचिन को जबरदस्ती सम्मान दिलाये जाने की मुहीम हो रही है. बेशक वे एक महान बल्लेबाज़ हैं , पर खेलने के लिए लिए उन्हें पैसे भी मिलते हैं. अपने खेल से उन्होंने देश क्या क्या भला किया है अगर ये पूछा जाये तो किसी के पास जबाब नहीं होगा. हां ये अलग बात है की, देश वासी एक भारतरत्न प्राप्त भारतीय को टीवी पर किसी खास व्यावसायिक सामान के प्रचार के लिए या लोगो लो अंडे खाने के लिए आग्रह करते हुए देखना चाहे तो अलग बात है.
सचिन की महान उब्लाब्धियो (उनके व्यक्तिगत विशाल स्कोर, ) के लिए भारत रत्न दी जाने की बात हो रही है तो, अमिताभ बच्चन को भी भारत रत्न मिलाना चाहिए ! क्यों की वे सदी के महानायक हैं !
Thursday, April 14, 2011
"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!"
April 14, 2011
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"बचाओ !! बचाओ !! बचाओ !!" की बड़ी तेज़ आवाज़ आई थी , तालाब से थोड़ी दूर ही आम का बगीचा था. वहाँ भरी दुपहरी में लोग पेंड़ो की छाया में आराम कर रहे थे की जो की आवाज़ सुन के सब चौक गए.
पांडव ने मारा था रावण को |
April 14, 2011
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जुए में घर बार हारने के बाद जंगल में जाना पड़ा बनवास के लिए. बनवास करते करते वे पुरे भारत का भ्रमण कर लिए. जंगल में इह्नोने कई देशो से लडाईयां की. जिसमे इन्होने अफगानिस्तान को पूरी तदाह बर्बाद कर दिया .
इसी क्रम में इनकी दोस्ती कृष्ण भगवन से हुई. वे इनके परम मित्र बन गए.
फिर ये यात्रा करते हुए थोडा और आगे बड़े . रास्ते में द्रोपदी को एक जगह प्यास लगी . द्रोपदी ने पानी पिने की इच्छा जताई .
युधिस्ठिर ने भीम को पानी लाने के लिए कहा .
भीम पानी लाने ले लिए चल पड़े .
भीम के गए काफी देर हो गए , वे वापस नहीं आये .
युधिस्ठिर ने अर्जुन को भेजा . अर्जुन गए तो गए ही रह गए , आये नहीं .
एक - एक कर के युधिस्ठिर ने अपने सरे भाइयों को पानी के तलाश में भेज दिया काफी देर के बाद भी कोई वापस नहीं आया. तो युधिस्ठिर खुद पानी और अपने भाइयों की तलाश में निकले.
टहलते टहलते वे एक तालाब के किनारे पहुचे तो देखा की उनके चारो भाई अचेतन हुए पड़े हैं. उन्होंने सोचा की प्यास से बेहोश हैं. इनके चहरे पे पानी का छिटा मार के होश में लाया जाये . जैसे ही पानी लेने के लिए तालाब पे झुके तालन से आवाज आई अगर पानी पीना है तो मेरे प्रश्नों का जबाब देना पड़ेगा तुमको . युधिस्ठिर ने पूछा कौन हो आप? तालाब से आवाज़ आई मैं कौन बनेगा करोड़पति से अमिताभ बच्चन बोला रहा हूँ . युधिस्ठिर मान गए . सवाल जवाब देना उनके बाएं हाथ का खेल था .
अपने गुरु द्रोन की क्लास में हमेशा वो 95% नंबर जो लाते थे . 100% भी लाने की तयारी थी पर तब ग्रेडिंग की व्यवस्था हो गयी . यहाँ पे उन्होंने अमिताभ बच्चन के 100 सवालो का सही सही जबाब दिया . अमिताभ बच्चन ने खुश होके कहा- परीक्षार्थी, परीक्षक से ज्यादा ज्ञानवान है .
फिर युधिस्ठिर ने अपने भाइयो पे पानी के छिटके मारे. पानी के छिटके पड़ते ही सरे पांडव होश में आये गए . होश में आते ही उन्होंने युधिस्ठिर से सवाल की - भाईजान आप हम पे ये पानी के छिटके मार के होली क्यों मना रहे हो .. तभी से हम होली का त्यौहार मानते आ रहे हैं .
वह से पांचो पांडव पानी ले द्रोपदी के पास पूछे . पर उनको वह पे द्रोपदी नहीं मिली .
उन्होंने अपने आस पास का सारा जंगल छान मारा . रास्ते में उनको जटायु मिला . उसने बताया - लंका का राजा रावण आपकी द्रोपदी का हरण कर के ले जा रहा था . मैंने विद्रोह करने की कोशिश की तो उसने मेरे पंख ये कह के का दिया की - ये पंख हमके डेड जटायु . मैं द्रोपदी को बचा नहीं पाया .
जटायु के दिशा निर्देश पे पे आगे बड़े . रास्ते में उनको हनुमान जी मिले .हनुमान जी ने उनको सुग्रीव से मिलाया . सुग्रीव ने बताया की अगर उनको उसकी मदद चाहिए तो बदले में उसको , उसके भाई बाली का राज्य दिलाना होगा .पांडव तैयार हो गए. युधिस्ठिर
ने अपने भाई भीम को बाली से लड़ने के लिए भेजा . भीम ने बाली को मल्लयुद्ध में बाली को पछाड़ दिया और उसके पैर पकड़ के दो तुकडे कर दिए . बाली की जगह सुग्रीव राजा बन गया .बाली को इतिहास में जरासंध के नाम से भी जाना जाता है.
सुग्रीव ने अपने वादे के अनुसार हनुमान को द्रोपदी की खोज में भेजा .
हनुमान ने पता लगाया की द्रोपदी को लंका के राजा रावण ने अशोक वाटिका में रखा है.
द्रोपदी का पता लगते ही पांडवो ने लंका पैर चढाई करने की योजना बनाई. लंका की तरफ बदते हुए वे जा पहुचे कन्याकुमारी. वहां से आगे जाने का मार्ग बंद था तो उन्होंने नल नील को बुला के सागर के उपर पूल बनाने का टेंडर देने को कहा . नल नील पूल बनाने के लिए तैयार हो गय. पूल बनाना चालू हो गया. पांडव रोज़ ही पूल की गुद्वात्ता की जाँच करते थे की कही इसमें नकली माल तो नहीं खपाया जा रहा है . कड़ी मेहनत और लगन से pool तैयार हो गयी . उसपे चढ़ के वे लंका की डरती पे उतारे ही थे की वहा के कस्टम वालो ने पासपोर्ट और वीसा की जाँच शुरू कर दी . कई लोग अंदर ही . पांडवो के पास भी पासपोर्ट और वीसा नहीं था . वनवास पे जाने के पहले दुर्योधन ने उनका पासपोर्ट और वीसा अपने पास जमा कर के देश से बहार जाने से मना किया था . कस्टम वाले पांडवो को अंदर ले जाने वाले ही थे की विभीषण वहा आ गए . उन्होंने पांडवो के सामने एक शर्त राखी . की अगर तुम को रावण को मारने का रास्ता बताऊ तो तुमको मुझे लंका का राजा बनाना पड़ेगा और बदले में मैं तुमको द्रोपदी को वापस कर दूंगा .
पांडव तैयार हो गए .
बहुत घमासान लडाई हुई और रावण मारा गया . पांडव अपनी द्रोपदी को लेकर वापस हस्तिनापुर आ गए .
और ख़ुशी ख़ुशी राज्य करने लगे .
नोट :
यह आज सन्(2009) के एक हजार साल बाद यानि 3009 के इतिहास के किताब के एक अध्याय से लिए गया है .
समर्पित :
उन सरकारों के नाम पे जो इतिहास को अपने मन से लिखवाते और स्कूल में पद्वते है . दूसरी सरकार आती है और उनमे फेरबदल कर के दुबारा से छपवाती है .
ख़ुशी
April 14, 2011
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अपनी किरणों से जग को वह ख़ुशी दे जाता है
आसमान में देखो पक्षी कैसे उड़ाते जाते है ?
करते है कलरव और गीत ख़ुशी के गाते है
कलकल के के बहती नदी सबको ये समझाती है
रुकने को दुःख कहते है चलना ख़ुशी कहलाती है
फूलों पे मढ़राते भवंरे जब उसका रस पा जाते है
हो कर के मतवाले वे भी ख़ुशी में गाते है
काले काले बदल धरती पे जब बुँदे बरसते है
खेतो में लहराते पौधे झूम ख़ुशी में जाते है
पर रोज़ यहाँ मैं मरता हूँ !
April 14, 2011
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मन की आस ना पूरी हुई,
आज़ादी का सपना, अपना,
पूरी, पर अधूरी हुई |
इतिहास दुहराता है है खुद को,
इतिहास में ही हम पढ़ रहे हैं,
अपनी अपनी हस्तिनापुर को,
आज भी भाई लड़ रहे हैं |
सुख चुका आँखों का पानी,
लाज हया विलुप्त हुई,
दानवता विस्तार पा रही,
मानवता सुसुप्त हुई|
गिर रहें हैं कट कट के सर,
धर्म के कारोबार में,
खुदा भी अब बँट चुका,
उत्तर- दक्षिण के त्यौहार में|
थी भली लाख गुना गुलामी, आज से,
आपस में तो ना लड़ते थे,
उन फिरंगी गोरों के आगे आ,
एक हिन्दुस्तानी होने का तो दम भरते थे|
था सही ऐ "नाथू" तूं,
अब यही सोचा करता हूँ,
मारा तुमने मुझे एक बार,
पर रोज़ यहाँ मैं मरता हूँ !
ये सिसकन ही जिंदगानी है,
April 14, 2011
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सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
किस्मत को या रब को कोसे, कोसे से ना रोटी मिलती,
मेहनत भी न कर पाते , बिन रोटी ना जां ये हिलती |
करमहीन बना डाला उनने , रोटी देते जो दानी हैं,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
थूक के मलहम लगा लगा के, सूखे ओठ को गिले करते,
पेट की आग बुझा लेते तब , आँखों से जब पानी झरते,
पर कुवे जैसा सुखा चूका , आँखों का जो पानी है.
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
जी रहे थे मर मर के, तो क्या हुआ जो मर गए,
छुटा पीछा नारकीय जीवन से, दुनिया से तो तर गए,
पर, छोड़ गए अपनी औलादे, ये कैसी नादानी है,
सिसक सिसक के जी रहे वे, ये सिसकन ही जिंदगानी है,
Sunday, April 10, 2011
पियाज वाला चाय
April 10, 2011
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Saturday, April 9, 2011
अँधेरा जैसा छा जाता है !
April 09, 2011
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Friday, April 8, 2011
Tuesday, March 29, 2011
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,
March 29, 2011
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ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,
करो विजय दुनिया को, तुम्हारा विजेता सा व्यव्हार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,
हिल उठे ये धरती फट जाये आकाश, कुछ ऐसी तेरी ललकार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,
ऐ इंडिया जीतो ऐसे हर तरह जयकार हो,
ये क्रिकेट एक युद्ध है, इस युद्ध में उनकी हार हो,
Sunday, March 27, 2011
पारो से प्यार ना करेब !
March 27, 2011
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चढ़े के त चढ़ गइनी, छत से उतारो के.
लोगवा जे देखलस त भइल बड़ा शोर
कुकुर साला छड़प गइल बूझिये के चोर
भगनी हम भायें दे, प्यार कुल्ही भूल गइल,
झाड़ी में फंस के धोतियो खुल गइल.
जान बचा के केन्हुगन घरे पहुँच गइनी,
दुआरे पे बाबु जी इंतजार करत रहनी,
मार मार के हमारे मुह फोर दिहनी,
मोतिया आ हमारा के बाहरे छोर दिहनी,
राती में कब्बो उनके दीदार ना करेब,
फेरु कब्बो पारो से प्यार ना करेब.
Friday, March 11, 2011
Tuesday, March 8, 2011
Friday, March 4, 2011
मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे !!!
March 04, 2011
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सारी दुनिया से वो न्यारी .
प्यार से कहती मुझे
मम्मी कहती मुझे शैतान की नानी ,
कान उखाड़ के करे पिटाई ,
रोने पे चोकोलेट पकड़ाई ,
रोते देख मुझे खुद भी रोटी ,
फिर क्यों मेरी पिटाई करती .
पापा मेरे बड़े ही न्यारे ,
सारी दुनिया से वो प्यारे .
अच्छी अच्छी बाते बतलाते ,
बुरे काम पे डांट लगते ,
कभी जो मम्मी करे शिकायत ,
पापा कहते हमे नालायक .
कभी जो करते हम अच्छा काम ,
पापा कहते - तुमने किया मेरा रौशन नाम .
मम्मी पापा मेरे सबसे अच्छे
हम भी उनके अच्छे बच्चे .
Thursday, February 17, 2011
गम ना करो !
February 17, 2011
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तो ये बताओ,
क्यों नहीं हुआ तुम्हारा बेहतर?
क्या तुमने सोचा ?
तुमने किया है किसी का बेहतर?
खुद के बेहतर होने की अपेक्षा में,
तुमने कर दी उपेक्षा,
दुसरे की बेहतर करने की.
गम ना करो !
ना सहने की चीज़ है,
ना कहने की चीज़ है,
गम,
बिना गम के कोई जिंदगी नहीं होती.
गिर कर सम्हलने के लिए लगती है,
ठोकर जिंदगी में,
फिर भी जो ना सम्हले,
वो स्वाभिमानी नहीं होता.
क्यों रोते हो हमसफ़र के लिए ?
क्यों फैलाते हो बाँहे किसी के लिए ?
सिने से लगा के बैठोगे ये गम कब तलक ?
एकाध रास्ते अकेले तय कर के भी देख लो !
Monday, January 31, 2011
Friday, January 7, 2011
कृषि मंत्री को चिट्ठी !
January 07, 2011
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आदरणीय कृषि मंत्री जी ,
मैं आपके देश का एक गरीब किसान हूँ . पुरे साल कड़ी मेहनत कर के अनाज , और सब्जियां उगाता हूँ . भगवान और मानसून कि दुआ से कमी -बेशी इतना तो अनाज और सब्जियां हो ही जाती है औसतन सबका पेट भर सके . फसल पुरे होने के बाद मेरी कोशिश रहती है कि अनाज और सब्जियां जल्दी से जल्दी बाज़ार में पहुचें और बाज़ार वालो का भला हो , माफ़ कीजियेगा मेरा मतलब कि देश वालो का भला हो . पर एक बात समझ नहीं आती बाज़ार में वे सब दिखाई क्यों नहीं देती हैं . सबसे बड़ी बात कि जब मैं ही खरीदने जाता हूँ तो मुझे दुगने दाम चुकाने पड़ते है . खैर ये बताइए , मैं तो अपना काम करता हूँ . आप अपना काम कब करोगे ?
सप्रेम
एक भारतीय किसान


